ये कैसा मण्डी चुनाव: प्रत्याशी ही डर के साये में, रोजाना मिल रही हैं धमकियां

shailendra gupta
शिवपुरी -कृषि उपज मण्डी शिवपुरी में अध्यक्ष पद आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित अवश्य हो गया है, लेकिन आदिवासियों के सहारे राजनीति करने वाले नेता अपनी-अपनी रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं।

आदिवासी उम्मीदवारों को डराने धमकाने का दौर चल रहा है और उन्हें चुनाव मैदान से हटने के लिए धमकियां मिल रही हैं। बैठने के लिए शराब और पैसों का लालच भी दिया जा रहा है। इस कारण बहुत से उम्मीदवार लोप हो गए हैं वहीं सूत्र बतातें हैं कि कुछ उम्मीदवारों को दबंगों ने बंधक भी बना लिया है ताकि वे प्रचार न कर सकें। प्रशासन उम्मीदवारों को सुरक्षा मुहैया कराने में विफल साबित हो रहा है। हालांकि प्रशासन की दलील है कि उनके पास शिकायत नहीं आ रहीं तो वे क्या कार्रवाई करें? लेकिन आदिवासी उम्मीदवारों में इतना अधिक डर व्याप्त है कि वे शिकायतें भी नहीं कर पा रहे।

हालांकि समाज के हर वर्ग को राजनीति की मुख्य धारा में प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन इस व्यवस्था को धता बताने में शिवपुरी के दबंग राजनेता और माफिया सरगना लगे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि बहुत से उम्मीदवारों को तो धौंस देकर बिठा दिया गया। वहीं कुछ दबंग अपने पट्ठों को चुनाव लड़ा रहे हैं। आश्र्चय की बात तो यह है कि जो चुनाव लड़ रहा उसे खुद नहीं पता कि वह किस पद के लिए चुनाव मैदान में हैं। 

क्योंकि चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार पर हर पल नजर रखी जा रही है। जिस उम्मीदवार से खतरा नजर आ रहा है उसे धौंस दी जा रही है और घर जाकर दबंग धमकी दे रहे हैं। इस कारण कुछ उम्मीदवार घर से गायब भी हो गए हैं। आदिवासी उम्मीदवारों में संघर्ष न होकर उनके गॉड फादरों के बीच संघर्ष चल रहा है और इस बात की चर्चा चल रही है कि इस लड़ाई में कौन नेता आगे रहेगा और अपने पट्ठों की आड़ में वह विजयश्री को वरण करेगा।
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