ऋण घोटाले में बैंक मैनेजर और सोसायटी सचिव सस्पेंड, 5 गुना तक बडा दिया किसानो का कर्जा | Shivpuri News

शिवपुरी। जैसे ही कमलनाथ प्रदेश के नाथ बने और किसानो की कर्ज माफी की घोषणा की वैसे ही सोसायटियो ने घोटाला करना शुरू किया,यहां तक स्वर्गवासी किसानो पर कर्जा निकाल उनके माफ भी करवा दिया। जिले के अलग-अलग विकास खण्डो से ऐसी खबरे प्रतिदिन प्रकाशित हो रही हैं, और लगातार शिकायते भी हो रही है। इन्ही शिकायतो पर जांच समिति गठित कलेकटर के आदेश पर की थी। 

बताया जा रहा है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा खतौरा से संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था मर्यादित पीरोंठ की किसानो के कर्ज माफी घोटोले की शिकायत कोलारस विधायक  वीरेन्द्र रघुवंशी ने 21 जनवरी को कलेक्टर शिवपुरी को लिखित रूप से की थी। शिकायत पर कलेक्टर ने अपर कलेक्टर अशोक चौहान के अध्यक्षता में कमेटी गठित कर एसडीएम कोलारस आशीष तिवारी, डिप्टी कलेक्टर व तहसीलदार कोलारस को जांच सौंपी।

जांच करने पर शिकायत सही पाई गई है। संयुक्त कमेटी की जांच रिपोर्ट पर शिवपुरी कलेक्टर ने कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं। इसी आधार पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शिवपुरी के महाप्रबंधक ने खतौरा ब्रांच के शाखा प्रबंधक व सोसायटी सचिव को निलंबित कर दिया है। मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर के आदेश जारी किए हैं। 

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि तीन किसानों के नाम बिना ऋण लिए ऋणमाफी सूची में जोड़ दिए गए। एक किसान पात्र नहीं होने पर भी सूची में नाम दर्ज मिला और ऋण राशि भी अधिक दर्शा दी। वहीं पांच किसानों ने ऋण तो लिया लेकिन सोसायटी द्वारा ऋण की रकम बिना वजह बढ़ाकर अधिक कर्जदार दिखा दिया। जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं। 

एक किसान जिस पर कर्ज 33 हजार रुपए, सूची में 1.96 लाख रु. बता दिए 

पीराेंठ निवासी किसान कमल सिंह पुत्र भुज्जीराम के खाता क्रमांक 12/1 की जांच में पाया गया कि साल 1994 में 6796 रुपए का ऋण लिया था। ब्याज 26858 रुपए मिलाकर कुल 33 हजार 673 रुपए का ऋण था। किसान के नाम से ऋण माफी सूची में 1 लाख 96 हजार 153 रुपए दर्शाया गया। किसान ने 1994 में ऋण लिया था और नियम अनुसार ऋणमाफी के तहत 1 अप्रैल 2007 के बाद के किसान ही ऋणमाफी के योग्य नहीं है। 

जिन पर कर्ज ही नहीं, सोसायटी उन्है कर्जदार बना दिया 

किसान मुलतान सिंह पुत्र रामसिंह के खाता क्रमांक 92/3 की जांच से स्पष्ट हुआ कि 29 मार्च 2018 में 4600 रुपए का ऋण लिया था। ऋण अदा कर देने के बावजूद सोसायटी ने 99 हजार 400 रुपए का कर्जदार बना दिया। 

किसान देवीसिंह पुत्र रामलाल के खाता क्रमांक 252/01 की जांच करने से पता चला कि 31 मार्च 2018 में कोई कर्ज नहीं है। जबकि सोसायटी से जारी कर्जमाफी सूची में किसान के नाम से 1 लाख 61 हजार 273 रुपए अंकित हैं। 

किसान हिम्मतसिंह पुत्र फूलसिंह के खाता क्रमांक 03/75 की जांच में 31 मार्च 2018 की स्थिति में कोई कर्ज नहीं है। फिर भी ऋण सूची में 3 हजार 797 रुपए दर्शाए गए हैं। 

किसान बुंदेल सिंह पुत्र बल्देव सिंह के खाता क्रमांक 67/2 की जांच में पाया गया कि 23 मार्च 2018 को कुल 13 हजार 710 रुपए का ऋण बकाया है। जबकि ऋणमाफी सूची में 67 हजार 772 रुपए अंकित हैं। किसान ने कम ऋण लिया और कर्ज ज्यादा दर्शाया है। सोसायटी ने पांच गुना तक कर्जदार बना दिया। 

किसान पूरन सिंह पुत्र ग्यासी के खाता क्रमांक 271/01 की जांच में सामने आया कि 31 मार्च 2018 तक 72 हजार 153 रुपए का ऋण शेष है। लेकिन सूची में 91 हजार 544 रुपए अंकित हैं। 

किसान सोनू यादव पुत्र बृखभान सिंह के खाता क्रमांक 63/03 की जांच से पता चला कि 31 मार्च 2018 तक 10 हजार 30 रुपए शेष है। जबकि ऋणमाफी सूची में 47 हजार 54 रुपए अंकित हैं। 

किसान जगदीश सिंह पुत्र बुंदेल सिंह के खाता क्रमांक1/162 की जांच में पाया गया कि 31 मार्च 2018 तक 37 हजार 750 रुपए का ऋण शेष है। लेकिन ऋणसूची में 46 हजार रुपए शेष हैं। 

किसान बहादुर सिंह पुत्र कडोरीमल के खाता क्रमांक 01/274 की जांच की तो पता चला कि 31 मार्च 2018 तक 91 हजार 544 रुपए का ऋण बकाया है। लेकिन सोसायटी सूची में 1 लाख 76 हजार 600 रुपए अंकित किए गए हैं। 
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