क्या प्राईवेट स्कूलों के कमीशन में शेयर होल्डर हैं बीआरसीसी

shailendra gupta
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कोलारस। अंचल में संचालित निजी विद्यालयों में संचालकों की मनमानी से जहां बच्चों के अभिभावक परेशान है वहीं बच्चों को स्कूली शिक्षा मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं एक ओर कोलारस बीआरसीसी द्वारा इन पर कोई कार्यवाही करने से परहेज करना भी आमजन की समझ से परे है।

निजी स्कूल संचालकों के होसले बुलंद हैं और वे शासन के आदेशों की लगातार धज्जियां उड़ा रहे है। इसके अलावा इन निजी स्कूलों में किसी प्रकार के कोई निरीक्षण हेतु कदम भी नहीं उठाए जाते जिससे इन निजी स्कूल संचालको पर कोई कार्रवाई हो। कभी कभार निरीक्षण होता भी है तो निजी स्कूल संचालक निरीक्षण के समय यह कहते हुए दिखाई देते है कि हमारे स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न है और इन स्कूलों की जांच का अधिकार कलेक्टर या जिला शिक्षा अधिकारी के पास है। इसके अलावा अन्य कोई स्कूलों का निरीक्षण भी नहीं कर सकता। पिछले सत्र में भी कोलारस बीआरसी द्वारा अंचल के किसी भी स्कूल पर अनियमितताओं को देखने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

अंचल में निजी स्कूलों में ये हैं हालात
-निजी स्कूलों में प्रवेश शुल्क के नाम पर अभिभावकों से मनमानी फीस बसूल की जा रही है और फीस 5 से लेकर 10 हजार रूपए तक है।
-किसी भी स्कूल में एनसीआरटी की कितावें संचालित नहीं है बल्कि सभी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें धड़ल्ले से कमीशन पर बेची जा रही है।
-हर वर्ष इन स्कूलों में बिना अ िाभावकों के मत के फीस वृद्धि की जाती है जो कि नियमों के विपरीत है।
-अधिकांश स्कूलों में आरटीई के तहत गरीब बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। 

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