खेती की नई तकनीक: एक साथ 2 फसले कर रहा है गोपालपुर का यह किसान

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। बदलते हुए मौसम की मार के कारण किसान अब पर परागत खेती के साथ-साथ नगदी फसले (फल एवं फूल) की खेती की ओर रूझान बढ़ रहा है। जिसका परिणाम है किसानों को फल एव फूलों की खेती से अतिरिक्त आय हो रही है। 

इसी का जीता जागता उदाहरण शिवपुरी जिले के ग्राम गोपालपुर का प्रगतिशील कृषक श्रीकृष्ण धाकड़ है। जो पर परागत गेहूं, चना, सोयाबीन की फसलों के साथ-साथ आंवला, आम, अनार, गन्ना एवं मिर्ची की खेती ले रहे है। इन फसलों से जहां उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है, वहीं 10 लोगों को रोजगार भी दे रहे है। 

श्रीकृष्ण धाकड़ ने बताया कि वह गेहूं, चना, सोयाबीन की पर परागत फसले लेते आ रहे थे। लेकिन मौसम की मार के कारण कई बार इन फसलों की लागत भी नही निकली। 

इस कारण उन्होंने निर्णय लिया कि पर परागत फसलों के साथ नगदी फसलें लेने से मौसम की मार से जो फसलों को नुकसान होता है, उसकी भरपाई की जा सकेगी। इसके लिए उद्यानिकी विभाग के परामर्श पर 10 वर्ष पूर्व गांव में 8 वीद्या जमीन पर प्रतापगढ़ प्रजाति के आंवले के पौधे लगाए जिस पर 1 लाख रूपए खर्चा आया। 

चौथे वर्ष आंवला के पेड़ो पर फल लगना शुरू हो गए। जिसमें प्रथम वर्ष 50 हजार के, द्वितीय वर्ष में 75 हजार के और तीसरे वर्ष में 1 लाख तथा चौथे वर्ष में डेढ़ लाख के आंवलो का विक्रय ग्वालियर हाथरस एवं नरसिंहगढ़ में किया। 

उन्होंने बताया कि आंवला के पेड़ो के बीच में खाली जमीन में सोयाबीन, चना एवं टमाटर की फसल भी ली। श्री धाकड़ ने बताया कि 1.5 वीद्या जमीन में मिर्ची की फसल, गन्ना एवं 40 पेड़ अनार के लगाए गए है। जो इस बार फल देंगे। 

जबकि कागजी नीबू के 100 पौधे लगाए गए है। जिससे फल प्राप्त हो रहे है। संतरे के 7 पेड़, आम के 25 पेड़ लगाए गए जिससे मु य रूप से आम्रपाली, रानीखेत, चौसा, दशहरी एवं देशी आम शामिल है। 

इन फलों के अलावा पपीता, मौसमी, कटहल, चीकू, सीताफ ल एवं शहतूत भी लगाया है। साथ ही मौसमी फल-फूल की खेती से प्रतिवर्ष 5 लाख की आय हो रही है। 

श्री धाकड़ ने बताया कि उनके पास 20 गाय एवं भैसे है, जिनके गोबर का उपयोग वायोगैस संयंत्र में किया जा रहा है। इस संयंत्र से निकलने वाली सेलरी से क पोस्ट खाद बनायी जा रही है। 

वे अपने खेत पर वर्मी क पोस्ट के किट तैयार कर जैविक खाद का उपयोग कर रहे है। जिससे रसायन खाद पर खर्च होने वाली राशि की भी बचत हो रही है और आग्र्रोनिक उत्पादों के दाम भी अधिक मिल रहे है। 
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