शिवपुरी। शिवपुरी जिले मे हैदराबाद की ग्रीन को कंपनी के दवारा 180 मेगावाट का विशाल सोलर प्लांट संचालित किया जा रहा हैं। इस कंपनी के द्धवारा जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत कलेक्टर को बीते दिनो की गई थी। जांच मे सामने आया इस कंपनी ने किसानो की जमीनो पर अतिक्रमण तो किया है साथ मे जल सरचनाओ का भी अस्तिव मिटा दिया हैं,आम रास्ते पर भी कब्जा कर उस पर चममचती सोलर की प्लेट लगा दी है। इस मामले मे जांच करने पहुंची राजस्व की टीम ने कंपनी को नोटिस जारी कर दिए हैं।
ग्रीन-को कंपनी का सोलर प्लांट शिवपुरी तहसील के बिनेगा, भैसाना, बिजरावन, जसराजपुर और मुड़ेरी गांव में फैला है। सामने आए आंकड़ों के अनुसार इन गांवों में सरकारी जमीनों पर कब्जे का कुल रकबा करीब 14.750 हेक्टेयर बताया गया है। ग्राम बिनेगा, बिजरावन और भैसाना में लगे प्लांट को लेकर 4 अगस्त को तहसील कोर्ट के बेदखली आदेश के बाद जमीनों से जुड़े इस पूरे मामले ने तूल पकड़ा।
राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच में सरकारी जमीनों पर कब्जे के मामले सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि ये जमीनें सरकारी रिकॉर्ड में नाले, रास्ते और शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थीं, तो यहां इतने वर्षों तक सोलर पैनल कैसे लगे रहे और बिजली का उत्पादन कैसे होता रहा?
सरकारी नाले और रास्ते भी नहीं बचे
जांच में सामने आए रिकॉर्ड के मुताबिक बिनेगा में शासकीय सर्वे नंबर 559 की 0.22 हेक्टेयर जमीन राजस्व रिकॉर्ड में नाले के रूप में दर्ज है, लेकिन मौके पर सोलर प्लांट लगा हुआ है। इसी तरह भैसाना के सर्वे नंबर 330 की 1.50 हेक्टेयर जमीन भी रिकॉर्ड में नाला दर्ज है, लेकिन यहां भी सोलर पैनल लगाए गए हैं। आरोप है कि सोलर प्लांट के लिए इन स्थानों पर नाले का अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया। इतना ही नहीं, भैसाना में सर्वे नंबर 355 की 0.21 हेक्टेयर, सर्वे नंबर 380 की 0.41 हेक्टेयर और सर्वे नंबर 393 की 0.70 हेक्टेयर जमीन राजस्व रिकॉर्ड में रास्ते के रूप में दर्ज है। मौके पर इन जमीनों पर भी कब्जा कर बिजली उत्पादन किए जाने की बात सामने आई है।
आदिवासियों की वर्जित जमीन पर भी सोलर पैनल
मामले का सबसे गंभीर पहलू आदिवासी किसानों की विक्रय वर्जित जमीनों से जुड़ा है। जांच में करीब 160 बीघा ऐसी जमीन सामने आने की बात कही जा रही है, जिसे नियमों के तहत बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद इन जमीनों पर सोलर पैनल लगाए जाने का आरोप है।
भैसाना गांव में फूलसिंह की सर्वे नंबर 499, 517 और 518 की कुल 2.94 हेक्टेयर जमीन विक्रय वर्जित बताई गई है, लेकिन इसी जमीन पर कंपनी के सोलर पैनल लगे हैं। इसी गांव में संजय की सर्वे नंबर 571 की 0.75 हेक्टेयर और केशव की सर्वे नंबर 562 की 1.35 हेक्टेयर जमीन भी विक्रय वर्जित बताई गई है। दोनों जमीनों पर भी सोलर प्लांट संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इसी तरह सुभाषचंद्र, वीरसिंह और विदेश की 1.35 हेक्टेयर तथा कौंसा, भारती, हुकमी और नरेश की 1.49 हेक्टेयर जमीन पर भी सोलर पैनल लगे होने की बात जांच में सामने आई है।
आठ साल से बिजली उत्पादन, अब प्रशासन की नजर
करीब आठ साल से सोलर पैनलों के जरिए बिजली का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में सवाल केवल जमीन पर कब्जे का नहीं, बल्कि यह भी है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीनों पर इतने लंबे समय तक सोलर प्लांट कैसे संचालित होता रहा। राजस्व अमले के पटवारी से लेकर आरआई, तहसीलदार और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब प्रशासन ने सरकारी जमीनों के मामलों में कार्रवाई की बात कही है। नायब तहसीलदार शिवम उपाध्याय के मुताबिक कंपनी को सरकारी जमीनों पर कब्जे के नोटिस दिए गए हैं और अगले सप्ताह बेदखली आदेश जारी कर कब्जे हटाने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं आदिवासियों की विक्रय वर्जित जमीनों के मामले में उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही और जांच के बाद नियम के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है।
एसडीएम शिवपुरी आनंद राजावत ने भी कहा है कि सरकारी जमीनों के अलावा यदि आदिवासियों की विक्रय वर्जित जमीनों पर सोलर प्लांट संचालित पाया जाता है तो तहसीलदार से जांच कराई जाएगी और नियम विरुद्ध पाए जाने पर विधिवत कार्रवाई होगी।
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