सिनेमा घरों में राष्ट्रगान संबंधी दिशा निर्देश

शिवपुरी। माननीय उच्चतम न्यायालय ने भारत के राष्ट्रगान से संबंधित आदेश पारित किए है। इस संबंध में जिला प्रशसन ने सभी कार्यालय प्रमुखों को पत्र भेजकर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए है। 

पारित आदेश में उल्लेख किया है कि राष्ट्रगान वित्तीय फायदा अथवा किसी भी प्रकार का लाभ देने के लिए किसी भी प्रकार का व्यवसायिक दुरूपयोग नहीं किया जाएगा। स्पष्टत: राष्ट्रगान का उपयोग इस प्रकार नहीं किया जाएगा, जिससे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े व्यक्ति का किसी प्रकार का व्यवसायिक लाभ अथवा अन्य किसी प्रकार का लाभ हो। 

राष्ट्रगान का नाट्य रूपान्तर नहीं किया जाएगा और इस किसी वैरायटी शो के भाग के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योकि जब राष्ट्रगान गाया जाता है अथवा बजाया जाता है तो वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह इसे यदोचित आदर एवं सम्मान दें। राष्ट्रगान के नाटय रूपान्तरण एवं प्रदर्शन के बारे में पूर्णरूपेण कल्पनातीत है। 

राष्ट्रगान अथवा इसके किसी भाग को किसी वस्तु पर छापा नही जाएगा और उसे कभी भी ऐसे स्थान पर इस प्रकार से प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। जो इसकी मर्यादा के लिए असम्मानजनक और असम्मान के समतुल्य हो, यह इसलिए है क्योकि जब राष्ट्रगान गाया जाता है, तो इससे संबद्ध प्रोटोकॉल की सकल्पना, राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रीय अखण्डता और संवैधानिक देशभक्ति की भावना में अंतनिर्हित है। 

भारत में स्थित सभी सिनेमा हॉल फीचर फिल्म प्रारंभ होने से पहले राष्ट्रगान बजाएंगे और हाल में उपस्थित सभी व्यक्ति राष्ट्रगान को सम्मान देने के लिए खड़ा होने के लिए बाध्य हैं। सिनेमा हाल में पर्दे पर राष्ट्रगान बजाए जाने अथवा गाए जाने से पहले प्रवेश और निकास द्वार बंद रहेंगे ताकि कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार की अंशाति न फैला सके जो राष्ट्रगान के प्रति असम्मान स्वरूप होगी। 

राष्ट्रगान के बज जाने अथवा गाए जाने के पश्चात द्वार खोले जा सकते है। जब सिनेमा हालों में राष्ट्रगान बजाया जाएगा तो पर्दे पर राष्ट्रीय ध्वज दिखाई देता रहेगा। किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी कारण से बनाया गया राष्ट्रगान का लघु रूप न तो बजाया जाएगा और ना ही प्रदर्शित किया जाएगा। 
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