शिवपुरी में यशोधरा सरकार: ज्योतिरादित्य ने पोहरी और कोलारस भी दे दिए उपहार

ललित मुदगल। एक बार फिर प्रमाणित हो गया कि सिंधिया सरनेम के साथ नेता भाजपा में हो या कांग्रेस में। रणनीति महल में ही बनती है और पार्टियों के क्षत्रप सबकुछ जानते हुए भी कुछ नहीं कर पाते। अपने पिता की तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ना केवल अपनी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया की जीत सुनिश्चित कर दी बल्कि उनके माथे पर लगा कोलारस का दाग मिटाने के इंतजाम भी कर दिए। इतना ही नहीं ज्योतिरादित्य ने अपनी बुआ को पोहरी भी उपहार स्वरूप दे दी है। 

शिवपुरी से उतारा डमी केंडिडेट
कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में शिवपुरी विधानसभा से सिद्धार्थ लढ़ा नाम के एक युवक को प्रत्याशी बनाया गया है। इनके पिता शहर के लोकप्रिय समाजसेवी थे परंतु सिद्धार्थ लढ़ा में पिता की छवि नहीं दिखती। सिद्धार्थ लढ़ा की पहचान ज्योतिरादित्य सिंधिया को सबसे महंगी माला पहनाने वाले युवा नेता से ज्यादा नहीं है। वो लोग भी सिद्धार्थ से मदद मांगने नहीं जाते जो उनके पिता को भगवान का दर्जा देते थे। शिवपुरी में सिद्धा​र्थ की स्थिति नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव जीतने की नहीं है। वो पूरी तरह से डमी केंडिडेट है ताकि यशोधरा राजे सिंधिया की जीत सुनिश्चित हो जाए। बता दें कि शिवपुरी विधानसभा में इस बार यशोधरा राजे सिंधिया का काफी विरोध है। शिवपुरी ग्रामीण से तो वो 2013 का चुनाव भी हार चुकीं हैं। 2018 में शहर में भी उनकी हालत अच्छी नहीं थी। अब जनता के पास विकल्प ही नहीं है। 

यशोधरा के माथे से कोलारस का दाग मिटाया
शिवपुरी जिले की कोलारस सीट पर हुए उपचुनाव के समय ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। शिवराज सिंह चौहान ने भी चुनाव की कमान अपने हाथ में ले ली थी। भाजपा ने यहां यशोधरा राजे सिंधिया को स्टार प्रचारक बनाकर भेजा। विशेष हेलीकॉप्टर दिया परंतु जीत नहीं दिला पाईं। चुनाव बाद उनके माथे पर यह दाग था। कहा गया कि कोलारस में राजे का जादू नहीं चलता। इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महेंद्र यादव को रिपीट कर दिया है। दूसरी जातियों के अलावा यादव समाज में महेंद्र यादव का भारी विरोध है। भाजपा ने अब तक ​प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। अब भाजपा से यदि यशोधरा राजे की मर्जी का प्रत्याशी उतारा गया तो यह कलंक भी धुल जाएगा। संभव है यशोधरा राजे के प्रचार कमान संभालते ही कांग्रसे प्रत्याशी महेंद्र यादव खुद भी सरेंडर कर देंगे। 

प्लेट में सजाकर दे दी पोहरी
पोहरी सीट यशोधरा राजे ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना ली थी। उमा भारती यहां से नरेंद्र बिरथरे को टिकट दिलाना चाहतीं थीं। नरेंद्र सिंह तोमर भी बिरथरे के फेवर में थे परंतु राजे प्रहलाद भारती के नाम पर अड़ गईं और टिकट दिला लाई। इस सीट पर लड़ाई धाकड़ और ब्राह्मण के बीच होती है। प्रहलाद भारती का नाम घोषित होते ही मान लिया गया था कि कांग्रेस से हरिबल्लभ शुक्ला या किसी दूसरे ब्राह्मण को टिकट दिया जाएगा परंतु ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सुरेश राठखेडा को टिकट दे दिया। अब दोनों प्रत्याशी धाकड़ हैं। रात के अंधेरे में समाज बैठेेगा और महल का जैसा इशारा होगा वैसी वोटिंग का फैसला हो जाएगा। चुनावी लड़ाई यहां भी नहीं होगी। सुरेश राठखेडा लड़ना भी चाहे तो उनका कद प्रहलाद भारती जितना नहीं है। 

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