क्या सिंधिया पर भारी पड़ेगी भाजपा की तिकड़ी? कल कौन रहेगा मैन ऑफ द मैच?

शिवपुरी। कोलारस विधानसभा उपचुनाव में बाजी किसके पक्ष में जाती है इसका फैसला आने में अभी एक दिन की देर बाकी हैं, लेकिन मतगणना समाप्त होने के बाद यह तय हो गया है कि कोलारस उपचुनाव में मैन ऑफ द मैच के दावेदार कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया होंगे वहीं भाजपा की ओर से मैन ऑफ द मैच की कतार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, खेल एवं युवक कल्याण मंत्री यशोधरा राजे तथा जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा हैं। भाजपा की ओर से इस तिकड़ी ने कहीं न कहीं मैच का रूख बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है। 

कोलारस विधानसभा उपचुनाव में एक बात सुनिश्चित रूप से कही जा सकती है कि भाजपा ने इस मुकाबले में टीम वर्क का जबरदस्त प्रदर्शन किया है। भाजपा की ओर से टीम के एक-एक खिलाड़ी ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है, लेकिन इसके बाद भी गैम चैंजिंग पारी यदि किसी ने खेली है तो वह भाजपा की ओर से किसी एक खिलाड़ी ने नहीं बल्कि तीन-तीन खिलाडिय़ों ने खेली है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान परिदृश्य में तब आए जब कोलारस क्षेत्र में सिंधिया का जादू उफान पर था और पिछले चुनाव में कांग्रेस की 25 हजार की बढ़त उपचुनाव में बढ़ती हुई नजर आ रही थी। 

तब मुख्यमंत्री ने सहरिया सम्मेलन और जाटव सम्मेलन के जरिए कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने का सुनियोजित ढंग से प्रयास किया। इससे भाजपा को फायदा अवश्य हुआ, लेकिन फिर भी यहीं माना जा रहा था कि भाजपा पिछले चुनाव में मिली 25 हजार मतों की हार का अंतर कम अवश्य कर ले, लेकिन वह कांग्रेस को पराजित नहीं कर पाएगी। इसका कारण यह भी था कि कोलारस में जबरदस्त प्रभाव रखने वाली यशोधरा राजे की चुनाव से लगातार दूरी बनी हुई थीं, लेकिन उस समय नरोत्तम मिश्रा ने मुकाबले को और नजदीक बनाने का प्रयास किया। 

जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही थे जिन्होंने सबसे पहले कोलारस की जनसभाओं में यह कहा कि हमें 5 महीने के लिए आजमा लो और हम 5 माह में 5 साल का विकास कार्य नहीं कर पाए तो 2018 में हमें लात मारकर बाहर कर देना। इससे कोलारस में भाजपा के पक्ष में अच्छा वातावरण बना और कांगे्रस से भाजपा की दूरी और कम हुई। कोलारस विधानसभा क्षेत्र में सिंधिया परिवार का जबरदस्त प्रभाव है। कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया कमान संभाले हुए थे और इस कारण कांग्रेस को चुनाव प्रचार में एज (बढ़त) मिलती हुई साफ दिख रही थी। 

भाजपा को उस बढ़त को कम करने के लिए यशोधरा राजे रूपी तुरूप के इक्के की जरूरत थी, लेकिन कहीं न कहीं यशोधरा राजे और भाजपा के बीच संवादहीनता बनी हुई थी। यशोधरा राजे चुनाव प्रचार में क्यों नहीं आ रहीं? मीडिया के इन सवालों का न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई अन्य वरिष्ठ नेता जबाव दे पा रहा था। वह यह कहकर पल्ला छुड़ा रहे थे कि यशोधरा राजे आएंगी अवश्य। मीडिया भी समझ रही थी कि यह सब मन समझाने की बात है और कोलारस उपचुनाव महल बनाम महल नहीं बनेगा। 

सूत्र बताते हैं कि यशोधरा राजे को खिन्नता थी कि उनसे बिना पूछे कोलारस में चार-चार मंत्रियों को प्रभारी बना दिया। सवाल सिर्फ आत्मसम्मान का था, लेकिन समय रहते भाजपा ने अपनी गलती महसूस की और यशोधरा राजे से संवाद किया तो उन्होंने कोलारस की जिम्मेदारी संभालने में बिल्कुल भी संकोच नहीं किया। नामांकन के एक दिन पहले वह शिवपुरी आईं और दिन भर उन्होंने अपने समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं की मैराथन बैठकें ली और 5 फरवरी को जब वह मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र जैन का नामांकन फॉर्म भराने कोलारस पहुंची तो भाजपा के पक्ष में पहली बार सकारात्मक माहौल बनना शुरू हो गया। यशोधरा राजे के आने से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत हुआ और मतदाताओं में भी भाजपा के पक्ष में हवा बनना शुरू हो गई। 

इसके साथ ही भाजपा कांग्रेस के साथ मुकाबले में बराबर आ गई। दूसरी ओर कांग्रेस की बात करें तो इस दल के पास कोई अन्य दूसरा नेता नहीं है जो कोलारस उपचुनाव में अपने योगदान को गिना सके। यह सिंधिया ही थे जिन्होंने पूरी पार्टी का बोझ अकेले अपने कंधे पर उठा रखा था। उनके कोलारस में आते ही कांग्रेस के पक्ष में एक अच्छा माहौल बनना शुरू हो जाता, लेकिन उनके जाने के बाद उस माहौल को बरकरार रखने का जिम्मा संभालने वाला कोई नहीं था। एक अकेले सिंधिया पूरी भाजपा से लोहा ले रहे थे। 

इसे महसूस कर सिंधिया ने सभाओं में साफ-साफ कहा कि कोलारस में चुनाव देवेंद्र और महेंद्र के बीच नहीं बल्कि मेरे और शिवराज के बीच है। उन्होंने चुनाव में अपनी उम्मीदवारी घोषित कर सोच समझकर निर्णय लिया। हालांकि यह भी सत्य है कि मतदाता ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को उम्मीदवार तो माना, लेकिन यशोधरा राजे को उम्मीदवार नहीं माना। इससे कहीं न कहीं महल को फायदा भी हुआ और चुनाव महल बनाम महल नहीं बन पाया।  
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