देशलहरा ने जिला शिक्षा विभाग को बनाया जिला शिक्षा प्राइवेट लिमिटेड

shailendra gupta
ललित मुदगल/शिवपुरी शिवपुरी के जिला शिक्षा अधिकारी देशलहरा ने जिला शिक्षा विभाग को प्राइवेट लिमिटेड बना दिया है और खुद सीएमडी बनकर बैठे हुए हैं। वो नित नए नियम खुद ही बना डालते हैं और पालन भी करवाते हैं। इन दिनों उनका बनाया गया एक घोषणा पत्र विवादों में हैं जो जिले भर के शिक्षकों से भरवाया जा रहा है। मना करने पर कार्रवाई की धमकी भी दी जा रही है।

कम शब्दों में कहें तो यह घोषणा पत्र एक प्रकार से सभी शिक्षकों की गर्दनें अपने हाथ में नाप लेने की अवैध प्रक्रिया है। भारत का श्रम कानून इसकी ​इजाजत मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्यसचिव को भी नहीं देता, परंतु जिला शिक्षा अधिकारी ने यह अधिकारी खुद ब खुद अपने हाथ में ले लिए हैं। क्या कुछ लिखा है इस घोषणा पत्र में यह जानने से पहले पढ़िए एक ईमेल जो एक पीड़ित ने अपना नाम ना छापने के आग्रह के साथ भोपालसमाचार.कॉम को भेजा है।

महोदय मै आपके माध्यम से बताना चाहता हूं की शिवपुरी के जिला शिक्षा अधिकारी श्री देशलहरा जी बैसे तो अपने कार्यकलापों से विवाद में रहते आये है चाहे शिक्षको से पैसा उगाहने की बात हो या जिले का रिजल्ट बिगाड़ा हो, अब वे तानाशाही पर भी उतर आये हैं।

मीटिंगों में शिक्षकों की बात सुनना पसंद नहीं करते और अगर कोई कुछ कहे तो उसे कार्यवाही की धमकी देते है। अब उन्होंने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल के अध्यापकों को एक अंडर टेकिंग हस्ताक्षर करने का फरमान दिया है जिसमे कहा गया है की आप 60% से 100% के बीच का बोर्ड परीक्षा परिणाम देंगे और अगर नहीं दे पाते है तो उनके ऊपर कोई भी कार्यवाही की जा सकती है और वे या कोई और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई अपील नहीं करेगा। तथा ये बे बिना किसी दबाब में हस्ताक्षर कर रहे है।

श्रीमान मै ये जानना चाहता हूं की 8व़ी पास होकर आने वाले अनपढ़ बच्चों जिन्हें अपना नाम भी लिखना नहीं आता को शतप्रतिशत बोर्ड परीक्षा में कैसे पास कराया जाये। और अगर बच्चा स्कूल नहीं आये तो क्या करें।
श्रीमान क्या शिक्षकों से इस प्रकार का अंडर टेकिंग लेना न्यायसंगत है। श्रीमान अंडर टेकिंग की प्रति भी संलग्न है जिसे न भरने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई है। श्रीमान से निवेदन है इसे मुद्दे पर शिक्षा विभाग का ध्यान आकर्षित कराएँ और शिक्षकों को इस तुगलकी फरमान से मुक्त कराएँ।

ये रहा वो घोषणा पत्र


अब सवाल यह उठता है कि जिला शिक्षा अधिकारी को यह अधिकार किसने दे दिया कि वो निर्धारित श्रम नियमों के अलावा कोई नया नियम बनाए और अपने अधीनस्थों के साथ कोई बांड, एग्रीमेंट या घोषणा पत्र भरवाए। सवाल यहां यह भी है कि क्यों ऐसे हालात बन गए हैं कि कर्मचारी अपने अफसरों की शिकायत तक करने से घबराते हैं, क्या शिवपुरी के कलेक्टर वहां पर लोकतंत्र में दिए गए नागरिकों के सात अधिकारों की रक्षा भी नहीं कर पा रहे हैं।

हमने ऐसा कोई हस्ताक्षर नहीं मांगा

भोपालसमाचार.कॉम से बात करते हुए शिवपुरी के जिला शिक्षा अधिकारी देशलहरा ने कहा कि हमने ऐसा कोई हस्ताक्षर नहीं मांगा है। हम तो केवल रिजल्ट सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने क​हा कि शिक्षक हमसे झूठ बोलते है, टारगेट लेकर चले जाते हैं लेकिन रिजल्ट हमेशा 0 ही आता है। इसके बाद किए गए सवालों पर देशलहरा हड़बड़ा गए और उन्होंने व्यस्तता के नाम पर बातचीत को विश्राम दे दिया। 

हम यहां एक बार फिर जिला शिक्षा अधिकारी देशलहरा को अवसर दे रहे हैं। भोपालसमाचार.कॉम हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है। वो चाहें तो अपनी पूरी बात, गंभीरता के साथ सोच विचार कर कमेंट बॉक्स में शेयर कर सकते हैं। 

इस संदर्भ में पाठकों के विचार भी सादर आमंत्रित हैं। आप अपने जीमेल या फेसबुक अकाउंट के माध्यम से अपनी प्रतिक्रियाएं पोस्ट कर सकते हैं। 

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