रॉयल्टी के टंटे में फायरिंग, पार्टनर घायल

shailendra gupta
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शिवपुरी। जिले के नरवर थाना क्षेत्र के तगोली रेत खदान पर रॉयल्टी के पैसों को लेकर चली गोली में खदान का एक भागीदार विशाल सिंह घायल हो गया है। उसके हाथ में 315 बोर के कट्टे से गोली मारी गई है और नरवर पुलिस ने तगोली रेत खदान के एक पार्टनर मोहरपाल सिंह राजपूत के भाई शिशुपाल राजपूत एवं उसके साथी राजेश तोमर, कमलेश तोमर तथा बंटी गुर्जर के विरूद्ध भादवि की धारा 332, 326,327, 294, 341, और 34 के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया है। इस मामले में हत्या प्रयास का मामला कायम नहीं किया गया है।


सूचना मिलने पर करैरा एसडीओपी अमित सिंह घटना स्थल पर पहुंच गए है। सभी आरोपीगण फरार बताए जाते है।
पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार तगोली रेत खदान मोहरपाल सिंह राजपूत और अजय ङ्क्षसह की पार्टनरशिप में चलती है। मौके पर खदान में रॉयल्टी बसूली का कार्य मोहरपाल सिंह के भाई शिशुपाल और अजय सिंह के भाई विशाल सिंह देखते हैं। कल रात 11 बजे जब विशाल सिंह रॉयल्टी काट रहा था उसी दौरान बताया जाता है कि शिशुपाल अपने साथियों सहित वहां आया और वहां उसने रॉयल्टी बसूली में से कुछ राशि शराब पीने के लिए मांगी। जब विशाल सिंह ने इससे इंकार किया तो शिशुपाल और उसके बीच जमकर विवाद हुआ। इसी विवाद के चलते शिशुपाल ने 315 बोर का कट्टा निकाल कर फायर विशाल सिंह की ओर झोंक दिया। जिससे उसके हाथ में गोली लगी। इस बारदात के बाद इलाके में दहशत और तनाव का माहौल बना हुआ है।

गोली चालन में धारा को लेकर पुलिस पशोपेश में

तगोली रेत खदान में चली गोली से एक व्यक्ति घायल होने के बाद भी नरवर पुलिस ने भादवि की धारा 307 के तहत हत्या प्रयास का मामला क्यों नहीं कायम किया। इस पर करैरा के एसडीओपी अमित सिंह भी आश्चर्यचकित हैं। क्योंकि धारा 307 की कायमी के लिए चोट लगना भी आवश्यक नहीं है। कभी कभी फायर मिस हो जाता है  उसके बाद भी धारा 307 की कायमी होती है। इस बारे में नरवर पुलिस का कहना है कि चूंकि विशाल सिंह के हाथ में गोली लगी और हाथ में गोली लगना मृत्यु के लिए पर्याप्त नहीं है अर्थात हमलावर का उद्देश्य पीडि़त को जान से मारने का नहीं रहा। पुलिस का यह भी कहना है कि काफी दूरी से कट्टा चलाया गया। विशाल सिंह के हाथ में बुलेट की गोली लगी है। यह भी संदिग्ध है इस कारण भादवि की धारा 307 के तहत कायमी नहीं की गई। जब उनसे पूछा गया कि संदिग्ध मामला होने का अर्थ तो यह नहीं होता कि कमजोर धाराओं में कायमी कर ली जाए। यदि यह मामला संदिग्ध है तो धारा 336, 326 और 327 के तहत भी कायमी क्यों की गई?

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