श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता देती है सीख : संत श्रीकृष्णा स्वामी जी

shailendra gupta
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शिवपुरी-श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता से हमें सीख देती है यही कारण है कि आज भी इस दुनिया कई ऐसे मित्र है जो एक नहीं दो परिवारों को साथ लेकर चलते है जहां उनका हर सुख-दु:ख आपस में बंटा होता है इसलिए हर मानव को आयोजित होने वाली कथाओं से धर्मलाभ तो प्राप्त होता ही है साथ ही साथ मित्रता, सुख-दु:ख, जीवन का हर पहलू, हर मोड़, घर-परिवार, सुख शांति एवं मोक्ष के साथ-साथ अन्य विद्वान जानकारियां हमें कथाओं के श्रवण मात्र से हो जाती है श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन का महत्व भी बड़ा फलदायी होता है जिसके चलते एक नहीं अनेक लाभ मिलते है जहां कथा आयोजक, कथा श्रवण और कथा वाचक के साथ-साथ हर प्राणी इस पुण्यमयी फल को प्राप्त कर अपने जीवन को सुगम बनाता है। मित्रता व श्रीमद् भागवत कथा की इस अमिट कहानी का श्रवण करा रहे थे महामण्डलेश्वर संत श्रीकृष्णा स्वामी जो स्थानीय कैला माता मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में धर्मोपदेश दे रहे थे।
कैला माता मंदिर पर गोयल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में प्रख्यात भागवताचार्य महामण्डलेश्वर संतश्रीकृष्णा स्वामी ने श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान के अन्य विवाह नृगाख्यान का वर्णन सुनाया वहीं सुदामा चरित्र को सुन श्रोतागण भावविभोर हो उठे और ऐसा लगो मानो इस अनुकरणीय मित्रता का उदाहरण सुन हर श्रोतागण अपनी मित्रता पर गर्व महसूस करें। कैला माता मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में व्यासपीठ से संत श्री स्वामी ने भगवान के अन्य विवाह नृगाख्यान का वर्णन सुनाया इसके साथ-साथ श्रीकृष्ण सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन भी सुनाया जहां बताया कि मित्रता में कभी बैर नहीं होना चाहिए एक-दूसरे पर विश्वास सबसे बड़ी मित्रता है लेकिन आज देखा जा रहा है मित्रता के नाम पर छलावा किया जाता है यदि मित्रता ही करनी है तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करनी चाहिए भगवान की मित्रता का यह दृश्य सुनकर श्रोतागण भावविभोर हो उठे और जय-जयश्रीकृष्ण की जयकार करने लगे। 

इस अवसर पर संतश्री द्वारा अन्य कथाओं का भी विस्तृत वर्णन श्रोतागणों को सुनाया। कैला माता मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा अब समापन की ओर है जहां सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरूष व बालक-बालिकाऐं धर्मलाभ लेने सपरिवार पहुंच रहे है। गोयल परिवार द्वारा आयोजित यह धार्मिक आयोजन शिवपुरी शहर मे एक अमिट छाप छोड़ गया और आगे भी ऐसे आयोजन होते रहे ऐसी गोयल परिवार ने भी आशा व्यक्त की है। कथा का समापन आज 22 जनवरी को होगा वहीं कल 23 जनवरी को हवन पुर्णाहुति एवं यज्ञ के द्वारा कथा समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
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