मानवीय गुणों के कारण महान गुरूओं की श्रेणी में शामिल हैं डॉ.चन्द्रपाल सिंह सिकरवार

शिवपुरी। शिवपुरी के शिक्षाविद् प्रोफेसर स्व: चंद्रपाल सिंह सिकरवार के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम मु य अतिथि डीआई डॉ.रमन सिंह सिकरवार ने कहा कि मानवीय गुणों के कारण ही महान गुरूओ की श्रेणी में शामिल है डॉ.चन्द्रपाल सिंह सिकरवार।  

शिवपुरी में लगभग 41 वर्षो तक विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में जुटे रहे स्व. डॉ. चन्द्रपाल सिंह सिकरवार के जन्मदिवस पर आयोजित समारोह में मु य अतिथि डॉ. रमन सिंह सिकरवार, अध्यक्षता कर रहे कमाण्डेंट श्री चौहान और विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक मो. युसुफ कुर्रेशी सहित स्व. डॉ. सिकरवार स मान से स मानित रिटायर्ड ले िटनेंट जीबी सिंह के भाषणों में एक ही स्वर मुखरित हुआ कि डॉ. सिकरवार की हार्दिकता, संवेदनशीलता और प्राणीमात्र के कल्याण के लिए कुछ कर गुजरने की भावना ने उन्हें महान बनाया। बकौल पुलिस अधीक्षक, मो. युसुफ कुर्रेशी अपने मानवीय गुणों के कारण डॉ. सिकरवार महान गुरूओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। 

जिन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार का प्रकाश भी बांटा। डॉ. सिकरवार स्मृति स मान से स मानित जीबी सिंह ने तो यहां तक कहा कि डॉ. सिकरवार द्वारा शिवपुरी को अपनी कर्मस्थली बनाना यहां के  लोगों का भाग्य है। 

परिणय वाटिका में आयोजित समारोह में मु य अतिथि के रूप में डीआईजी रमन सिंह सिकरवार ने डॉ. सिकरवार की विलक्षण शैली, संत प्रवृत्ति और फक्कड़पन को याद करते हुए कहा कि उनके शिष्यों का अब सबसे बड़ा कर्तव्य यह है कि उनके सेवा मापदण्डों को वह ऊपर ले जायें। 

उनका यह कर्र्तव्य है कि अपने सुख के लिए मानवता की सेवा करने वालों को पहचान कर वह पुरूस्कृत करते रहें। वह यह भी सुनिश्चित करें कि इस क्षेत्र में साधनहीन व्यक्ति शिक्षा से दूर न हो। समारोह की अध्यक्षता कर रहे डीआईजी सीएटी सीआरपीएफ स्कूल श्री आरएस चौहान ने डॉ. सिकरवार को ध्रुव तारा बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों के कल्याण के लिए व्यतीत किया। 

इसीलिए मरर्णोपरांत भी उन्हें याद किया जा रहा है। विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक मो. युसुफ कुर्रेशी ने अपने संक्षिप्त लेकिन हृदय स्पर्शी वक्तव्य में डॉ. सिकरवार को याद करते हुए शिक्षा और एज्युकेशन के फर्क को खूबसूरती से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एज्युकेशन जहां महज हमें किताबी ज्ञान से परिचित कराती है वहीं शिक्षा किताबी ज्ञान के साथ-साथ संस्कारों को देने का कार्य भी करती है। 

उन्होंने कहा कि यदि बुद्धिमान व्यक्ति संस्कारों से रहित है तो कहा जाएगा वह एज्युकेटेड तो है, लेकिन शिक्षित नहीं है। समारोह में डॉ. चन्द्रपाल सिंह सिकरवार स्मृति स मान समारोह के संरक्षक विधायक प्रहलाद भारती ने अतिथियों के स मान में स्वागत भाषण दिया और डॉ. सिकरवार के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। 

कवि घनश्याम योगी और आरआई अरविन्द सिंह सिकरवार ने डॉ. सिकरवार को अपनी कविताओं के माध्यम से काव्यांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्ति के बाद विद्यार्थियों को नि:शुल्क रूप से करैरा में शिक्षा का दान कर रहे सेवानिवृत्त ले िटीनेंट जीबी सिंह को अतिथियों ने स मानित किया। 

डॉ. सिकरवार के शिष्य भरत भार्गव ने उनके व्यक्तित्व को उनमें मौजूद मानवीय गुणों को स्पष्ट करते हुए अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. एके मिश्रा, राजेन्द्र वर्मा, डॉ. डीके बंसल, गोविन्द सिंह सेंगर, भरत भार्गव, रतिराम धाकड़, केशव शर्मा, तरूण अग्रवाल, दीपक शर्मा, अवधेश श्रीवास्तव, अभिषेक शर्मा आदि का योगदान रहा। 


कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने डॉ. सिकरवार के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में अतिथियों को भी स्मृति चिन्हि भेंट किए गए। कार्यक्रम का संचालन दिग्विजय सिंह सिकरवार ने किया। 

मैने उन्हें नहीं देखा लेकिन आज उनके गुणों से अभिभूत हूं
समारोह में सम्मानित हुए जीबी सिंह ने अपने भाषण में गागर में सागर भरा। उन्होंने रविन्द्रनाथ टैगोर के हवाले से कहा कि गुरूदेव जीवन को आनंद मानते थे और उनकी दृष्टि में सेवा ही सबसे बड़ा आनंद है। गुरूदेव की इस परिभाषा को डॉ. सिकरवार ने सार्थक कर दिखाया है। 

उन्होंने इस बात पर दु:ख व्यक्त किया कि डॉ. सिकरवार के जीवन काल में वह उनसे कभी नहीं मिले, लेकिन आज उनके गुणों को देखकर मैं अभिभूत हूं। सफलता का मूलमंत्र समझाते हुए श्री सिंह ने कहा कि यदि छोटे-छोटे काम सलीके से कर लिए जाऐं तो बड़े काम स्वयं हो जाते हैं। 
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