शिवपुरी कलेक्टर की निष्पक्षता पर सवाल

भोपाल। चुनाव आयोग द्वारा मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की निंदा किए जाने के साथ ही शिवपुरी कलेक्टर तरुण राठी की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा हो गया है। कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट में यशोधरा राजे को क्लीनचिट दे दी थी जबकि चुनाव आयोग ने ना केवल मामला संज्ञान में लिया बल्कि निंदा भी की। खतौरा कांड में भी कलेक्टर राठी का एक बयान सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि खतौरा में भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद हुआ था जबकि कांग्रेस प्रत्याशी के वीडियो बयान में वो पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगा रहे थे। 

यशोधरा राजे पर क्या आरोप लगे थे
खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कोलारस में प्रचार के दौरान मतदाताओं से धमकी भरे लहजे में कहा था कि पंजे को वोट दोगे तो कैसे सुविधाएं मिलेंगी। दूसरी सभा में यशोधरा ने कहा था कि सड़क की मांग की तो बिजली भी वापल ले लेंगे। कांग्रेस ने आयोग से इस घटना की शिकायत वीडियो के साथ की थी। हालांकि यशोधरा ने जवाब में कहा था कि वे सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी दे रही थीं, वोटरों को डराने धमकाने जैसी कोई बात नहीं की। शिवपुरी कलेक्टर तरुण राठी ने तो मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेजी रिपोर्ट में यशोधरा को क्लीन चिट भी दे दी थी, जबकि सीईओ सलीना सिंह ने इस पर आपत्ति जताई थी। 

कलेक्टर ने क्या रिपोर्ट दी थी
कांग्रेस प्रवक्ता जेपी धनोपिया की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह ने शिवपुरी कलेक्टर तरुण राठी से रिपोर्ट मांगी थी। राठी ने कोलारस के रिटर्निंग ऑफिसर से प्रतिवेदन मांगा था। पीठासीन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए कहा कि पटवारी से जांच कराई। इसमें पाया गया कि यशोधराराजे सिंधिया ने पडोरा गांव में कोई सभा नहीं की। इसके लिए कोई अनुमति भी नहीं ली गई।

भाजपा की स्टार प्रचारक होने के नाते सिंधिया सरदार प्रताप सिंह के पुत्र बलवंत सिंह के बाड़े में, जो गांव के बाहर है, बने घर में आई थीं। यहां कार्यकर्ताओं के साथ चाय पी और बातचीत की थी। इसमें मतदाताओं को धमकाने जैसी कोई बात नहीं हुई, बल्कि उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट दिलाने के लिए लोगों को प्रेरित करने की बात की थी।

इस रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि वायरल हुए वीडियो क्लिप को देखने से किसी व्यक्ति विशेष को धमकाने जैसा तथ्य प्रकट नहीं होता है, न ही किसी प्रकार का कोई लालच दिया जाना प्रकट होता है। वीडियो में लोगों को भाजपा के पक्ष में वोट डालने की अपील की गई, जिससे किसी प्रकार की आचार संहिता के उल्लंघन की पुष्टि नहीं होती है। वीडियो क्लिप में किसी प्रकार की धमकी देना भी प्रमाणित नहीं पाया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक कलेक्टर के इस प्रतिवेदन और वीडियो क्लिप को देखने के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे अपनी रिपोर्ट के साथ चुनाव आयोग को भेज दिया। आयोग ने इस रिपोर्ट के आधार पर भाजपा की स्टार प्रचारक यशोधराराजे सिंधिया को प्रथम दृष्टया आचार संहिता उल्लंघन का दोषी पाते हुए नोटिस जारी किया। यशोधरा राजे ने अपना जवाब सबमिट किया। इसके बाद आयोग ने यशोधरा राजे की निंदा की। 
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