अशोक कोचेटा/शिवपुरी। शिवपुरी जिले की राजनीति में कांग्रेस के चिरपरिचित तेवर इन दिनों नदारत हैं। देश और प्रदेश की राजनीति में विपक्ष की भूमिका भले ही कांग्रेस निभा रही हो, लेकिन शिवपुरी में विपक्ष के रूप में वह अपनी भूमिका का निर्र्वहन करने में इसलिए असमर्थ और असफल साबित हो रही है, क्योंकि उनके आयोजनों और आंदोलनों में जनता की सहभागिता देखने को नहीं मिल रही है।
ऐसा नहीं कि कांग्रेस जनहित के मुद्दे नहीं उठा रही, लेकिन जन विश्वास की कसौटी पर खरा न उतर पाने के कारण उनके मुद्दे निरंतर असरविहीन साबित हो रहे हैं। इस कारण कांग्रेस के स्थानीय प्रभावशाली नेता भी न केवल अपनी धार खोते जा रहे हैं बल्कि उनका आत्म विश्वास भी निरंतर कम होता जा रहा है।
शिवपुरी में पानी को लेकर पब्लिक पार्लियामेंट ने एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। जिसमें शिवपुरी शहर की जनता की भागीदारी देखने को मिली थी। बाद में उसी तर्ज पर कांग्रेस ने भी अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ किया और आंदोलन के दौरान इसमें स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए।
इसमें प्रमुख रूप से सिंध नदी का पानी शिवपुरी लाना अहम मुद्दा था। जिसकी यहां की जनता वर्षो से मांग कर रही थी, लेकिन इस आंदोलन में भी कांग्रेस के साथ जनता कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी नहीं हुई परिणाम यह हुआ कि अनिश्चित कालीन आंदोलन को कांग्रेस को खत्म करना पड़ा।
इसके अलावा बिजली, सडक़, अतिक्रमण विरोधी अभियान में पक्षपात आदि तमाम मुद्दों को लेकर कांग्रेस जनता के बीच आई, लेकिन जनता ने उन पर विश्वास नहीं किया बल्कि एक तरह से समस्याओं के लिए उन्हें ही जि मेदार ठहराया। बड़ा सवाल यह है कि आखिर कांग्रेस की इस दशा के लिए कौन-कौन से कारण जि मेदार हैं।
सबसे बड़ा कारण यह है कि स्थानीय कांग्रेस में आक्रामक तेवर का अभाव इन दिनों देखने को मिल रहा है। फक्कड़ कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने को लेकर कांग्रेस नेताओं पर मुकदमे लादे जाने का प्रभाव यह हुआ कि समूची पार्टी ने अपनी आक्रामकता से तौबा कर ली है। इनमें से वीरेन्द्र रघुवंशी पार्टी छोडक़र चले गए हैं जबकि एक समय अपनी आक्रामक धार के लिए जाने जाने वाले पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला और गणेश गौतम जैसे नेता भी आक्रामकता से किनारा करे बैठे हैं।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामसिंह यादव सज्जनता की मिसाल हैं और विपक्ष की राजनीति में उतने प्रासंगिक नहीं है। इनके अलावा अन्य वरिष्ठ नेता सुविधा भोगी राजनीति में लिप्त है और प्रशासन तथा पुलिस से पंगेबाजी उन्हें अपनी सेहत के लिए ठीक नहीं लगती। दूसरा कारण यह है कि निरंतर शिवपुरी शहर की दुर्दशा होती जा रही है। सीवेज प्रोजेक्ट का कार्य पूर्ण होने का नाम नहीं ले रहा। सडक़ें लगातार खुद रहीं है।
सिंध का पानी भी दूर की कोड़ी नजर आ रहा है। इसके लिए जनता नगर पालिका को जि मेदार मानती है और नगर पालिका में इस समय कांग्रेस काबिज है, लेकिन सबसे बड़ा कारण यह है कि इस समय शिवपुरी की समस्याओं के लिए सिंधिया परिवार को सुनियोजित ढंग से घेरा जा रहा है और समस्याओं के लिए महल विरोधी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को निशाना बनाने पर लगे हैं, जिसका प्रभाव भी धीरे-धीरे जनता पर देखने को मिल रहा है।
(लेखक शिवुपरी के वरिष्ठ पत्रकार और सांध्य दैनिक तरूण सत्ता के संपादक है)