श्रीकृष्ण-रूकमणी मंगल विवाह के साक्षी बने यजमान

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शिवपुरी। अपने विवाह में तो वर-वधू स्वयं साक्षी बन जाते है लेकिन यदि प्रभु का विवाह हो तो यजमान साक्षी बनकर पुण्य अर्जित करते है। श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर स्थल पर भी आज कुछ ऐसा ही नजारा था जब कथा के प्रसंग में श्रीकृष्ण-रूकमणी मंगल विवाह के बारे में कथावाचक व्यासपीठ से आचार्य पं.नीलेशकृष्ण शास्त्री ने अपनी ओजस्वी वाणी में कथा का वृतान्त सुनाया।

इस अवसर पर महंत लक्ष्मणदास जी महाराज ने कथा प्रसंग से पूर्व प्रभु के विवाह के कुछ अंशों को स यक ज्ञान की दृष्टि से धर्मप्रेमीजनों को बताया। कथा के मु य यजमान बने नपा उपाध्यक्ष अनिल शर्मा अन्नी ने सपत्निक श्रीमती बबीता शर्मा के साथ भगवान श्रीकृष्ण-रूकमणी विवाहस्वरूप झांकी का पूजा अर्चना की व आर्शीवाद प्राप्त किया।

इस दौरान पं.नीलेश शास्त्री ने भगवान के प्रेम की परिभाषा को भी प्रकट किया जिसमें बताया कि किस प्रकार से श्रीकृष्ण की बांसुरी पर गोपिकाएं मंत्रमुग्ध होकर अपनी सुधबुध भूल जाती है और केवल उन्हे अपने आराध्य देव श्रीकृष्ण नजर आते है यही प्रेम जानवरों में ाी देखने को मिला जब कान्हा की बांसुरी पर गाय बछड़े सभी दौड़े-दौड़े उनके आसपास एकत्रित हो जाते है।

इसके अलावा अन्य प्रसंगों का वर्णन भी कथा में श्रवण कराया गया। श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर पर सुदामा चरित के साथ आज श्रीमद् भागवत कथा का समापन होगा। वहीं दूसरी ओर रात्रि के समय श्रीरामकथा के माध्यम से रामानुज आचार्य ने भगवान श्रीराम के जीवन से ओतप्रोत कथा का वर्णन धर्मप्रेमीजनों को श्रवण कराया। कथा समापन के बाद श्रीखेड़ापति दरबार में भव्य तरीके से हनुमान जयंती मनाए जाने की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है जहां प्रभु की भक्ति स्वरूप अनेकों कार्यक्रम होंगें।

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