मेरा परिवार गरीब है: जलील करने वाले शब्द छापने के आदेश देने वाले CEO गगन वाजपेयी पर कोई कार्रवाई नही | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। जनपद पंचायत शिवपुरी के विनेगा गांव सहित अन्य गांवो में निवास करने वाले बीपीएल परिवारधारी आदिवासीयों के घरों पर मेरा परिवार गरीब है जैसा शब्द छापने के आदेश देने वाले अधिकारी गगन वाजपेयी पर अभी तक कोई कार्रवाई नही हुई हैं। इस मामले को 1 साल पूर्व राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान में लिया था। शिवपुरी के सामाजिक कार्यकर्ता अभय जैन ने इसकी शिकायत मानव अधिकार आयोग को की थी। 

अभय जैन की शिकायत के बाद मप्र शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव इक़बाल सिंह बैस ने अपना जवाब पेश करते हुए कहा है कि वहां पर दीवार लेखन के निर्देश शिवपुरी जनपद पंचायत के सीईओ गगन वाजपेयी ने दिए थे। इस जवाबी पत्र में कहा गया है कि बीपीएल परिवारों को चिंहित करने के लिए यह निर्देश दिए गए थे। जिससे पात्र परिवारों को योजनाएं का लाभ दिलवाने में उनकी पहचान में आसानी हो। 

इतना जवाब देकर मप्र शासन के अपर सचिव ने अपना पल्ला पूरे मामले से झाड़ लिया है लेकिन सहरिया आदिवासी बीपीएल परिवारों के घरों पर गरीब परिवार जैसे शब्द लिखवाने वाले अफसरों पर क्या कार्रवाई की इसका कोई उल्लेख नहीं किया है।

21 जनवरी को मांगा गया है शिकायतकर्ता का पक्ष

मानव अधिकार आयोग ने इस मामले में शिकायतकर्ता अभय जैन से उनका पक्ष 21 जनवरी तक मांगा है। शिकायतकर्ता अभय जैन का कहना है कि शिवपुरी जनपद पंचायत के विनेगा गांव में सहरिया आदिवासी परिवारों के साथ अधिकारियों ने अपमान किया था और उनके घरों के बाहर मेरा परिवार गरीब है जैसे शब्द लिखवाए। यह दीवार लेखन शिवपुरी जनपद पंचायत सीईओ गगन वाजपेयी के निर्देश पर किया गया। इसका विधिवत पत्र आयोग को दिया गया है।

सीईओ पर कार्रवाई की मांग

अभय जैन ने बताया कि हमारी मांग है कि सहरिया आदिवासी परिवारों की गरीबी का मजाक उड़ाने वाले जनपद पंचायत सीईओ पर कार्रवाई होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह 21 जनवरी को आयोग से इस कार्रवाई की मांग करेंगे। अभय जैन का कहना है कि उनके पास वह पत्र है। इसमें जनपद सीईओ ने सभी ग्राम पंचायत सरपंच और सचिव को पत्र लिखा था।

इसमें यह दीवार लेखन के आदेश थे। दीवार न लिखने पर दंडात्मक कार्रवाई तक की बात कही गई थी। सीईओ द्वारा इस पत्र की एक-एक कॉपी संबंधित एसडीएम, जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर तक को भेजी गई थी। इसके बाद भी बड़े अफसरों ने इस लापरवाही की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही कोई कार्रवाई की गई।
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