बैराड। ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सरकार द्वारा स्कूलों में हेंडपंप लगवाए गए थे जिससे स्कूली छात्रों को पेयजल के लिए परेशान नहीं होना पड़े स्कूल परिसर में ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो लेकिन लगातार तीन वर्षों से तहसील क्षेत्र में अल्पवर्षा के कारण भूजल स्तर तेजी के साथ नीचे चला गया जिस कारण सरकारी स्कूलों में लगे अधिकांश हेंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया।
सूखे के कारण पैदा हुए पेयजल संकट ने पीएचई विभाग की मुश्किलें बड़ा दी इससे निबटने के लिए अब विभाग ने प्लेपंप के माध्यम से खेल-खेल में स्कूली छात्रों की प्यास बुझाने का अभिनव प्रयास किया है।
पीएचई विभाग की मानें तो परंपरागत हेंडपंप जहां 15 पाइप 150 फीट की गहराई से ही पानी खींच सकता है वहीं आधुनिक तकनीक पर आधारित प्लेपंप से 25 पाइप 250 फीट की गहराई तक से पानी खींचा जा सकता है।
इनका कहना है
भूजल स्तर 150 फीट से नीचे चले जाने से परंपरागत हेंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया था जिस कारण प्रयोगिक तौर पर पीएचई विभाग द्वारा प्लेपंप स्कूलों में लगाये गए हैं परंपरागत हेंडपंपों के मुकाबले ये ज्यादा गहराई से पानी खींचने में सक्षम है।
एई पीएचई विभाग राजेश श्रीवास्तव
पुराने हेंडपंप ने पानी देना बंद कर दिया था जिससे पीएचई विभाग को अवगत कराया तो उन्होंने परंपरागत हेंडपंप में प्लेपंप लगा दिया अब छात्रों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता
रमेशचंद्र वर्मा
शिक्षक
माध्यमिक विद्यालय जौराई
नये हेंडपंप से जहाँ एक ओर हमें मनोरंजन मिलता है वहीं खेल-खेल में ही पीने के पानी की टंकी भी भर जाती है
दीपक धाकड़
छात्र माध्यमिक विद्यालय जौराई

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