शिवपुरी: 'मेरा परिवार गरीब है' कांड पर मानवाधिकार का नोटिस जारी

Updesh Awasthee
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भोपाल। शिवपुरी में सहरिया आदिवासियों के घरों पर लिखे गए सरकारी नोट 'मेरा परिवार गरीब है' मामले में मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। बता दें कि शिवपुरी जिले के एक लॉ स्टूडेंट अभय जैन की शिकायत पर यह नोटिस जारी किया गया है। बता दें कि शिवपुरी जिले के बिनेगा गांव में जहां सहरिया आदिवासियों के घर पर मेरा परिवार गरीब है, लिख दिया गया है। हालांकि इस मामले में एक लॉ स्टूडेंट की शिकायत के बाद मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है, लेकिन इसी इलाके में भविष्य में उपचुनाव को देखते हुए सियासी हंगामा भी शुरू हो गया है।   

नहीं तो सरकारी लाभ नहीं मिलेगा
शिवपुरी जिले में सहरिया आदिवासियों की अच्छी खासी संख्या है। जिले के बिनेगा गांव में काफी संख्या में आदिवासी परिवार निवास करते हैं। यहां रहने वाले आदिवासियों के पास करीब दो महीने सरकारी अमला पहुंचा और उसने सहरिया आदिवासियों को समझाइश दी, कि 'मेरा परिवार गरीब है, यह वाक्य तुम घरों की दीवारों पर लिखवा लो, फिर तुम्हे गेंहू, चावल सहित सरकारी की तरफ से मकान और कई योजनाओं का फायदा होगा और पैसा मिलेगा।' 

जलील करने के बाद भी नहीं दी सुविधाएं
गरीब आदिवासी ने अनाज और सरकारी योजनाओं का फायदा पाने के फेर में अपने घर पर मेरा परिवार गरीब लिखवा लिया और अब ये आदिवासी उन सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं, जो वादे मेरा परिवार गरीब है, लिखवाते समय उनसे किए गए थे। न तो इन आदिवासियों को समय पर राशन मिल रहा है और न ही अब इन आदिवासियों के लिए प्रधानमंत्री आवास और अन्य सुविधाओं का लाभ अभी तक मिला है। 

मानव अधिकार आयोग ने मांगा जवाब 
उलटे मकानों पर मेरा परिवार गरीब है, लिखने के कारण ये आदिवासी मजाक का विषय अलग बन गए हैं। हांलाकि इस मामले में शिवपुरी जिले के एक लॉ स्टूडेंट अभय जैन ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करायी है। शिकायत दर्ज कराने के बाद मानव अधिकार आयोग ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए शिवपुरी जिला प्रशासन से जवाब मांगा है। 

इसी क्षेत्र में है उपचुनाव
वहीं दूसरी तरफ इसको लेकर सियासत भी तेज हो गयी है। दरअसल, ये इलाका शिवपुरी जिले के कैलारस विधानसभा इलाके में आता है। जल्द ही कैलारस विधानसभा के लिए उपचुनाव होने वाले हैं। कैसारस विधानसभा में आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं, ऐसे में इनको रिझाने के लिए शिवराज सिंह ने महिलाओं को एक हजार रुपए और बिना लिखित परीक्षा के पुलिस में भर्ती होने का एलान किया था, लेकिन इस घटना के बाद शिवराज सिंह का दाव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। 

विपक्ष ने साधा निशाना 
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इस घटना पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि क्या यही 12 साल बेमिसाल हैं, उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवार के घर पर 'मेरा परिवार गरीब है' लिखा जाना शर्मनाक है। उन्होंने कहा है कि अपने 12 साल की उपलब्धियों को बताते हुए करोड़ों खर्च करने वाले शिवराज सरकार के हालत ये है कि, गरीब को अपने घर के दरवाजे के बाहर "मेरा परिवार गरीब है" लिखवाना जरूरी है, तब ही उन्हें सरकारी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है की शिवराज सरकार को सारी उपलब्ध्यिां झूठी हैं। आज तक वह लोगों की गरीबी नहीं मिटा सकी जबकि दूसरी दावा है कि प्रदेश के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आम गई है।

सिंधिया ने साधा निशाना 
वहीं दूसरी तरफ गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि, 'मैं मानता हूं कि यही भाजपा और शिवराज सरकार की नीति, सोच और विचारधारा है। जहां आदिवासियों के बारे में पिछले 14 सालों में कोई सोचा नहीं। आज एकदम शिवपुरी जिले के आदिवासियों के लिए इतना प्रेम आ गया कि आदिवासियों की रैली की गयी। जिसमें करीब 600-800 बसें लगायी गयी। 

शिवराज सरकार से लेंगे बदला 
साथ ही उन्होंने कहा कि, पूरे संभाग के लोगों को बुलाया गया है कि मुझे खुशी है कि पूरे संभाग के लोगों को शिवपुरी में बुलाया गया। जो हमारे घोषणावीर मुख्यमंत्री ने अनेक घोषणाएं की। हरेक आदिवासी के मकान पर लिखा गया कि वो गरीब है, अगर ये हमारे भारत के नागरिक होने के नाते और खासकर हमारे वीर, संकल्पित और परिश्रमी आदिवासियों के माथे पर कलंक नहीं है तो क्या है, मेरे आदिवासी भाई-बहन शिवराज सरकार से जरूर बदला लेंगे। 
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