शिवपुरी। जिस जेल में कैदी रह रहे है वह जेल ना होकर मंदिर है यहां जो भी कैदी जिन कर्मों के कारण जेल आया है उसे पश्चाताप करने का सुअवसर है कि वह अपने कर्मों को सुधारे और पुन: ऐसा कोई कार्य ना करे कि दोबारा जेल आना पड़े।
वेदों की वाणी में मनुष्य को बताया गया है कि मनुष्य के अंदर ही भगवान और राक्षस विद्यमान है बस उसे पहचानने की आवश्यकता है मन में विकार और बुरे विचार आए तो शैतान बन जाता है और यदि अच्छे और सुविचार आए तो वह मनुष्य बन जाता है इसलिए इसकी पहचान भी मनुष्य स्वयं ही कर सकता है मनुष्य को दूरदृष्टि नहीं सूक्ष्म दृष्टि की ओर देखना चाहिए कि कोई अपराध ना हो, जिस प्रकार से पशु अपनी आंखों से चारे को देखकर उसे खाने की चेष्टा करता है तो मनुष्य तो आंखें और मुख से अपनी वाणी से अच्छे विचारों को ग्रहण करे और एक ही गलती को बार-बार ना करे तो वह सही अर्थो में मनुष्य है।
मनुष्य की इस आभा को प्रकट कर रहे थे प्रसिद्ध आर्य वक्ता पं.नरेशदत्त आर्य जो स्थानीय जिला जेल में कैदियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए वेदों की वाणी का बखान कर रहे थे। इस अवसर पर जेलर व्ही.एस.मौर्य ने आर्यवक्ता पं.नरेशदत्त के प्रथम जेल आगमन पर स्वागत किया व आभार जताया। वेदों की वाणी को भजनों के माध्यम से पं.नरेशदत्त ने खूब समझाया और उसे अपने जीवन में लाने के लिए प्रेरित किया। पं.नरेशदत्त के भजनों जिसमें जिंदगी पथ है मंजिल की तरफ जाने की.., जिंदगी गीत है मस्ती में समा जाने की..., मुधरभव का हमें आदेश दिया, इंसान बनाना भूल गए..., ऐेसे बोल बोले कि जैसे अमृत बरसा हो...आदि भजनों से कैदियों को बताया कि वह अपने आचरण स्वभाव में बदलाव लाए और अच्छे विचारों व वाणी को बोलें।
पं.नरेशदत्त के अनुसार मनुष्य चिता, चिंता और चिंतन पर प्रकाश डाला और कहा कि चिता मरने के बाद जलती है, चिंता मनुष्य को जीते जी जलाती है लेकिन यदि चिंतन किया जाए तो चिता, चिंता से मुक्ति मिल जाएगी। जेल में रहकर इसे मंदिर समझें और ईश्वर से डरें, अपने अपराध पर पश्चाताप करें तो यह जीवन बदल जाएगा। इस दौरान पं.नरेशदत्त ने जेलर के प्रयासों को सराहा जिन्होंने अपने कार्यों के चलते जेल को सुधार गृह बना दिया। जेलर व्ही.एस.मौर्य ने भी कैदियों को वेदों की वाणी अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में आर्य समाज के रामपाल सोनी, शेरसिंह यादव, आदित्य शिवपुरी, मुरारी व्यास, कन्हैया लाल कुशवाह, दुर्गेश गुप्ता, लल्ला पहलवान, विजय परिहार, पूनम पुरोहित आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर आर्य समाज द्वारा जेलर श्री मौर्य को वेद साहित्य प्रदान कर उन्हें स मानित किया गया।

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