शिवपुरी में पहली बार वेदकथा के लिए निकली भव्य शोभा यात्रा, हुआ भव्य स्वागत

shailendra gupta
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शिवपुरी. इस संसार में यदि मानव को सुखी व शांति की परिकल्पना को साकार करना है तो इसके लिए वेदों से बढ़कर अन्य कोई ज्ञान की जरूरत नहीं है क्योंकि वेद ही ईश्वर की वाणी है जिन्होंने वेदों के ज्ञान को धारण कर लिया, समझिए उसका जीवन सार्थक हो गया। वेदों के अनुसार बताए मार्ग पर चलने वाले हर प्राणी के लिए वेद ही प्रथम सीढ़ी है जिससे परमात्मा को पाया जा सकता है इस संसार में तीन तत्व अनादिकाल से व्याप्त है ईश्वर, प्रकृति और जीव इन तीनों को वेदों में बड़े ही सार्थक शब्दों में व्यक्त किया गया है। इस संसार में वेदों को आज विसार दिया है जिसके कारण संसारी प्राणी दु:खी है आर्य समाज ने वेदों का विस्तार का जो बीढ़ा उठाया है वह प्रशंसानीय है इससे देश निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होगा। वेदों की इस व्याख्या को व्यक्त कर रही थी करनाल हरियाणा से शिवपुरी में पहली बार वेदकथा का वाचन करने पधारी अंजली आर्य जी। जिन्होंने स्थानीय सदर बाजार स्कूल में वेदकथा के माध्यम से वेदों की वाणी को उपस्थित शिवपुरीजनों को सुनाया। 

आर्य समाज शिवपुरी द्वारा शिवपुरी शहर में पहली बार वेदकथा का भव्य आयोजन स्थानीय सदर बाजार विद्यालय परिसर में आयोजित किया गया। जहां सर्वप्रथम वेदकथा का वाचन करने पधारी अंजली आर्य जी व वेदों की वाणी के  लिए भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जो सदर बाजार स्कूल से प्रारंभ होकर पंचायती बगीचा, माधवचौक, कोर्ट रोड, सदर बाजार से होते हुए धर्मशाला के सामने से आर्य समाज मंदिर पहुंची। इस दौरान इस शोभा यात्रा का जगह-जगह आर्य बन्धुओं एवं शहर के गणमान्य नागरिकों ने भव्य स्वागत किया। जल वितरण, प्रसाद वितरण, स्वल्पाहार के साथ-साथ आकर्षक आतिशबाजी एवं पुष्पवर्षा संपूर्ण मार्ग में आकर्षण का केन्द्र रही। शोभायात्रा में घोड़े और पदयात्रा में शामिल महिला-पुरूष व बच्चे बैण्ड की करतल ध्वनि पर नाच-गाकर इस शोभायात्रा को शोभायमान कर रहे थे। 

हाथों में ध्वजा पताका और क्रमबद्ध पदयात्रा के दौरान शिवपुरीवासियों के लिए अमृतमयी आशीर्वाद प्रदान कर रही वेदकथा वाचक अंजली आर्य जी का भी स्वागत किया गया। तत्पश्चात कार्यक्रम स्थल सदर बाजार स्कूल में यज्ञ किया गया एवं दोप.3 बजे से प्रवचन हुए। जिसमें अंजली आर्य जी ने बताया कि यह संसार तीन तत्वों ईश्वर, प्रकृति और जीवात्मा से मिलकर बना है जहां किसी एक के भी अभाव में यह कभी संसार कभी पूर्ण नहीं हो सकता। अंजली आर्य जी ने इस दौरान एक गीत के माध्यम से वेदों की व्याख्या की 'प्रभु वेद विद्या का विस्तार कर दो, दु:खी देश भारत का उद्वार कर दो  अर्थात् इस संसार में वेदों के विसारने के कारण ही आज भारत देश दु:खी है इसीलिए वेदों की वाणी को जन-जन तक पहुंचाया जाए तो पुन: एक खुशहाल भारत हमें देखने को मिलेगा। 

अंजली आर्य जी ने कहा ईश्वर अपने आप में पूर्ण है, प्रकृति अपनी जड़ता में पूर्ण है लेकिन जीवात्मा को पूर्ण होने के लिए परमात्मा की आवश्यकता होती है ओर इसके लिए उसके पास सद्-चित तो होता है लेकिन आनन्द नहीं होता यदि उसने इस आनन्द को प्राप्त कर लिया तो वह सदचितआनन्द हो जाता है। जहां शरीर रूपी से इस देह को त्यागकर ही परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। आर्य समाज द्वारा सभी नगरवासियों से आग्रह है कि प्रात: 8 से 10 बजे तक यज्ञ विधान एवं दोप.3 से 5:30 बजे तक वेदकथा का श्रवण कर धर्मलाभ अर्जित करें। 
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