कोलारस उपचुनाव: शिवराज सिंह की परीक्षा और ज्योतिरादित्य की अग्निपरीक्षा होगी

Updesh Awasthee
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ललित मुदगल@एक्सरे /शिवपुरी। कोलारस विधायक रामसिंह यादव के दुखद निधन के बाद कोलारस विधानसभा का उपचुनाव होना है। प्रदेश के चुनावों से पूर्व होने वाले इस उपचुनाव में  प्रदेश के बड़े-बड़े दिग्गजों की परीक्षा और अग्निपरीक्षा होने वाली है। या यू कह लो कि भाजपा और कांग्रेस के सीएम के पद के दावेदारों बनती और बिगडती तस्वीर इस प्रदेश के सामने आ सकती है। 

वैसे तो कहा जाता है कि उपचुनाव में अधिकत्तर सत्ताधारी दल ही चुनाव में विजयी होता है, लेकिन भाजपा को शिवपुरी विधानसभा की करारी हार अभी तक याद होगी। इस चुनाव में प्रदेश के वर्तमान मंत्री, भाजपा का पूरा का पूरा संगठन और स्वयं सीएम शिवराज सिंह ने अपना पूरा दम लगाया था लेकिन सांसद सिंधिया से यह सब हार गए, और सांसद सिंधिया अकेले ही अपनी दम पर अपने प्रत्याशी वीरेन्द्र रघुवंशी को जिता लाए। 

अब मूल बात कोलारस विधानसभा उपचुनाव की बात करते है। इस चुनाव मे भाजपा के पास प्रदेश सरकार की योजनाएं है जिन्है वे प्रचारित करेंगी। इन योजनाओं को बता कर वोटरों को लुभाने का प्रयास कर सकती है, और यह भी प्रचारित कर सकती है कि हमारा प्रत्याशी विजयी होता है तो हम कोलारस की तस्वीर बदल देगें। इस वादे में एक डर छुपा है और इस डर को अप्रत्याशित रूप से प्रचारित कर सकती है। 

कांग्रेस के पास इस चुनाव में कई मुद्दे है। जीएसटी के बाद किसानों की फसलों के भाव का मुद्दा सबसे अहम है। 220 पोलिंग के इस विधानसभा में किसानो की फसलों के कम दाम इस चुनाव में कांग्रेस सबसे बडा हथियार हैं। नोटबंदी के कारण किसानों के टमाटरों की हुई हत्या को याद कराकर वोटरों की फसल काट सकती है। कांग्रेस के सभी मुद्दों में दादा के दुखद निधन से उपजी लहर का डोज होगा। 

खास है सीएम शिवराज के लिए यह चुनाव 
कोलारस विधान सभा उपचुनाव के बाद प्रदेश में आम चुनाव होने है। सीएम शिवराज अपनी चौथी पारी के लिए तैयार है। इस चुनाव के परिणाम भाजपा के अनुकुल रहे तो शिवराज सिंह चौहान और भाजपा का यह सोचना होगा कि प्रदेश में शिव के राज में सबकुछ ठीक है आगे चौथी पारी का रास्ता क्लीयर है लेकिन अनुकुल नही रहे तो शिवराज सिंह चौहान के विरोधिया को एक दमदार मौका मिल सकता है कि अगर शिवराज सिंह के नेतृत्व में आगे प्रदेश के आम चुनाव लडे गए तो भाजपा को बडा नुकसान हो सकता है। इस कारण कोलारस का यह उपचुनपाव शिवराज सिंह के लिए एक बडी ही परीक्षा है। 

अग्निपरीक्षा होगी सासंद सिधिया की
कोलारस का यह चुनाव शिवराज की परीक्षा है तो सांसद सिंधिया के लिए अग्निपरीक्षा है। चारों ओर से उन्है प्रदेश के आम चुनावो में सीएम प्रोजेक्ट करने की मांग उठ रही है। जितनी तेजी से यह मांग उठती है उनके विरोधी उतनी तेजी से सिंधिया की टांग खीचने के लिए संक्रिय हो जाते हैं। इस कारण ही अभी तक कांग्रेस हाईकमान ने उन्हे सीएम प्रोजेक्ट नही कर पाए है। 

कोलारस विधान सभा का उपचुनाव सांसद सिंधिया की सांसदीय क्षेत्र में होने वाला चुनाव है और यह सीट भी कांग्रेस की होने के कारण इस चुनाव में विजयीश्री होना ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए अहम है। अगर यहां कांग्रेस की जीत नही होती है तो सिंधिया विरोधी अब विरोध नही सीधे आक्रमण ही करेंगें की अपने घर की सीट नही बचा पाए तो प्रदेश में क्या कर सकते है। अगर इस रण को सिंधिया जीत लाए तो उनके समर्थक अपने नेता को कांग्रेस की ओर से सीएम प्रोजेक्ट कोई कसर नही छोडेगें। 

कोलारस विधानसभा का उपचुनाव अब दो प्रत्याशियो के बीच नही सीधे-सीधे एक सीएम शिवराज और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच होना है। कोलारस चुनाव में दोनो के लिए खोने और पाने के लिए बहुत कुछ है। भाजपा गई तो शिव के राज पर खतरा और कांग्रेस और सिंधिया के समर्थक कह सकते है कि भाजपा की इस प्रंचड लहर में सांसद सिंधिया ही शिवराज से राज छिन सकते है। 

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