बदरवास और बैराड़ में आरएसएस का विशाल पथ संचलन, हुआ जोरदार स्वागत

Updesh Awasthee
शिवपुरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तहसील बदरवास नगर में ऐतिहासिक पथ संचलन निकाला गया जिसमें सैकड़ों की  संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया। स्वयंसेवकों का नगर वासियों ने बड़े ही उत्साह, के साथ पुष्प वर्षा कर आतिशीय स्वागत किया। 

इस अवसर पर अपने वौद्धिक में विभाग कार्यवाह राजेश भार्गव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की  स्थापना की आवश्यकता क्यों पड़ी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए संघ द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने उपस्थित स्वयंसेवकों से अपील की वह चीनी सामान का दीपावली पर वहिष्कार करें। 

पथ संचलन निकलने के पूर्व दोपहर थाना प्रांगण में स्वयं सेवकों का एकत्रीकरण हुआ, जहां उपस्थित अतिथियों ने शस्त्र पूजन किया। कार्यक्रम में अतिथि तथा मु य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवाह  राजेश भार्गव, अखिल भारतीय गुरुद्वारा कारसेवा समिति के राष्ट्रीय  सचिव तेगबहादुर सिंह , आरएसएस के प्रान्त घोष प्रमुख कृपान सिंह ,जिला प्रचारक केशव दिबोलिया,नरेश चौधरी जिला कार्यवाह तथा संजय ग्वाल उपस्थित थे। 

मुख्य वक्ता राजेश भार्गव ने अपने बौद्धिक में  स्वयंसेवकों को प्रेरित कर्रे हुए  कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरे विश्व में राष्ट्रीय से ओतप्रोत सबसे बड़ा संगठन है,1990 में लंदन में मकर संक्रांति के अवसर पर वहां की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने  संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी और उन्होंने हिंदुस्तान तथा हिंदुओं के बारे में कहा की पूरा देश हिंदुस्तान और हिंदुओं का ऋणी है । पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है, भारतीय लोग परिवार का भाव सिखाने में बहुत आगे हैं। आदिकाल से ही भारत की संस्कृति और ज्ञान का कोई मुकाबला नहीं है। 

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति महान है सदियों से भारत को विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त है। सैकड़ों वर्ष भारत गुलाम रहा फिर भी यहां की संस्कृति स यता आदि आज भी प्रेरणादाई हैं । हम शस्त्र और शक्ति के  के पूजक हैं । संघ की शाखाओं में चारित्रिक और राष्ट्रीयता के भाव सिखाए जाते हैं । उन्होंने चीन का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय धन से चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। हम सभी लोग दीपावली के पूर्व चीनी सामान की होली जलाएं। 

मुख्य वक्ता के वौद्धिक के पश्चात विशाल पथ संचलन प्रारंभ हुआ जिसमें सैकड़ों स्वयंसेवक हाथों में शस्त्र एवं दंड लिए पूर्ण  गणवेश में क्रमबद्ध होकर निकले। सफेद शर्ट, फुल पैंट, सिर पर काली टोपी और हाथों में दंड लेकर एक क़तार में क्रमबद्ध होकर निकले स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे । पथ संचलन के आगे स्वयंसेवकों में जोश भरने हेतु घोष चल रहा था जिसकी थाप पर स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर पूर्ण अनुशासन के साथ भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय शिवाजी जय भवानी आदि राष्ट्रभक्ति की नारे गुंजायमान करते हुए चल रहे थे। 
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