हाट बाजार के नाम पर घोटाला: लाखों की लागत से बने हाट बाजार में बंध रहे है मवेशी

करैरा। ग्रामीण अंचल में विकास के नाम पर किस तरह आम जनता के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसकी जीवंत हकीकत है करैरा जनपद की ग्राम पंचायतों में बने मुख्यमंत्री हाट बाजार। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक करीब पांच साल पहले शिवपुरी जिले की करैरा जनपद की कुल 66  ग्राम पंचायतों में से 32 में मुख्यमंत्री हाट बाजार स्वीकृत हुए थे। 

लेकिन आज तक सिर्फ 22 ही पूर्ण रूप से बन सके हैं जबकि 10 अधूरे हैं। सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि निर्माण से लेकर आज तक किसी भी हाट बाजार का उपयोग नहीं हो सका है। यही कारण है कि इन हाट बाजारों का उपयोग ग्रामीण अपनी सुविधा अनुसार कर रहे हैं। कहीं हाट बाजार में ग्रामीण अपने पशु बांध रहे हैं तो कहीं कचरादान बन गए हैं।

जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री हाट बाजार योजना के तहत करैरा जनपद में कुल 32 हाट बाजार स्वीकृत हुए थे, जिनके निर्माण के लिए शासन द्वारा प्रति हाट बाजार 14 लाख 14 हजार की राशि दी गई थी। जनपद पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में 32 में से 22 ही पूर्ण रूप से बने हैं जबकि  की पड़ताल में सामने आया है कि अधिकांश हाट बाजार पूर्ण रूप से बनाए ही नहीं गए और सांठगांठ करते हुए इन हाट बाजारों को कागजों में पूर्ण दर्शाकर राशि भी निकाल ली गई। 

बनने थे 5 हजार आबादी वाली ग्राम पंचायत में 
हाट बाजार निर्माण में अनियमितता इस हद तक बरती गई कि शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों के मुताबिक मुख्यमंत्री हाट बाजार का निर्माण  ऐसी ग्राम पंचायत में किया जाना था जिसकी आबादी 5 हजार से कम न हो। लेकिन स्थानीय स्तर पर सांठगांठ के चलते ऐसी पंचायतों के नाम भेेजे गए जिनकी आबादी 5 हजार तो क्या तीन हजार भी बमुश्किल है। इसके अलावा करैरा की बड़ी पंचायतों में से एक दिनारा व आमोलपठा में हाट बाजार है ही नहीं। 

गांव में यह मिली स्थिति 
मुख्यमंत्री हाट बाजार की जमीनी हकीकत जानने हमारी टीम ने खुद करैरा जनपद के कई गांवों मे जाकर देखा तो हकीकत कुछ और ही सामने आई। ग्राम  पंचायत मछावली  में हाट बाजार में अधूरा मिला। यहां सिर्फ फाउंडेशन बना था तथा पिलर खड़े थे। इसी तरह ग्राम चिन्नौद में भी हाट बाजार की स्थिति अधूरी मिली। 

खास बात यह है कि चिन्नौद वह गांव है जिसकी आबादी 3 हजार के करीब है। इस लिहाज से इस गांव में हाट बाजार नहीं बनाया जा सकता था। इसके अलावा ग्राम कड़ौरा लोधी, छितीपुर, डामरौनखुर्द, डूमघुना आढर बासगढ  में भी हाट बाजार का निर्माण करा दिया गया जबकि इन गांव की आबादी 5 हजार नहीं है। 

आमोला क्रेशर पंचायत में प्रभारी मंत्री ने किया था उद्घाटन
सरकार की जनहितैषी योजनाओं के क्रियान्वयन के प्रति जनप्रतिनिधि कितने सजग हैं इसकी नजीर है ग्राम पंचायत अमोला क्रेशर में बनाया गया हाट बाजार। खास बात यह है कि इसका उद्घाटन बीते साल जिले के प्रभारी मंत्री व स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह गुर्जर ने किया था लेकिन आज तक यह उपयोगविहीन है। यहां बताना होगा कि अमोला क्रेशर की कुल आबादी 28 6 0 है, जिसमें से आदिवासियों की संख्या 1500 के करीब है जो गांव से दूर अन्य स्थानों पर बसे हैं । यानि कि यह गांव हाट बाजार के लिए किसी भी तरह उपयुक्त नहीं कहा जा सकता। 

इनका कहना है- 
हमारे गांव में पांच साल पहले मुख्यमंत्री हाट बाजार बनाया गया था जिसके बाद से आज तक इसका कोई उपयोग नहीं हुआ है। यही नहीं  निर्माण के लिए जिस स्थान का चयन किया गया है वह भी गलत है। गांव से काफी दूर हाट बाजार का निर्माण किया गया है। 
कपिल शर्मा, ग्रामीण 

करैरा जनपद में बनाए गए हाट बाजारों के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। लेकिन आपने जो बताया है, उसे मैंने संज्ञान में ले लिया है। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद ही मैं इस संबंध में कुछ कह पाऊंगा।
राजेश जैन, सीईओ, जिला पंचायत शिवपुरी
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