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परिषद की बैठक में हंगामा, एफडी चोरी की एफआईआर कराने पहुंचे पार्षद, भ्रष्टाचार के लगे पुख्ता आरोप

शिवपुरी। नगरपालिका परिषद की बैठक में आज जमकर हंगामा हुआ। सभी दलों के पार्षदों यहां तक कि नपा उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा और महिला पार्षदों ने नगरपालिका प्रशासन की जमकर बखियां उधेड़ीं। व्यक्तिगत रूप से भी नपाध्यक्ष और सीएमओ के खिलाफ जमकर निशाने साधे गए। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार, मनमानी और धोखाधड़ी के ऐसे पुख्ता आरोप लगाए गए।  जिनका नपा प्रशासन जवाब देने की स्थिति में भी नहीं था। पानी टैंकरों में घोटाले के तथ्यों सहित आरोप लगाए गए। इसके साथ ही पार्षद ने नपा से एफडी चोरी हो जाने को लेकर जमकर हंगामा किया और एफआईआर दर्ज कराने कोतवाली पहुंचे। 

वहीं नपा प्रशासन पर धोखाधड़ी का आरोप मड़ा गया। जिसका न तो नपाध्यक्ष कुशवाह और न ही सीएमओ रणवीर कुमार  जवाब दे पाए। मामला यह था कि पिछले परिषद की बैठक में बिंदु क्रमांक 24 के विषय में तय किया गया था कि पीआईसी के 2 ढाई साल के कार्यकाल में पारित बिंदुओं का परिषद तब अनुमोदन करेंगी। जब उनकी प्रमाणित प्रति पार्षदगण देख लेंगे, लेकिन इसके विपरीत नपा प्रशासन ने परिषद के प्रस्तावों का अनुमोदन कर दिया और जब सूचना के अधिकार के तहत कांग्रेस पार्षद आकाश शर्मा ने अनुमोदन की प्रति परिषद की बैठक में रखी तो जमकर हंगामा हुआ। जिसके  परिणामस्वरूप आधा घंटे के लिए बैठक स्थगित कर दी गई। 

परिषद की बैठक में पहला ङ्क्षबदु था कि पेयजल परिवहन में हुए अतिरिक्त व्यय की स्वीकृति ली जाए। लेकिन नपा उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा ने खुलकर कहा कि नगरपालिका प्रशासन ने बड़े टैंकरों के नाम पर एक बड़े घोटाले को अंजाम दिया है। इस मामले में तथ्यों को रखते हुए श्री शर्मा ने बताया कि 8 मई 2017 को निरीक्षण के लिए जब वह भदैया कुंड के दो हाईडेंटों पर गए तो उपयंत्री श्री गुप्ता ने उन्हें बताया कि 12 हजार और 24 हजार लीटर के टैंकरों को भरने की व्यवस्था उन्होंने उक्त दो हाईडेंटों से की है। इनमें से सुबह 8 से रात्रि 8 बजे तक 12 हजार लीटर क्षमता के टैंकर भरे जाएंगे। 

जबकि 24 हजार लीटर क्षमता के टैंकर रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक भरे जाएंगे। जिससे स्पष्ट है कि 12 हजार और 24 हजार लीटर क्षमता के टैंकरों को 24 घंटे में भरने के लिए महज 12 घंटे सुलभ हैं। श्री शर्मा ने बताया कि वह 2 बजे हाईडेंट पर पहुंचे और उनके सामने 2 बजकर 20 मिनट पर टैंकर हाईडेंट पर भरने के लिए खड़ा हो गया। टैंकर भरने में 2 घंटे लगे। इसके बाद वह गांधी पार्क में स्थित टंकी में खाली होने के लिए भेजा गया। जहां पहुुंचने में उसे एक घंटा लगा और 50 मिनट में टैंकर खाली हुआ तथा पुन: हाईडेंट पर पहुंचने में उसे 45 मिनट लगे इस तरह से एक टैंकर को भरने मेें 4 घंटे 35 मिनट का समय लगा। 

इससे जाहिर है कि 12 घंटे में अधिक से अधिक तीन टैंकर भरे जा सकते हैं, जबकि नगरपालिका प्रशासन ने 8 चक्करों का भुगतान कर दिया। वरिष्ठ पार्षद अभिषेक शर्मा बट्टे ने तथ्य रखते हुए कहा कि 72 दिन में 566 चक्करों का भुगतान नपा प्रशासन द्वारा किया गया। इससे भ्रष्टाचार का आरोप पूरी तरह से प्रमाणित है। बड़े टैंकरों में हुए घोटाले को पार्षद सुरेंद्र रजक, श्रीमति नीलम बघेल, पार्षद आकाश शर्मा, पार्षद विष्णु राठौर ने भी पूरी दमदारी से उठाया। जिसका बचाव नगरपालिका प्रशासन नहीं कर पाया। बैठक में उस समय तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई जब वरिष्ठ पार्षद अभिषेक  शर्मा ने स्पष्ट किया कि पिछली बैठक में पीआईसी में पारित प्रस्तावों को स्वीकृत करने का एजेंडा भी था जिसमें तय किया गया था कि अगली परिषद की बैठक में उक्त प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा, लेकिन नपा प्रशासन को पीआईसी द्वारा पारित प्रस्तावों की बिंदुवार जानकारी पार्षदों को उपलब्ध करानी होगी। 

अर्थात उक्त प्रस्ताव पारित नहीं किया गया, लेकिन नपा प्रशासन ने प्रोसिडिंग लिखकर उक्त प्रस्ताव को पारित कर पार्षदों के साथ धोखाधड़ी का काम किया है। नपा प्रशासन अपने बचाव में कुछ कहते इसके पहले ही कांग्रेस पार्षद आकाश शर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत पिछली परिषद की बैठक में  पारित प्रस्तावों की नपा प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर बताया कि पीआईसी द्वारा पारित प्रस्तावों का परिषद ने अनुमोदन कर दिया है। 

यह जानकारी मिलने के बाद परिषद की बैठक में हंगामा हो गया और हर तरफ चीख चिल्लाहट और शोरगुल सुनाई देने लगा। जिस कारण परिषद की बैठक आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। बैठक दोबारा शुरू होने के बाद नगरपालिका प्रशासन को बेकफुट पर आना पड़ा और यह तय हुआ कि पीआईसी की पिछली बैठकों को पारित करने का मामला नपा परिषद की अगली बैठक में शामिल किया जाएगा। तब कहीं जाकर पार्षद शांत हुए।