मैं निर्दोष, मुझे माफिया ने फंसाया: एडीएम

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। दो दिन पहले फरियादी दिवाकर अग्रवाल से रिश्वत लेने के आरोप में खनिज विभाग के लिपिक रामगोपाल राठौर के साथ गिरफ्तार हुए एडीएम जेडयू शेख ने अपने आपको निर्दोष बताते हुए प्रेस नोट भी रिलीज किया है।

शिवपुरी के एडीएम जेडयू शेख ने लोकायुक्त को भी एक आवेदन भेजा है लोकायुक्त को भेजे गए आवेदन मे शेख ने लिखा है कि उनको फंसाने में खनिज माफिया के षड्यंत्र को जिम्मेदार बताया है। बकौल शेख, इस षड्यंत्र में खनिज माफिया के साथ गिरफ्तार लिपिक रामगोपाल राठौर भी शामिल हैं।

जिसने जब वह लंच पर गये थे, तो शिकायतकर्ता की मिली भगत से कथित जप्तशुदा लिफाफा उनकी टेबिल की वाई दराज में रख दिया था। उनका कहना है कि अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ उनके द्वारा की गई ताबड़तोड़ कार्यवाही से बौखलाकर ही यह षड्यंत्र रचा गया।

अपने आपको निर्दोष साबित करने के लिए उनके पास तथ्य भी हैं। एडीएम शेख का कहना है कि शिकायतकर्ता दिवाकर अग्रवाल से रिश्वत की राशि मांगने की उनकी कोई रिकॉर्डिंग नहीं है। दूसरे लोकायुक्त टीम द्वारा हाथ धुलाए जाने पर उनके हाथ न तो लाल हुए और न ही कैमिकल का रंग बदला।

जिस नस्ती की स्वीकृति एवं हस्ताक्षर की बात शिकायतकर्ता दिवाकर अग्रवाल द्वारा की गई है वह नस्ती उनके पास न तो लंबित रहीं है और न ही उसके निराकरण में कोई विलम्ब किया गया हैं।

यह भेजा है एडीएम शेख ने प्रेसरिलीज
प्रेस को जारी बयान में एडीएम शेख ने बताया कि शिकायतकर्ता दिवाकर अग्रवाल ने 20 अक्टूबर 2015 को उन्हें आवेदन दिया और कहा कि उनकी फड़ स्वीकृति की फाईल खनिज विभाग में लंबित है। इस पर एडीएम शेख ने खनिज अधिकारी को प्रकरण पेश करने के निर्देश दिये।

इसके उपरांत 31 अक्टूबर को नस्ती उनके समक्ष पेश की गई। उस पर उन्होंने तीन नवम्बर को अपनी अनुशंसा करके स्वीकृति एवं अंतिम अनुमोदन के लिए कलेक्टर शिवपुरी को भेज दिया। प्रेस नोट के अनुसार 3 और 4 नवम्बर को कलेक्टर मुख्यालय से बाहर प्रवास पर थे। उनके द्वारा पांच नवम्बर को फाईल पर हस्ताक्षर कर नस्ती खनिज शाखा को भेज दी गई थी।

इससे साफ है कि उन पर रिश्वत का आरोप वेबुनियाद है। सामान्य तौर पर अनुज्ञप्ति की नस्ती पर एडीएम के हस्ताक्षर नहीं होते। खनिज अधिकारी कलेक्टर के अनुमोदन के बाद अपने स्तर से हस्ताक्षर करके जारी करते रहे हैं, लेकिन उन्हें फंसाने के लिए नस्ती पर उनके हस्ताक्षर करने के लिए 7 नवम्बर को उनके समक्ष रखी गई और उन्होंने सद्भावना पूर्वक नस्ती पर हस्ताक्षर कर दिये।

चूंकि उन्हें फंसाने का उद्देश्य था। इसलिए यह नस्ती उनके पास भेजी गई थी। इसके अलावा लोकायुक्त के पास बातचीत का जो रिकार्ड है उसमें न तो मेरी आवाज है और न ही मेरी कोई बात चीत रिकॉर्ड हुई है।

लोकायुक्त की टीम द्वारा केमिकल से जो हाथ धुलवाये गए हैं उसमें उनके हाथों में कोई रंग नहीं आया है। यह पंचनामे से और सेम्पल से प्रमाणित है फिर भी खनिज माफिया द्वारा यह प्रचारित किया गया कि मेरे हाथ कैमिकल से धुलवाने पर लाल हो गये।

प्रकरण की पुन: जांच की मांग
एडीएम शेख ने लोकायुक्त को भेजे आवेदन में बताया कि उन्हें राज्य प्रशासनिक सेवा संघ द्वारा उत्कृष्टता पुरूस्कार के लिए नामांकित किया गया है लेकिन रिश्वत के झूठे आरोप से उनका पूरा कैैरियर ही खतरे में पड़ गया है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। 
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