जानलेवा डेंगू: डेंगू से मृतकों की संख्या बढ रही है, प्रशासन कुंभकर्णी नींद में | Shivpuri News

शिवपुरी। ग्वालियर संभाग के सबसे बड़े शिवपुरी जिले में प्रशासन की हठधर्मिता के चलते मरीज बेहाल हैं शासन के तमाम निर्देशों के बावजूद भी शिवपुरी जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं दूर की कौड़ी साबित हो रही है । डेंगू की रोकथाम के लिए प्रशासन भले ही लाख प्रयास कर रहा है। परंतु इसके बावजूद डेंगू थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात यह हैं कि डेंगू दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से अपने पैर शिवपुरी जिले में पसारता जा रहा है।

उल्लेखनीय है की पिछले 1 सप्ताह से डेंगू की रोकथाम के लिए प्रशासन ने जिस तरह से अपने प्रयास तेज किए हैं उसके तहत लार्वा सर्वे और जागरूकता कार्यक्रमों की झडी सी लग गई । इसके बावजूद डेंगू के वायरस का प्रभाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है बात अगर आंकड़ों की करें तो जिले में 29 अक्टूबर तक डेंगू के 535 मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं इन मरीजों में से 80 फ़ीसदी मरीज बच्चे हैं यानी कि यह कहना गलत नहीं होगा कि डेंगू का मच्छर सर्वाधिक बच्चों पर ही अटैक कर रहा है ऐसे हालातों में लोगों को अपने बच्चों को बचा कर रखना अनिवार्य हो गया है।

आंकड़ों की जुबानी लारवा सर्वे की कहानी 
जिले में अब तक लारवा सर्वे किए गए घर 46219
जिले में जिन घर स्थानों पर लगवा मिला 8049
अब तक जिन कंटेनर में लारवा सर्वे किया 30 8498
जिन कंटेनर में डेंगू का लारवा पाया गया 10886
कुल चिन्हित सरकारी आंकड़ों में मरीज 535 हैं 

न डॉक्टर न दवाई मरीज बेहाल
शिवपुरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित समुदाय व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालात खराब होने के कारण इस समय मरीज परेशानी में है खासकर डेंगू व अन्य मौसमी बीमारियों से गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के सामने संकट आ गया है अंचल के अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों पर ना तो डॉक्टर हैं और ना दवाएं केवल कागजी खानापूर्ति कर अंचल के इन स्वास्थ्य केंद्रों पर नाम मात्र की व्यवस्थाएं हैं ग्रामीण अंचल के कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर तो तालाबंदी के हालात हैं यही वजह है कि जिला अस्पताल में इस समय मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

जिला अस्पताल में स्थित स्थिति यह है कि यहां पर प्रतिदिन 2000 तक की ओपीडी जा रही है अंचल के स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी सीएमएचओ डॉ ए एल शर्मा पर है लेकिन वह सीएमएचओ कार्यालय में चलने वाली सामग्री खरीदी व्यवस्थाओं में हुए हैं उन्हें अंचल के इन स्वास्थ्य केंद्रों की फिक्र ही नहीं है प्रभावी निगरानी ना होने के कारण अंचल के लोग डाक्टरों बाद दवाओं के अभाव में जिला मुख्यालय पर आने को मजबूर हैं और या  प्राइवेट डॉक्टरों से इन लोगों को अपना इलाज कराना पड़ रहा है प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक में दम कर रहे । प्राइवेट डॉक्टर अवैध झोलाछाप तब बुधवार को कलेक्टर शिल्पा गुप्ता के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ ए एल शर्मा ने टीमों का गठन किया और झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए  हैं । अब देखना है कलेक्टर के निर्देश एवं आदेश कितना असर करता है ।

535 पॉजिटिव मरीज निकले फिर फिर भी प्रशासन कुंभकरण की नींद में क्यों?

जिले में डेंगू को लेकर हालात बिगड़ गए हैं ऐसी कोई कॉलोनी या वस्ती और ग्राम नहीं जहां पर डेंगू पीडि़त मरीज नहीं मिल रहे हो स्थिति यह है कि अभी तक जिले में 535 से जाना पॉजिटिव डेंगू के केस मिल चुकी हैं स्थिति बिगडऩे के बाद अब प्रशासन चहता है शिवपुरी में अभी तक 38000 घरों में लगवा सर्वेक्षण का काम हुआ है और 6000 से ज्यादा घरों में लार्वा मिलने पर इसे नष्ट किया गया है 535 लोगों को डेंगू निकलने के अलावा 10 से ज्यादा लोगों की मौत का आंकड़ा इस बीमारी से होना बताया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी तक एक भी मौत जिले में डेंगू से नहीं हुई है।

गांव से शहर में आ रहे इलाज कराने लोग 

अंचल के करैरा ,नरवर, कोलारस ,बदरवास ,सतन वाड़ा ,सुभाषपुरा पोहरी, पिछोर, खनियाधाना एवं बैराड़ से लोग मौसमी बीमारियों से पीडि़त होने के बाद जिला मुख्यालय पर या तो अस्पताल में आ रहे हैं या प्राइवेट चिकित्सकों के यहां पर अपना पैसा खर्च कर इलाज करा रहे हैं । अंचल में स्वास्थ्य केंद्रों पर व्यवस्थाएं ठप हैं लेकिन कोई कार्रवाई सीएमएचओ ऑफिस से नहीं हो रही है । कुल मिलाकर स्थिति चिंताजनक है । करैरा तहसील के अमोल एवं दिनारा स्वास्थ्य केंद्रों पर कोई डॉक्टर पदस्थ नहीं है यहां के मरीज बहुत ही परेशान होकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को कोस रहे हैं । मजबूर होकर अनपढ़  झोलाछाप डॉक्टरों के हाथों में अपनी जिंदगी से खेल  रहे हैं।

मानवाधिकार न्यायालय में कलेक्टर सहित पांच अधिकारियों ने प्रस्तुत किए जवाब
शिवपुरी। अनुष्का की डेंगू से मौत के बाद आक्रोशित वकीलों ने जिला कलेक्टर का घेराव करने के बाद 24 घंटे में व्यवस्थाओं में सुधार का अल्टीमेटम दिया था। किन्तु 24 घंटे में कोई सुधार न होने से खफा होकर 12 वकीलों ने जिला मानवाधिकार न्यायालय में कलेक्टर, मेडीकल कॉलेज की डीन, सीएमएचओ, सीएमओ नगर पालिका को पक्षकार बनाकर उनके विरूद्ध याचिका प्रस्तुत की। जिस पर से आज कलेक्टर सहित पांचों अधिकारियों ने अपना जवाब शासकीय अभिभाषक के माध्यम से प्रस्तुत किया। वहीं आज याचिका कर्ता वकीलों की ओर से उसे सिविल सर्जन को पक्षकार बनाए जाने के लिए माननीय न्यायालय को आवेदन प्रस्तुत किया है। जिस पर से माननीय न्यायालय ने सिविल सर्जन को मामले का पक्षकार बनाया है और सिविल सर्जन के जवाब उपस्थिति और प्रारंभिक बहस के लिए 2 नवम्बर की तारीख मुकर्रर की है।  
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