ये खबर छपवादो अखबार में,पोस्टर लगवादो बाजार में: देवेन्द्र जैन क्यो हारे चुनाव में...

एक्सरे @ ललित मुदगल।शिवपुरी। फिल्म अफलातून का एक गाना ये खबर छपवादो अखबार में, पोस्टर लगवा दो बाजार में कोलारस की राजनिति में फिट बैठता है। सरकार-संगठन और क्षेत्रीय नेता और स्वयं देवेन्द्र जैन अपनी हार का कारण तलाश रहे है। सूत्र बता रहे है कि देवेन्द्र जैन को अपनी हार का कारण मिल गया है और वे इस हार के कारणों को भोपाल भी सोंप आए है। 

भाजपा की स्थिती शून्य 
कोलारस में भाजपा की स्थिती शून्य है, स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, मंडी समिति, सहरकारी समितियों के चुनाव, लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव लगातार 3 बार हारी है।

सब कुछ था भाजपा के पास कोलारस में, देवेन्द्र जैन से पूर्व 
ऐसा नहीं है कि इस क्षेत्र में भाजपा का प्रभाव न रहा हो। पूर्व विधायक ओम प्रकाश खटीक के समय कोलारस-बदरबास में जनपदों और मंडियों में भाजपा का दवदवा रहता था। सहकारिता में भी भाजपा नेताओं का बोलबाला था। 2008 में शिवुपरी नगर पालिका के चुनाव में करारी हार झेल चुके देवेन्द्र जैन को कोलारस की जनता और भाजपाईयो की मेहनत ने देवेन्द्र  जैन को भोपाल पहुंचाया था। 

परंतु ऐसा माना जाता है कि भाजपा में आपसी मतभेद और भितरघात 2008 के आम चुनाबों तक नही थे। और 2008 में  इस विधानसभा से शिवपुरी में नगर पालिका में एक लंबी हार झेलकर लौटे देवेंद्र जैन को चुनकर भोपाल भेजा था। देवेन्द्र जैन की यह जीत यह दर्शाती है कि जब कोलारस में भाजपा एक थी,और जब देवेन्द्र जैन ने चुनाव नहीं भाजपा ने लडा था। 

बताया जाता है कि इस चुनाव के वाद ही कोलारस में राजनीतिक अराजकता पैदा हो गई थी। इनके समय ही कोलारस मे दोनों जनपद कांग्रेस नेें छिन लीं। और पिछले दो कोलारस के निकाय के चुनावों में किसकी क्या भूमिका रही वह किसी से छुपी नही है और जो 2013 के चुनावों में अनेक भाजपाइयों ने जो किया उसे इनकी भूमिका के बदले हिसाब चुकाना कहा गया। 

देवन्द्र जैन फोड रहे है हार की ठीकरा 8 नेताओं पर 
बताया जा रहा है कि देवेन्द्र जैन ने जिले सहित कोलारस के 8 नेताओं की एक लिस्ट तैयारी कर ली है और इन्ही नेताओं पर अपनी हार का ठीकरा फोडऩे की तैयारी कर रहे है। इनमें से 4 नेता ऐसे है जो इस बार टिकिट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे और आने वाले मप्र के आम विधानसभा चुनावों में टिकिट के प्रबल दावेदार होगें। 

देवेन्द्र जैन ने इन भाजपा नेताओं पर भितरघात का आरोप लगाते हुए एक शिकायत तैयार की है और मांग कर रहे है कि इन नेताओं को पार्टी से बहार करे। एक तीर और 2 निशाने लग रहे है। एक तो हार की ठीकरा पूरा देवेन्द्र के सर पर नहीं होगा और आगामी चुनावो में टिकिट के दावेदार नही होगें। 

राजनितिक पंडितों ने यह बताए हार के कारण
जैसा कि विदित था कि देवेन्द्र जैन को जैसा कि कोलारस ने अपना प्रत्याशी घोषित किया वैसे ही वह भाजपा के नही स्वंय के मैनेजमेंट के घोडे पर सवार हो गए। पार्टी के कार्यकर्ताओ को पीछे कर जैन एण्ड बद्रर्स को चुनावी समर में झोंक दिया गया। 

जैसा की सबको ज्ञात था कि जो नेता भितरघात कर सकते थे,या जिन पर अंशका थी उन से देवेन्द्र जैन ने स्वयं मिटिंग नही की हो सकता था कि यह भितरघात नही हो सकती। उल्टा उन नेताओं को प्रत्याशी के ओर निगलेट किया गया। उन्हें विश्वास में लेकर जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। 

इन नेताओं से पार्टी और सरकार ने बातचीत की लेकिन उससे काम नहीं चला टूटे दिल नहीं जुड़े।  इन नेताओं ने सिर्फ अपने आप को अपनी पोलिंग तक ही सीमिति कर लिया। हो सकता है कि जिन नेताओं के देवेन्द्र जैन ने लिस्ट बनाकर भोपाल भितरघात का तमगा लगाकर सौंपी है उन्होंने भितरघात नहीं किया हो लेकिन हार का सबसे बड़ा कारण यह अवश्य है कि इन नेताओ ने अपना पूरे बल का प्रयोग ने करते हुए,अपने को अपनी पोलिंग तक सिमित कर लिया था। 

अब हार के बाद लकीर पीटने से क्या फायदा 
अब बताया जा रहा है कि देवेन्द्र जैन अपनी हार का ठीकरा फोडते हुए 8 नेताओ का नाम भोपाल दे आए है। शिकायत पर कुछ न कुछ रिएक्शन अवश्य होगा। देवेन्द्र जैन ओर शिकायत की गई नेताओ में खाई गहरी होगीं, गुटवाजी फायलो से निकलकर सडकों पर आ सकती है। इससे आने वाले चुनावों में पार्टी को नुकसान हो सकता है। और  देवेन्द्र जैन को परमानेंट नुकसान...
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