लो फिर अन्ना हजारे से भिड़ गए जंगलवाले बाबा

shailendra gupta
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Jangal Wale Baba v/s Anna Hajare
भोपाल. केंद्र सरकार और अन्ना हजारे जिद पर अड़े हैं। इससे सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है। भ्रष्टाचार का खात्मा नैतिक मूल्यों को बचाए रखने पर ही संभव है, किसी कानून या नियम को बनाने से नहीं। ये बात जंगल वाले बाबा के नाम से विख्यात जैन मुनि चिन्मय सागर महाराज ने पद विहार करते हुए कही। वे करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर की यात्रा तय कर शनिवार दोपहर राजधानी पहुंचे।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे लेकर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे अपनी जिद्दी प्रवृत्ति से बचें। अपने भ्रमण के दौरान कई गांवों में लोगों को नशा मुक्ति का संदेश देने वाले मुनिश्री ने कहा कि वे यहां अपने प्रवास के दौरान यदि उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से हुई तो वे मप्र को नशा मुक्त राज्य घोषित कराने और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के प्रयासों में तेजी लाने की बात कहेंगे।

मप्र के शिवपुरी व रायसेन समेत देश के विभिन्न राज्यों के जंगलों में तप साधना कर चुके मुनिश्री ने कहा कि हिंसक पशु तब ही हमला करते हैं, जब हम उनसे छेड़छाड़ करें, लेकिन वर्तमान परिवेश में तो मनुष्य ही पशुता का व्यवहार कर रहा है।

कोन हैं जंगल वाले बाबा

कर्नाटक के जुगुल गांव में जन्मे मुनिश्री का पूर्व नाम धरणोंद्र कुमार है। आचार्य विद्यासागर महाराज से उन्होंने वर्ष 1987 में दीक्षा ली थी। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं। इसके पूर्व वर्ष 2005 में मुनिश्री राजधानी स्थित नेहरू नगर जैन मंदिर में पंचकल्याणक में आए थे।

इस बयान के साथ ही एक बार फिर जंगलवाले बाबा ने अन्ना हजारे समर्थकों से लोहा ले लिया है। स्वयं जंगल में जिद्दी तपस्या करने वालो बाबा अन्ना हजारे को जिद छोडऩे की सलाह दे रहे हैं। क्या आप अन्ना हजारे या भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्मित हो रहे माहौल के मामले में जंगल वाले बाबा के विचारों से सहमत हैं। कृपया अपने विचार चाहे वे पक्ष में हों या विपक्ष में कमेंट बॉक्स में दर्ज करें। आप हिन्दी, इंग्लिश या हिंग्लिश किसी भी भाषा में अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज करा सकते हैं।
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