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9 दिन से अस्पताल में भर्ती थी प्रसूता ,फिर भी सडक पर हुआ प्रसव | Shivpuri News

शिवपुरी। शिवुपरी जिले की स्वस्थ्य सुविधाए लगातर चौपट होती जा रही है, बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में 9 दिन से भर्ती प्रसूता का प्रसव रास्ते में हो गया। परिजनो ने 108 एम्बूलेंस को फोन किया लेकिन वह नही आई। प्रसूता लगभग 1 घटें दर्द से तडपती रही फिर परिजन उसे आटो से अस्पताल लेकर आए। 

जानकारी के अनुसार रामकुमारी पत्नी रामनिवास सेन उम्र 40 साल निवासी शालादांड़ा शेरगढ़ तहसील पिछोर की गर्भावस्था में तबियत बिगडऩे पर उसे परिजन इलाज के लिए पिछोर स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां से उसे २६ मार्च को शिवपुरी रैफर कर दिया गया और यहां जांच के दौरान प्रसूता को 4.6 ग्राम हिमोग्लोबिन होने पर एडमिड कर दो यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। 

प्रसूता के पति रामनिवास के अनुसार 3 मार्च की सुबह डॉक्टर ने उसे बोला कि अभी डिलीवरी में टाइम है, अपनी पत्नी को घर ले जाओ। बकौल रामनिवास उससे एक कागज पर साइन करवा कर घर जाने कह दिया तो वह पत्नी को घर ले गया। 

रास्ते में पत्नी की तबियत बिगड़ी तो वह उसे वापस अस्पताल लाने लगे, परंतु जैसे ही वह बड़ौदी पर पहुंचे तो रामकुमारी को प्रसव हो गया। प्रसूता बीच सडक़ पर पौन घंटे १०८ एम्बूलेंस के इंतजार में तड़पती रही और एम्बुलेंस नहीं आई तो परिजन उसे ऑटो से अस्पताल लाए। फिलहाल जच्चा-बच्चा की हालत सामान्य बताई जा रही है।

अस्पताल प्रबंधन बोला, अपनी मर्जी से ले गए
इस संबंध में जब अस्पताल प्रबंधन से बात की गई तो उनका कहना था कि यह बात गलत है कि डॉक्टर ने उसकी छुट्टी की थी। वह खुद अपनी मर्जी से जच्चा को यहां से लेकर गया था और पर्चे पर भी लिख कर गया था । वहीं रामनिवास का कहना है कि मैं तो पढ़ा लिखा नहीं हूं, मुझसे डॉक्टर ने छुट्टी की बात कही और एक कागज भी दिया कि जाओ तुम्हारी छुट्टी हो गई है। जो कागज उसे दिया गया था वह डिस्चार्ज टिकिट न होकर सोनोग्राफी की रिपोर्ट थी।

चार बेटियों के बाद हुआ बेटा 
खास बात यह है कि रामकुमारी के यहां इससे पहले चार बेटियां हैं और बेटे की चाह में ही उसके यहां चार बेटियां हो गई हैं। पांचवे नंबर पर बेटा हुआ है इसलिए रामनिवास इतना प्रसन्न है कि उसका कहना है जिसने जो किया वो सब ठीक है। ईश्वर ने उसे बेटा देकर उसकी इच्छा पूरी कर दी इसलिए उसे अब किसी से कोई शिकायत नहीं है।

आरोप गलत है
मरीज के अटेंडर अपनी मर्जी से प्रसूता को घर ले गए थे और यह बात वह पर्चे पर लिख कर भी गए हैं। अगर हमने डिस्चार्ज किया होता तो डिस्चार्ज भी बनता, उसका आरोप गलत है।
डॉ उमा जैन, प्रसूति रोग विशेषज्ञ
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