जल संसाधन विभाग (irrigation dept) में प्रदेशभर के कछारों में 118 कर्मचारी फर्जी जाति प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी क र रहे हैं। शिवपुरीमें ऎसे 02 कर्मचारियों को चिह्नित किया गया है। 27 दिसंबर, 2011 तक चिह्नित कर्मचारियों के जाति प्रमाण-पत्र मुख्यालय भेजने के निर्देश अफसरों को दिए गए थे। लेकिन, प्रमाण-पत्र मुख्यालय नहीं भेजे गए। इसके बाद अफसरों को 23 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन, इस संबंध में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जल संसाधन विभाग में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सैकड़ों कर्मचारी न सिर्फ भर्ती हुए बल्कि प्रमोशन भी पा गए। बीते साल सामान्य प्रशासन विभाग की छानबीन में ऎसे कर्मचारियों की शिनाख्त हो गई। जल संसाधन विभाग को अप्रैल, 2011 में हिदायत दी गई कि चिह्नित कर्मचारियों के जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाएं। लेकिन, जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किए गए।
इसके बाद अफसरों को उनके अधीनस्थ चिह्नित कर्मचारियों के जाति-प्रमाण पत्र भेजे जाने का स्मरण-पत्र 27 दिसंबर, 2011 को भिजवाया गया। इसके बावजूद जाति प्रमाण-पत्र नहीं भेजे गए। एक बार फिर कागजात भेजे जाने के लिए 23 अप्रैल, 2012 का समय अफसरों को दिया गया है।
इसके बाद अफसरों को उनके अधीनस्थ चिह्नित कर्मचारियों के जाति-प्रमाण पत्र भेजे जाने का स्मरण-पत्र 27 दिसंबर, 2011 को भिजवाया गया। इसके बावजूद जाति प्रमाण-पत्र नहीं भेजे गए। एक बार फिर कागजात भेजे जाने के लिए 23 अप्रैल, 2012 का समय अफसरों को दिया गया है।
इन कर्मचारियों पर उठी अंगुली
- बाबूलाल बाथम-शिवपुरी (एई)
- मोहनलाल मीणा-शिवपुरी (जेई),
प्रदेशभर के मुख्य-अभियंताओं और विभाग के अंतर्गत संचालित परियोजनओं के प्रभारियों से पूछा गया है कि आखिर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर उनके कछारों में चिह्नित कर्मचारियों को पद पर बनाए रखने का औचित्य क्या है? ताकीद की गई है कि हर हाल में 23 अप्रैल तक चिह्नित सूची में शामिल कर्मचारियों के जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाएं ताकि इस सबंध में आगे की कार्यवाही की जा सके।
एमजी चौबे,
प्रमुख अभियंता जल
संसाधन विभाग, ग्वालियर
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