जातिगत गणित: कांग्रेस के परंपरागत वोटों मेें सेंध लगाने की कोशिश

सतेन्द्र उपाध्याय/शिवपुरी। जिले के कोलारस में होने बाले उप चुनाव पर पूरे मध्यपद्रेश की राजनीति की नजर टिक गई है। यहां भाजपा किसी भी दम पर चुनाव को अपने कब्जे में करना चाह रही है। वही कांग्रेस अपने इस गढ में अपनी जीत और सांसद सिधिया के बलबूते अपने आप को जीता हुआ मान रही है। परंतु इस चुनाव में जो बात सबसे महत्वपूर्ण निकलकर सामने आ रही है वह यह है कि इस चुनाव में भाजपा कांग्रेस के परंपरागत बोटरों को सेंध लगाने का प्रयास कर रही है। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि पूरे मध्यप्रदेश की राजनीति से बिलुप्त हो चुकी उमा भारती को भी भाजपा यहा तुरुप के रूप में उपयोग कर रही है। लोधी बोटरों को बटोरने के चलते भाजपा इन्हें भाजपा के बेनरों पर उखेर रही है। जबकि पूरे मध्यप्रदेश के किसी भी चुनाव में उमा भारती को भाजपा ने ही किनारा कर दिया है। 

दूसरी और भाजपा की सर्वाधिक नजर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाताओं पर है। कोलारस में अनुसूचित जाति के लगभग 30 हजार मतदाता हैं जबकि अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं की संख्या लगभग 35 हजार है। 2 लाख 45 हजार मतदाताओं वाले कोलारस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के मतदाताओं का मत प्रतिशत लगभग 27 से 30 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति वर्ग में बड़ी संख्या जाटव मतदाताओं की है। जाटव मतदाता बसपा का वोट बैंक माना जाता है, लेकिन इस बार बसपा उम्मीदवार मैदान में न होने से कांग्रेस को भरोसा है कि जाटव मतदाताओं का झुकाव उनकी ओर होगा, परंतु भाजपा इस वर्ग के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। 

भाजपा यह मुद्दा जोरशोर से उठा रही है कि कांगे्रस की आपत्ति के कारण ही अनुसूचित जाति के गोपीलाल जाटव को मंत्रिमण्डल में जगह नहीं मिल सकी। अनुसूचित जनजाति के मतदाता कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है, लेकिन मुख्यमंत्री ने सहरिया सम्मेलन में आदिवासी परिवारों को 1 हजार रूपए प्रतिमाह देने की घोषणा कर सहरिया वोटरों को अपने पक्ष में खींचने का प्रयास किया है। भाजपा की नजर कुशवाह वोट बैंक पर भी है और नारायण सिंह कुशवाह को मंत्री बनाकर भाजपा ने क्षेत्र में सक्रिय कर दिया है। कांग्रेस को यादव मतों पर भरोसा है। विधानसभा क्षेत्र में यादव मतदाताओं की संख्या लगभग 25 हजार है। कोलारस में जातिगत फैक्टर हावी हो रहा है और जातिगत समीकरणों को जो प्रत्याशी अपने पक्ष में कर लेगा जीत उसी की होगी। 

यहां देखना यह है कि इस चुनाब में भाजपा के मंत्रीयों की बड़ी भारी दुर्दशा हुई है। भाजपा ने चुन-चुन कर अपने मंत्रीयों को कोलारस मेें भेज दिया। परंतु सबसे अहम बात की क्षेत्र की जनता अब इन मंत्रीयों के रोज-रोज की आबाजाही से त्रस्त आ गई। और पब्लिक का रिस्पॉस न के बराबर मिल रहा है। अब पब्लिक का कम मिलने बाले इस रिस्पॉस ने भाजपा ने नईं तकरीब लगाई और 4-6 किमी के दायरे में ही हैलीकॉप्टर के लगातार दौरे कर डाले। जिससे पब्लिक नेताओं को तो नहीं अपितु हैलीकॉप्टर को जरूर देखने पहुंच रही है। 

चुनाव में भाजपा ने जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए संबंधित जातियों के मंत्रियों को तैनात किया है। जिसका उसे फायदा भी मिल रहा है। भाजपा के  मंत्रियों में सर्वाधिक भीड़ यशोधरा राजे और डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सभाओं में उमड़ रही है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है कांग्रेस प्रत्याशी की प्रचार की कमान अके ले सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाल रखी है। उनकी सभाओं में अच्छी भीड़ उमड़ रही है। कांग्रेस भी जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में करने में लगी हुई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कारण भाजपा मानती है कि धाकड़ मतों का झुकाव उसकी ओर होगा। कोलारस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 25 हजार धाकड़ मतदाता हैं। 

इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सुपुत्र कार्तिकेय चौहान क्षेत्र में धाकड़ सम्मेलन भी कर चुके हैं। जबकि कांग्रेस को भरोसा है कि सिंधिया के ग्लैमर के चलते कम से कम आधे धाकड़ मत उन्हें मिलेंगे। धाकड़ उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से हटाने की भाजपा की रणनीति अवश्य सफल रही है। 
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