न्यायालय भी हैरत में, जब पुलिस मृतक की भी करा लाई तामील

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शिवपुरी। जिले में कुछ तो भी अजीबोगरीब कार्यवाहियां अमल में लाईं जा रही हैं जिन्हें देख न केवल आमजन बल्कि न्यायालय भी हैरत में है। ऐसा ही एक मामला गत रोज तब सामने आया जब जिले की इंदार थाना पुलिस ने छह माह पूर्व दुनिया छोड़ चुकी एक वृद्घा को न्यायालय का वारंट उसकी मौत के करीब ढाई माह बाद तामील करा डाला।

जब यह मामला जिला न्यायाधीश व्ही.के. श्रीवास्तव के संज्ञान में आया तो उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति लेते हुए स बन्धित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक से लेकर पुलिस महानिदेशक तक को निर्देशित किया है।

अभियोजन के अनुसार ग्राम बिनैगा थाना इंदार निवासी एक युवक ब्रजभान जाटव एक नाबालिग लड़की को 21 मई 2014 को भगा ले गया था, उसके खिलाफ पुलिस ने बालिका के परिजनों की रिपोर्ट पर से धारा 363, 366, 376 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया और वाद विवेचना चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया। 

जब यह मामला कोर्ट में पहुंचा तो सत्र न्यायालय ने सुनवाई के क्रम में बालिका की दादी कपूरी बाई के नाम 27 नव बर 2015 को साक्ष्य हेतु समन वारण्ट पुलिस के जरिए भिजवाया जिसमें 20 जनवरी 2016 की तिथि सुनवाई साक्ष्य हेतु निर्धारित की गई थी।

चूंकि वारण्ट तामील हो चुका था इस कारण कपूरी बाई की अनुपस्थिति के बारे में जिला न्यायाधीश श्री व्ही.के. श्रीवास्तव ने वृद्घा के कोर्ट में पेश हुए पुत्र से पूछा तो उसने जो जबाव दिया वह अपने आप में इंदार पुलिस की कार्यप्रणाली पर ग भीर सवाल खड़े करने वाला था। 

इसका कहना था कि उसकी माँ कपूरी बाई की मौत तो छह माह पूर्व हो चुकी है। प्रश्न यह उठता है कि जब वृद्घा छह माह पूर्व ही दुनिया से चल बसी तो 27 नव बर 2015 को जारी समन की तामील पुलिस ने उसे कैसे करा डाली। स्वर्गवासी महिला को समन तामील कराने का अपने आप में यह आप चौंकाने वाला मामला है।

जिला न्यायाधीश श्री श्रीवास्तव ने इस मामले को ग भीर चूक मानते हुए इंदार थाने के दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही किए जाने के लिए एसपी से लेकर डीजीपी तक को पत्र लिखकर निर्देशित किया है।
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