बेशकीमती सरकारी जमीन को अपना बता बिल्डर को बेच दिया सिंधिया ने !

shailendra gupta
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भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनके परिवारजनों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू कर दी है। आरोप लगाया गया है कि सिंधिया व उनके परिवारजनों ने मिलकर दो ट्रस्टों के माध्यम से सरकारी जमीन एक बिल्डर को मौटे दाम पर बेच दी।

मिली जानकारी के अनुसार कमलाराजा चैरिटेबल ट्रस्ट ने  0.146 हेक्टेयर जमीन नारायण बिल्डर्स एण्ड डवलपर्स को बेच दी है जबकि 2006 में हाईकोर्ट ने इस जमीन को सरकारी करार दिया था। शिकायतकर्ता सुरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि हाईकोर्ट ने यह निर्णय 3 अप्रैल 2006 को दिया और सिंधिया ने 27 अप्रैल 2006 को इस जमीन को एक बिल्डर के हाथों बेच दिया।

शिकायतकर्ता श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में ग्वालियर के राजस्व अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने इस पूरे घोटाले को हो जाने दिया। ​बताया जाता है कि 1948 से 1989 तक यह जमीन का टुकड़ा सरकारी था परंतु बाद में इस पर ट्रस्ट का कब्जा हो गया और 2004 में स्थानीय प्रशासन ने सिंधिया के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जानकारी मिली है कि सिंधिया से खरीदी गई जमीन पर ​नारायण बिल्डर्स एण्ड डवलपर्स 200 करोड़ का मंहगा प्रोजेक्ट लाने वाला है।

कुल मिलाकर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उन्हें बेचने के मामले में सिंधिया घिर गए हैं। इससे पूर्व केबीनेट मंत्री कैलाश विजयर्गीय ने भी सिंधिया को मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा भूमि घोटालेबाज करार दिया था। एन चुनाव के वक्त हुए इस खुलासे और जांच के आदेश ने सिंधिया की निष्कलंकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सनद रहे कि सिंधिया राजपरिवार में संपत्ति के लिए आपसी कलह की खबरें आतीं रहीं हैं परंतु सरकारी जमीन पर कब्जा करने और अवैध रूप से बेचने का यह पहला मामला है जो प्रकाश में आया है।

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