भाजपाई बदमाशों का पत्रकार के निवास पर प्राणघातक हमला

shailendra gupta
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शिवपुरी. आदतन अपराधी राहुल रावत, कमल रावत एवं आसु रावत द्वारा गत 8 मार्च को होली के दिन हथिखाने पर स्थित सुनील  सिंह चौहान के निवास पर पहुंचकर लायसेंसी बंदूकों से फायर किया। फायर के दौरान हाथीखाने के महिला एवं वृद्धजन अपनी जान बचाकर भागे लेकिन दो युवकों शिवम् सेंगर व उसका भाई देवेन्द्र को बेसबॉल के डण्डे एवं तलवारों से बहुत बेरहमी से मारा। जब शिवम को अधमरा देख उक्त लोग भाग गए।


उक्त घटना दिन के समय 12:00 बजे की है। बेखौफ होकर मय हथियार सहित आए तीनों अपराधियों ने जान से मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी एवं बंदूकों से ताबड़-तोड़ गोलियों से सुनील सिंह चौहान के परिवार को एवं शिवम सेंगर तथा उसके भाई देवेन्द्र को भी गोलियों से फायर किया। लेकिन बहुत मुश्किल से वह अपनी जान बचा सके। तीनों आरोपी पूर्व में भी कई अपराध कर चुके है। दिनांक 21 नवम्बर 11 को उन्होंने लक्की चौहान को जान से मारने की कोशिश भी की थी जिससे वह बमुश्किल बचा वहीं 9 फरवरी को गजराज सिंह रावत को भी जान से मारने का प्रयास किया। जिसके विरूद्ध देहात थाना में 307 का प्रकरण पंजीबद्ध है। ऐसे आदतन अपराधी को पुलिस द्वारा ख्ुाला समर्थन दिया जा रहा है।

उक्त अपराधियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई है और ना ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है। उक्त अपराधियों के पिता भाजपा में  नेता होन के कारण पुलिस पर अपना दबाब बनाए हुए है। जिसके कारण शहर में कई अपराधियों का जन्म हो रहा है। सुनील सिंह चौहान के निवास पर उन्होंने लाठियों एवं तलवारों से उनका दरवाजा भी चकनाचूर कर दिया व परिवार के सदस्यों को भी जान से मारने का प्रयास किया। घर पर महिलाऐं होने के कारण महिलाऐं कुछ न कर सकी। ऐसे अपराधियों को पुलिस स्वयं संरक्षण दे रही है एवं उनके विरूद्ध धारा 307 का प्रकरण दर्ज ना करना पुलिस पर एक बहुत बड़ा दबाब हो सकता है। लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक प्रश्नचिह्न खड़ा हुआ है कि पुलिस प्रशासन द्वारा स्वयं अपराध जगत को जन्म दिया जा रहा है। 

लगातार अपराध करने के बाबजूद भी इन अपराधियों के विरूद्ध प्रकरण पंजीबद्ध हुआ है लेकिन उनके विरूद्ध कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई है और ना ही उन्हें पुलिस द्वारा आज दिनांक तक गिरफ्तार किया गया है। लायसेंसी बंदूक से फायरिंग करने के बाद व जान से मारने की कोशिश करने के बाद भी पुलिस द्वारा धारा 307 की कायमी ना करना एवं 25/27 आम्र्स एक्ट धारा की कार्यवाही ना करना पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक सवाल खड़ा करती है कि ऐसा क्या मजबूरी है जो सबकुछ स्पष्ट होने के बाबजूद भी 307 कायमी नहीं की गई। अगर उक्त अपराधियों के विरूद्ध 307 का प्रकरण पंजीबद्ध नहीं किया गया व उनके बंदूकों के लायसेंस निरस्त नहीं किए जाते है तो मजबूर होकर शहर की जनता को आन्दोलन करना पड़ेगा। 
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