के.पी. सिंह ने दिया शिवपुरी भाजपा को जोर का झटका धीरे से

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त्वरित टिप्पणी
ललित मुदगल
शिवपुरी-कहा जाता है कि अवसर का लाभ लेना ही राजनीति है। जब किसी भी नेता को मौका मिले तो चौका जड़ देना चाहिए। राजनीति के मैदान में ऐसा ही चौका जड़ा हैं पिछोर विधायक के.पी. सिंह ने, विधायक पिछोर के तौर पर गांजे की खेती के आरोप में गिरफ्तार भाजपा नेता के साथ की गई अभद्रता का मामला पूरी ताकत के साथ उठाया। गृहमंत्री को पिछोर टीआई राजेन्द्र पाठक को लाईन अटैच करना पड़ा। पिछोर विधायक ने इस मामले को विधानसभा में उठाकर यह सिद्ध कर दिया कि पिछोर में न कांग्रेस और ना भाजपा वरन् पूरे शिवपुरी जिले में केवल कक्काजू, कक्काजू ने भाजपा के नेता की इज्जत का बदला लेकर जिला भाजपा को जोर का झटका धीरे से दे दिया है। 

"जू" शब्द से याद आया कुछ माह पूर्व भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ने पिछोर में एक आमसभा में कक्काजू को महिला के बालों के जूं की उपमा दे डाली। जिस पर क्षत्रिय समाज भड़क गया। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष को क्षत्रिय समाज से माफी मांगनी पड़ी। इस पूरे प्रकरण में पिछोर विधायक केपी सिंह ने एक शब्द भी नहीं बोला। शायद वह शिवपुरी के भाजपा नेताओं को संदेश देना चाह रहे थे कि बोलना कब कहां कैसे चाहिए। चलो पुरानी बातें खत्म अब मुददे पर आते है। 

पिछोर विधानसभा केपी सिंह ने पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर विधानसभा में प्रश्र लगाया जिस पर एक भाजपा नेता को चड्डी बनियान में गिरफ्तारी किस नियम के तहत की गई? इस सवाल का जबाब स्वयं गृहमंत्री भी नहीं दे पाए और उन्होंने सदन में पिछोर टीआई को लाईन अटैच करने की कार्यवाही को अंजाम दिया। सोचने वाली बात यह है कि जिले में पांच विधानसभा सीटों पर चार विधायक भाजपा के है ना ही शिवपुरी जिलाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत ने इस मुद्दे को संगठन स्तर पर उठाया, शायद भाजपा के जिलाध्यक्ष रणवीर सिंह अपने परिवार में हुई शादी के आयोजन की थकान उतारने में भूल गए होंगे। 




सुना है कि शिवपुरी विधायक माखन लाल राठौर विधानसभा के इस सत्र में सह परिवार गए थे। शायद वे भी परिवार को भोपाल का सौंदर्य और शॉपिंग कराने में व्यस्त हो गए। हो सकता है इस कारण वह भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाना भूल गए। 










अब बात करें कोलारस विधायक नगर सेठ देवेन्द्र जैन साहब की, गर्मी आने वाली है वह भी अपने खानदानी व्यवसाय पत्ते का ठेका और उसे तुड़वाने के लिए मजदूरों की व्यवस्था में मशगूल हो गए। बताया जाता है कि उन्होंने आज तक कोई भी जनहित का मुद्दा विधानसभा में उठाया ही नहीं है तो इसको क्या उठाते? 








पोहरी से भाजपा विधायक प्रहलाद भारती तो अपने फोटो सेशन में व्यस्त होंगे। सुना है कि अभी वे एक भण्डारे में प्रसादी बांटते हुए फोटो सेशन में गड़बड़ी हो गई। वह इस पवित्र भण्डारे में प्रसाद परोसते समय अपनी चरणपादुकाऐं उतारना भूल बैठे फिर क्या था मीडिया ने उनका नाम चरण पादुका वाले नेताजी रख दिया। शायद वह भी इस नए नामांकरण संस्कार की टेंशन में इस मुद्दे को भुला बैठे। 







वहीं करैरा विधायक रमेश खटीक का क्या कहना, वे विधानसभा में प्रश्र पूछने के कारण हुए विवाद में भी सुर्खियों में अवश्य रहते है परन्तु जनता के हितों के कार्यों के लिए नहीं वरन अपने हितों के लिए उन्हें केवल खदान और खाद्यान्न की चिंता रहती है। 







अपने राम का तो यही कहना है कि भाजपा नेता के अपमान का मामला यह पहला नहीं है। पूर्व में भी जहां शिवपुरी विधायक दाल मिल मामले में अपने पुत्र को मिलकर चर्चित रहे तो वहीं कोलारस विधायक देवेन्द्र जैन भी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद के सम्मुख लज्जित हो पड़े और जाते-जाते एसपी प्रसाद कोलारस विधायक की मुसीबतें बढ़ा गए। बात पोहरी विधायक प्रहलाद भारती की यदि हो तो इन्होंने भी एक कृषक को जमीनी हक दिलाने के लिए एसडीएम पर अपना अधिकार जमाने का प्रयास किया परन्तु यहां भी विधायक को सफलता नहीं मिली और काफी हो-हंगामा के बाद विधायक भारती को ही शांत बैठना पड़ा। 

बात यदि करैरा विधायक रमेश खटीक की हो तो इन्होंने जनता की कम स्वयं की भलाई के कार्य ज्यादा करने की सोच रखी जहां कलेक्टर सभागार में सेटलमेंट आवास योजना का लाभ लेने के लिए लालयित रहे आखिकार कलेक्टर ने सभी को अनसुना कर अपने मन की कर इन्हें भी आईना दिखा दिया। जब इन्होंने अपनी इज्जत की परवाह नहीं की और ये शिवपुरी प्रशासन को अपनी विधायकी ना दिखा पाए तो भला एक भाजपा कार्यकर्ता की इज्जत के लिए विधानसभा में प्रश्र उठाकर अपने समय की बर्बादी क्यों करते। अपने राम का तो यह भी कहना है कि अगर ये विधायक अपने अपमानों का बदला केपी सिंह से कह देते तो शायद कुशल राजनीतिज्ञ केपी सिंह शायद इनकी कुछ मदद कर देते। 
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