अफसर और ठेकेदार ने 2 करोड 43 लाख ठिकाने लगा दिए, चांदपाठा अभी भी लीक | Shivpuri News

शिवपुरी। खबर शिवपुरी के माधव नेशनल पाके के अंदर से आ रही है। नेशनल पार्क की सीमा में आने वाले स्टेट कालीन तालाब चांदपाठा की दीवार में लंबे समय से रिसाव हो रहा था।इस रिसाव को रोकेने और तालाब की मरम्मत के लिए सांसद सिंधिया ने वर्ल्ड बैंक से 2.43 करोड़ रुपए मंजूर कराए थे। विभाग ने टेंडर कराकर काम शुरू करवाया, बजट खर्च हो गया परंतु रिसाव नही रूका। बताया जा रहा है कि इस रिसाव को लेकर जल संसाधन विभाग और माधव नेशनल पार्क प्रबंधन में भी तानातनी चल रही हैं।

पार्क प्रबंधन इन रिसवों को लेकर अपत्ति उठा रहा है और अभी 2 लगह लीकेज न रूकने की बात कह रहा है। सांसद सिंधिया के द्वारा तालाब के सरंक्षण के लिए बजट आवटंन के बाद ने जल संसाधन विभाग ने 2017 में टेंडर कराया था और सिंतबर 2017 से लगातार काम चल रहा हैं। बजट ठिकाने लग चुका है, लेकिन लीकेज नही रूकी।

बताया जा रहा है कि जल से लड़ने वाला कैमिकल पॉलिमर्स युक्त सीमेंट या पालिमर्स को सीमेंट में मिलाकर इस तालाब की दिवारों को पिलानी थी। पॉलीमर्स एक ऐसा कैमिकल होता है जो वाटर पूफ्रिंग के काम आता है, यह सीमेंट के साथ इस्तेमाल होता हैं, यह काफी कीमती होता हैं। लेकिन तालाब की मरम्मत में इसका उपयोग नहीं कियास गया। केवल सीमेंट का उपयोग किया गया है। सूत्रों का कहना है कि जिस बड़ा रिसाव के कारण पूरा बजट आया था, वह रिसाव अभी भी हो रहा है वहां कपड़ा और लकड़ी ठूंस दी गई हैं।

ठेकेदार को बुलवाकर काम लगवा रहे हैं 
दीवार में जहां रिसाव अधिक था, वहां पीआईसीसी से पॉइंट कराई है। अन्य जगह दूसरा मटेरियल उपयोग में लाया गया है। हमारी नेशनल पार्क के अधिकारियों से बात हो गई है। ठेकेदार को बुलवाकर रिसाव रुकवाने के लिए काम लगवा रहे हैं।
बृजेश भार्गव,
एसडीओ, जल संसाधन विभाग शिवपुरी

पार में रिसाव हो रहा है, विभाग से बातचीत हुई है 
पार में रिसाव हो रहा है। शनिवार को हमारी जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से बातचीत हुई है। रिसाव रोकने काम कराने की बात कही है। किस कारण रिसाव हो रहा है, यह टेक्निकल है। यह तो उन्हीं लोगों को पता है।
कमलिका मोहंता,
पार्क डायरेक्टर, माधव नेशनल पार्क शिवपुरी
Share on Google Plus

Legal Notice

Legal Notice: This is a Copyright Act protected news / article. Copying it without permission will be processed under the Copyright Act..

0 comments:

Loading...
-----------

analytics