शिवपुरी। कहते हैं कि एक पिता अपने पूरे परिवार का भरण पोषण कर देता हैं। उसके चाहे कितने ही बेटे और बेटिया हों। लेकिन देखने में आ रहा हैं,जैसे-जैसे स्कूलो में प्ले स्कूल खुल रहे हैं, वैसे ही समाज मे वृद्धाश्रम खुल रहे हैंं। बच्चे अपने माता-पिता का भरण पोषण् नही कर रहे हैं। इस कारण वृद्धाश्रम की संख्या बढ रही हैं। आदर्श ग्राम सिरसौद में संचालित वृद्धाश्रम में एक रिटायर्ड शिक्षक पिछले दो माह से रह रहे हैं, जबकि उनके दो बेटे हैं, जो शासकीय सेवा में हैं। बावजूद इसके उनका वृद्ध पिता वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर है। बेटा व बहू के दुर्व्यवहार से परेशान होकर शिक्षक ने शिकायत भी की है। इस आश्रम में पांच महिलाएं व 10 पुरुष वर्तमान में रह रहे हैं।
सिरसौद में लंबे समय तक शिक्षक के पद पर रहे ज्ञासीराम पारस ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मैं 2003 में रिटायर होने के बाद अपने बेटे-बहू के साथ रह रहा था। उन्होंने बताया कि मेरी पत्नी भी है जो बहू-बेटे के साथ रहती है, लेकिन उसके साथ भी उनका व्यवहार ठीक नहीं रहता।
ज्ञासीराम ने बताया कि मेरी पत्नी रोज मुझसे मिलने आती है और घर चलने के लिए कहती है, लेकिन अपने ही बेटे-बहू का व्यवहार अच्छा न होने से मैं उनके साथ नहीं रह सकता, क्योंकि बहू न केवल बुरा बोलती है, बल्कि खाने-पीने को भी नहीं देती। उन्होंने बताया कि मेरी पेंशन भी वे लोग निकाल लेते थे, जिसके चलते मैं बेहद परेशान रहता था।
इस आश्रम में आसपास क्षेत्र के ऐसे गरीब बुजुर्ग भी रहते हैं, जिनके बच्चे तो हैं, लेकिन उनकी आर्थिक हालत ठीक न होने से वे यहां रह रहे हैं। आश्रम के सुपरवाइजर केशव शर्मा ने बताया कि वृद्धजनों को सुबह चाय-नाश्ता, सुबह 11 बजे खाना तथा रात को साढ़े आठ बजे भोजन दिया जाता है।
इसके अलावा सुबह आश्रम परिसर में ही घूमने आदि के लिए जगह है। अभी मनोरंजन के लिए महज ढोलक-मजीरा हैं, लेकिन अभी टीवी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। केशव ने बताया कि हमने टीवी की मांग की है। यह आश्रम एनजीओ द्वारा संचालित किया जा रहा हैं।


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