गुंडागर्दी पर उतर आया नेशनल पार्क मैनेजमेंट

shailendra gupta
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शिवपुरी। माधव राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन शिवपुरी ने मनमर्जीपूर्वक ग्राम गतवाया की विस्थापन सर्वे सूची नियम विरूद्ध ग्रामसभा की स्वीकृति के बिना बना ली।
जिसमें कई पात्र एवं जन्मजात मूलनिवासी सहरिया जनजाति वर्ग एवं गुर्जर समाज के आवेदकों को छोड़ दिया गया। और इतना ही नही ग्रामवासियों को जबरन गांव खाली करने के लिए गांव के आम रास्ते को ही बंद कर दिया गया है। अब यह मामला न्यायलय में भी पहुंच चुका है।


इससे दुखी होकर बिस्थापन सूची से वंचित हुए ग्रामीणों ने स्वयं के नाम जुड़वाने की अपील प्रस्तुत की। जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को जांच करने का आदेश दिया, लेकिन इसके बाद भी सब रेंज सुरवाया में पदस्थ वनकर्मी बलपूर्वक ग्रामीणों को गांव खाली कराने की धौंस एवं धमकियां दे रहे हैं। उक्त आरोप ग्राम पंचायत दादौल के पूर्व सरपंच नबल सिंह गुर्जर, ग्राम विकास समिति गतवाया के अध्यक्ष लोटन सिंह गुर्जर और गजनलाल आदिवासी तथा देवीलाल आदिवासी ने लगाया है।

उन्होंने अल्टीमेटम दिया है कि यदि वन विभाग के अत्याचारों को प्रशासन ने नहीं रोका तो वे राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम, रैली, धरना प्रदर्शन कर भूख हड़ताल करेंगे। जिसकी समस्त जवाबदारी प्रबंधन राष्ट्रीय उद्यान की होगी।

प्रेस को जारी बयान में ग्रामवासियों ने बताया कि थाना सुरवाया के अंतर्गत जंगली क्षेत्र में स्थित ग्राम गतवाया जो माधव राष्ट्रीय उद्यान की सीमा विस्तार की कार्रवाई के अंतर्गत बसा हुआ है उसे बिस्थापित करने वन मंत्रालय भारत सरकार से करोड़ों रूपये की राशि माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी को प्राप्त हुई थी। जिसमें वन मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बिस्थापन, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास अधिनियमों का नियमानुसार पालन कर राशि वितरण की जाए, लेकिन नेशनल पार्क प्रबंधन ने मनमर्जीपूर्वक गांव की बिस्थापन सूची बिना ग्रामसभा की स्वीकृति के बना ली और जिसमें कई पात्र ग्रामवासी छूट गए।

जिसके संबंध में कई बार जिला प्रशासन एवं नेशनल पार्क प्रबंधन को आवेदन प्रस्तुत कर नियमानुसार सर्वे कराने का निवेदन किया, लेकिन इन आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया गया। जिससे दुखी होकर माननीय उच्च न्यायालय की प्रभावित ग्रामवासियों ने शरण ली और बिस्थापन सूची में हुई त्रुटियों को सुधार करने की मांग की। ग्रामवासियों के अनुसार माननीय उच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार कर जिला प्रशासन को जांच करने के निर्देश दिए, लेकिन वनकर्मियों ने इसके बाद भी बलपूर्वक ग्रामीणों के साथ अभद्रता की और उन्हें गांव खाली कराने की धौंस धपक दी। यही नहीं कुछ गरीब आदिवासियों की मोटरसाइकिल छुड़ाकर सब रेंज में रख ली।

जिनमें से कुछ लोगों से मोटी रकम लेकर मोटरसाइकिल छोड़ दी गई, लेकिन रामदास आदिवासी की मोटरसाइकिल नहीं लौटाई। इसके अलावा 15 फरवरी को रात्रि में जेसीबी मशीन से सुरवाया से गतवाया को जाने वाले आम रास्ते पर गहरी नाली खोदकर रास्ते को अवरूद्ध करा दिया गया। जिससे ग्रामवासी आवागमन न कर सकें ।

इसी प्रकार उक्त आम रास्ते के बीच में स्थित घाटी पर भी वोल्डरों की दीवार बनवा दी। जिससे परेशान होकर गांववासी गांव खाली कर चले जाएं। फरियादियों का कहना है कि ग्रामीणों की गांव में स्थित अचल संपत्ति का मूल्यांकन नहीं किया गया। ग्रामीण अभी भी अपनी सिंचित असिंचित कृषिभूमि, पेड़, कुआ, बाबड़ी एवं कच्चे-पक्के घरों के मूल्यांकन हेतु कई बार जिला प्रशासन से मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। जबकि वनकर्मियों के अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ग्रामवासियों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी सुनवाई नहीं हुई तो वे चक्का जाम, धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल तक करेंगे।


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