जंगलवाले बाबा को हाऊस ऑफ लार्ड में मिलेगा महात्मा गांधी सम्मान

shailendra gupta
शिवपुरी। जंगलवाले बाबा तो याद होंगे आपको। अपनी शिवपुरी में उनका चातुर्मास हुआ है। शिवपुरीवासियों ने भी बिना जाति धर्म का ध्यान दिए जंगलवाले बाबा को भरपूर प्रेम दिया। उनका अनुशरण किया। उनके प्रवचनों का लाभ उठाया है। अब उन्हीं जंगलवाले बाबा को हाऊस ऑफ लार्ड में महात्मा गांधी 2014 का सम्मान दिया जाने वाला है।

परम तपस्वी जैन मुनि 108 चिन्मय सागर जी महाराज ने दिगम्बर मुनि के रूप में आत्म साधना करते हुए समाज के सबसे कमजोर वर्ग दलित तथा आदिवासियों को संस्कारित करते हुए उन्हें, शराब, मांसाहार तथा नशे की लत छुड़ाकर सामाजिक क्षेत्र में जो क्रांति की है। उसकी गूंज अब विदेशों में भी हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा इस असाध्य कार्य को बड़े पैमाने पर सफल करने के प्रयास को मुनि श्री को ‘‘हाऊस ऑफ लार्ड’’ में ‘‘महात्मा गांधी २०१४’’ के पुरस्कार से ९ अक्टूबर को सम्मानित किया जा रहा है। देश के लिए यह गौरव का विषय है।

विश्व वंदनीय महान तपस्वी, महामृत्युजंयी तपोसाधक, राष्ट्रसंत मुनिश्री 108 चिन्मय सागर जी महाराज ‘‘जंगल वाले बाबा’’ को सर्वोच्च सम्मान ‘‘महात्मा गांधी सम्मान 2014 हाऊस आफ लार्ड’’ लंदन में ९ अक्टूबर को गरिमामय कार्यक्रम में प्रदान किया जायेगा। मुनिश्री १०८ चिन्मय सागर जी महाराज ‘‘जंगल वाले बाबा’’ एक ऐसे संत है, जिन्होंने आचार्य १०८ श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षा ग्रहण कर, मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हुए जन-जन का कल्याण भी कर रहें है। जंगल वाले बाबा कहते है- इन फटे पुराने मैले कुचले कपड़े पहने दीन-हीन व्यक्तियों में उन्हें भगवान आदिनाथ के दर्शन होते है।

‘‘जंगल वाले बाबा’’ चिन्मय सागर जी महाराज ने वर्ष १९८८ में दीक्षा ग्रहण के पश्चात वर्ष २००१ से ‘‘आदिवासियों के कल्याण हेतू’’ नशामुक्ति वृक्षारोपण, कुपोषण, भू्रणहत्या (बेटी बचाओ) शिक्षा, शाकाहार आदि पर जंगलों में साधना कर जन कल्याण के कार्य किए है। मुनिश्री ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल, महाराष्ट्र, कर्नाटक के जंगलों में साधना की है। मुनिश्री की साधना से प्रभावित होकर अभी तक २५ लाख से अधिक व्यक्तियों को नशामुक्ति जीवन जीने की शपथ दिला चुके हैं। मुनिश्री ने १० लाख से अधिक वृक्षारोपण, २५ लाख बच्चों को भ्रूणहत्या, कुपोषण एवं उच्च शिक्षा पर उद्बोधन दे चुके है। ५० लाख से अधिक लोगों को शाकाहार जीवन जीने की शपथ दिला चुके है। ऐसे महान संत ने न्याय के क्षेत्र में ‘‘न्याय और नैतिकता’’ युवाओं के लिए- ‘‘युवा क्या बने वैâसे बने’’, ‘‘चिन्मय मैनेजमेंट टिप्स’’, ‘‘समाज और साम्प्रदायिकता’’ एवं आईएएस, आईपीएस, अधिकारियों के लिए ‘‘प्रशासन और पारदर्शिता’’, राजनेताओं के लिए- ‘‘नेता की नैतिकता’’ आदि अनेक कृति अपने हस्त कमल से लिखकर-देश, धर्म, समाज को बदलते सामाजिक बदलाव में नई दिशा प्रदान की है जिसे देश में हाईकोर्ट के न्यायधीश, राजनेताओं, युवाओं, आईएएस, आईपीएस अधिकारियों ने बहुत सराहा एवं भूरी-भूरी प्रशंसा की।

श्री चिन्मय सागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक राज्य के बेलगाम जिले के छोटे से ग्राम- जुगुल में वर्ष १९६१ में हुआ था। परमपूज्य मुनिश्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ष २०१४ में अनेक सम्मान प्राप्त हुआ है। जैसे- ‘‘न्यू एज इंटरनेशनल यूनीवर्सिटी’’ लासवेगास (अमेरीका), ट्रीनटी वल्र्ड यूनीवर्सिटी लंदन, मेडीसीना अल्टरनेटीना द ओपन इंटरनेशनल यूनीवर्सिटी श्रीलंका ने भी मुनिश्री के सामाजिक कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशामुक्ति तथा आदिवासियों के विकास, वृक्षारोपण, कुपोषण, भू्रणहत्या, शिक्षा के कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान कर डी.लीट की उपाधि देकर सम्मानित किया है।

विश्व की सर्वोच्च संस्था एनआरआई वेलपेâयर सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा श्री चिन्मय सागर जी महाराज ‘‘जंगल वाले बाबा’’ के जन्म दिवस ६अगस्त के पावन अवसर पर ‘‘महात्मा गांधी सम्मान २०१४’’ की घोषणा की थी। एवं मुनिश्री को ‘‘हाऊस ऑफ लार्ड’’ लंदन के पुरस्कार के लिए आमंत्रित किया। दिगम्बर जैन मुनि सारी दुनिया में पैदल ही भ्रमण करते है, इसलिए उनका जाना संभव नहीं था। परम पूज्य मुनिश्री के आशीर्वाद, मार्गदर्शन से संचालित सम्पूर्ण भारत में कार्य करने वाली संस्था श्री चिन्मय सागर चेरीटेबल ट्रस्ट की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती सुमन लता मोदी, राष्ट्रीय सचिव श्री अभिषेक मोदी लंदन जाकर यह पुरस्कार ग्रहण करेंगे।
इस पुरस्कार से सम्पूर्ण जैन समाज,संत समाज तथा जन-जन का गौरव सारी दुनिया में बढ़ा है।


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