आंख के मरीज को दे दी नाक की दवा, हालत हुई खराब

shailendra gupta
शिवपुरी। हमेशा विवादों में रहने वाला जिला चिकित्सालय आज एक और नए विवाद में फंस गया। जहां अपनी आंख का इलाज कराने आए एक युवक को अस्पताल में स्थित निशुल्क औषधि वितरण केन्द्र पर बैठे हुए कर्मचारी ने आंख में डालने की दवा की जगह नाक में डालने की दवा दे दी।
जिसे आंख में डालने के बाद उक्त युवक की आंख में पीड़ा हुई। जब युवक ने अन्य मेडीकल स्टोर पर दी गई दवा की जानकारी ली तो उसे बताया गया कि यह दवा तो नाक में डालने की है। जिस पर युवक घबराकर अपने मित्रों के साथ अस्पताल में स्थित औषधि वितरण केन्द्र पर पहुंचा। बाद में यह बात कलेक्टर तक पहुंची तब कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद पीडि़त युवक का सिविल सर्जन ने चैकअप किया। जिसे स्वस्थ्य बताया गया।

पीडि़त उपेन्द्र शर्मा पुत्र महेन्द्र शर्मा निवासी छोटा लुहारपुरा बीते 30 अक्टूबर को आंख का चेकअप कराने के लिए डॉ. एसके पौराणिक के केबिन में पहुंचा। जहां डॉक्टर ने शासकीय पर्चे पर मॉक्सीफ्लो ड्रोप लिख दी। इसके बाद उपेन्द्र दवा लेने के लिए औषधि  वितरण केन्द्र पहुंचा। जहां मौजूद कर्मचारी ने उसे मॉक्सीफ्लो के स्थान पर जाइलोमेटाजोलिन एचसीएल नसल ड्रोप दे दी। इससे अनजान उपेन्द्र अपने घर पहुंचा और डॉक्टर के बताए अनुसार ड्रोप जब उसने आंख में डाली तो उसकी आंख में जलन शुरू हो गई।

गलत दवा देकर लोगों की जान से खिलवाड़

आज सुबह उपेन्द्र शर्मा नामक युवक गलत दवा देने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा। जहां सीविल सर्जन गोविंद सिंह कर्मचारी के पक्ष में खड़े हुए नजर आए और कहते दिखे कि  यह तो छोटी-मोटी बात है। गलती सभी लोगों से हो जाती है और वैसे भी यह दवा जो दी गई है ये आंख और नाक दोनों के लिए है और ड्रोप पर तो आई और नोज लिखा रहता है, लेकिन दवा पर न जाने क्यों नहीं लिखा।

दोषी होगा कर्मचारी तो कार्रवाई होगी: सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. गोविंद सिंह ने बताया कि इस मामले में जांच की जाएगी और यदि संबंधित कर्मचारी दोषी पाया गया तो उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। डॉ. गोविंद सिंह ने उक्त दवा भी अपने पास रख ली है।

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