बाल विवाह पर बाल कल्याण समिति न्यायपीठ की रहेगी पैनी नजर

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। शासन के निर्देशानुसार बाल संरक्षण अधिनियम के तहत बाल विवाह पूर्णत: निषेध है। यदि किसी विवाह स मेलन व समारोह या कहीं से भी बाल विवाह की जानकारी मिलती है तो तुरंत कार्यवाही करते हुए न केवल विवाह को रूकवाया जावेगा। बल्कि कानूनी कार्यवाही बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत सुनिश्चित की जावेगी।

बाल कल्याण समिति की प्रथम श्रेणी न्याय पीठ के अध्यक्ष जिनेन्द्र कुमार जैन एवं सदस्य श्रीमती उमा मिश्रा, विनय राहुरीकर, दीपक शिवहरे व रवि गोयल ने संयुक्त जानकारी में बताया कि बाल विवाह कानूनी अपराध ही नहीं अभिशाप भी है। बालिकाओं के साथ-साथ अन्याय भी है। इसे रोकना हमारा धर्म भी है और फर्ज भी है।

योजना के अनुसार जिला बाल संरक्षण अधिकारी ओपी पाण्डेय के मार्गदर्शन में आगामी अक्षय तृतीया को होने वाले बाल विवाह स मेलनों व निकाह हमराहों पर जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्लूसी)अपनी पैनी नजर रखेगी। इस हेतु चाईल्ड लाईन व विशेष किशोर पुलिस इकाई को भी निर्देशित किया गया है।

स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी आग्रह किया गया है कि वह भी अपनी जागरूकता का मानवीयता का परिचय देते हुए 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका व 21 वर्ष से कम उम्र के बालक की शादी पर निगाह रखें। अगर इस तरह के विवाहों की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित करें अथवा चाईल्ड हेल्प लाईन टोल फ्री न बर 1098 पर जानकारी दें जिससे समय रहते कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।

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