शिवपुरी। सुप्रीम कोर्ट की गाईडलाइन को तोडऩे के लिए शिवपुरी के स्कूल संचालक किस कदर आतुर हैं, इसका सीधा प्रमाण आज उस समय सामने आ गया जब बजाए अपनी स्कूल बसों को फिट रखने के, उन्होंने एक अजीब किस्म की हड़ताल शुरू कर दी। स्कूलों ने सामूहिक रूप से यह फैसला किया कि वे स्कूल बसें नहीं चलाएंगे। टारगेट यह कि पब्लिक परेशान होगी, प्रशासन पर दबाव बनेगा और शिवपुरी में सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश लागू नहीं कराया जाएगा जो पूरे देश में कड़ाई से कराया जा रहा है।
सोमवार को स्कूल संचालकों ने अभिभावकों को सूचित किया है कि बच्चों को स्कूल भेजने की जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी जबकि विद्यालय तो नियमित रूप से संचालित होंगे। सुशिक्षित, सभ्य और बच्चों को भारतीय संविधान के तहत जीवन यापन का पाठ पढ़ाने वाले स्कूलों के संचालक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध किस तरह से कर रहे हैं, यह मामला न केवल इसका जीता जागता उदाहरण है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का प्रकरण प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त कारण भी उपलब्ध करा रहा है।
सनद रहे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जुलाई माह में शिक्षण सत्र शुरू होते हुए यातायात प्रभारी कविन्द्र सिंह चौहान ने अपने पुलिस बल के साथ शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में चैकिंग अभियान शुरू कर दिया। जिसमें शहर के सभी अशासकीय विद्यालयों में संचालित जितनी भी बसें थी सभी के कागजात देखे गए तो इनमें कहीं परमिट नहीं मिला, तो किसी के पास टैक्स जमा नहीं था साथ ही रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, फिटनेस आदि कागजात भी जांचे गए। इन सब में कमी पाए जाने पर ना केवल यातायात विभाग द्वारा चालापनी कार्यवाही की गई बल्कि कई वाहनों को तो न्यायालय के हवाले कर दिया। जहां न्यायालय से इन वाहनों के जुर्माना अदा करने के बाद हिदायत के साथ इन्हें छोड़ा।
आखिरकार अच्छी खासी मोटी रकम हर्जाने में चुकाने के बाद स्कूल प्रबंधन ने इन स्कूल बस संचालकों के साथ मिलकर जिला प्रशासन को इस पूरी प्रक्रिया को शांत करने की गुहार लगाई लेकिन यहां भी इनकी सुनवाई नहीं हुई और जिला प्रशासन के मुखिया ने भी इनकी नहीं सुनी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना को आतुर स्कूल प्रबंधन ने विद्यालय में आने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों को सूचित किया है कि प्रशासन द्वारा नियमों के तहत वाहन संचालित करने के साथ ही विद्यालय भेजे जाने की बात कही गई है। जिस पर प्रति छात्र 800 से 1000 भार पड़ेगा। इतने बड़े भार को अभिभावक सहन नहीं कर सकेंगे इसलिए अभिभावकों से स्कूल प्रबंधन ने आग्रह किया है कि वह उनके बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए आगामी आदेश तक स्वयं ही स्कूल आकर छोड़ें। स्कूल प्रतिदिन खुले रहेंगे।
सनद रहे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जुलाई माह में शिक्षण सत्र शुरू होते हुए यातायात प्रभारी कविन्द्र सिंह चौहान ने अपने पुलिस बल के साथ शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में चैकिंग अभियान शुरू कर दिया। जिसमें शहर के सभी अशासकीय विद्यालयों में संचालित जितनी भी बसें थी सभी के कागजात देखे गए तो इनमें कहीं परमिट नहीं मिला, तो किसी के पास टैक्स जमा नहीं था साथ ही रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, फिटनेस आदि कागजात भी जांचे गए। इन सब में कमी पाए जाने पर ना केवल यातायात विभाग द्वारा चालापनी कार्यवाही की गई बल्कि कई वाहनों को तो न्यायालय के हवाले कर दिया। जहां न्यायालय से इन वाहनों के जुर्माना अदा करने के बाद हिदायत के साथ इन्हें छोड़ा।
आखिरकार अच्छी खासी मोटी रकम हर्जाने में चुकाने के बाद स्कूल प्रबंधन ने इन स्कूल बस संचालकों के साथ मिलकर जिला प्रशासन को इस पूरी प्रक्रिया को शांत करने की गुहार लगाई लेकिन यहां भी इनकी सुनवाई नहीं हुई और जिला प्रशासन के मुखिया ने भी इनकी नहीं सुनी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना को आतुर स्कूल प्रबंधन ने विद्यालय में आने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों को सूचित किया है कि प्रशासन द्वारा नियमों के तहत वाहन संचालित करने के साथ ही विद्यालय भेजे जाने की बात कही गई है। जिस पर प्रति छात्र 800 से 1000 भार पड़ेगा। इतने बड़े भार को अभिभावक सहन नहीं कर सकेंगे इसलिए अभिभावकों से स्कूल प्रबंधन ने आग्रह किया है कि वह उनके बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए आगामी आदेश तक स्वयं ही स्कूल आकर छोड़ें। स्कूल प्रतिदिन खुले रहेंगे।