मोरो का डिनर तो नही कर पाए अधिकारी, लेकिन इस काण्ड को जरूर पचा गए | SHIVPURI NEWS

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शिवपुरी। बीते रोज शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने एक खबर का प्रकाशन किया था। राष्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार काण्ड में एक ओर खबर आ रही है कि वनविभाग के एक आला अधिकारी के कहने पर ही काण्ड को दबा दिया गया हैं। उक्त शिकार वन विभाग के ही किसी वरिष्ठ अधिकारी के डिनर के लिए करवाया गया था। मोर का डिनर तो कर नही पाए वनविभाग के अधिकारी लेकिन इस मोर के शिकार कांड को पचा जरूर गया वनविभाग....। 

जैसा कि विदित है कि सतनवाड़ा रेंज में ग्राम गोपालपुर थाना क्षेत्र के पाडरखेड़ा रेलवे क्रासिंग के पास 2 मोरो का शिकार किया गया था। ग्रामीणो ने इस शिकारी को शिकार करते देख लिया जिससे उक्त शिकारी मृत मोरो को छोडक़र भाग गया था।  ग्रामीणो ने तत्काल इस मामले की सूचना वन विभाग के रेंज ऑफिस में दी। 

सतनवाड़ा वन टीम तत्काल सक्रिय हुई और मौके पर पहुंची। टीम ने जाकर इन दोनों मृत मोरों को अपने कब्जे में कर अपने साथ सतनवाड़ा लेकर आ गई। सतनवाड़ा पहुंचकर जैसे ही टीम ने इन मोरों का पीएम कराना चाहा तो किसी का फ ोन रेंजर सहाब के पास पहुंच गया। बस फिर क्या था पूरा वन अमला जिस तरीके से मोरों की छानबीन में लगा था। तत्काल पूरे मामले को निपटाने में जुट गया। 

टीम ने बिना पीएम कराए उक्त मोरों को ले जाकर वही पास में रेंज के पीछे दाह संस्कार करते हुए जला दिया। मोरों को जलाने के बाद टीम इनकी हड्डीयों को भी लेकर अपने साथ दूसरे स्थान पर पहुंचे और इन हड्डियों को ही कोई न देख ले इस तरह से एक खेत मेें दफना दिया। उसके बाद मामले की पर्देदारी में पूरा अमला जुट गया। लेकिन वनविभाग की शायद किस्मत खराब थी

इन हड्डियों को दफनाते हुए ग्रामीणों ने वन अमले को देख लिया। और अमले के जाते ही इन हड्डियों को समेट कर अपने थैले में भर लिया। जैसे ही इस मामले की भनक मीडिया को लगी अधिकारीयों के हाथ पैर फूलने लगे। तत्काल वन विभाग की टीम फिर उसी स्थान पर पहुंची और सबूत मिटाने में जुट गई। हलाकिं वन विभाग के अमले को मृत मोरो की अस्थियां नही मिली। 

इस पूरे घटनाक्रम में कई सवाल खडे कर रहे हैं। कि तत्काल इस मामले की सूचना फॉरेस्ट की सीएफ को दी गई। लेकिन कार्रवाई शून्य रही..........ग्रामीणो ने मोरो का शिकार करते शिकारी को देखा और पहचाना भी होगा,लेकिन वन विभाग ने कोई जांच शुरू नही की.........अगर शिकार शिकारी ने अपने लिए किया है तो वनविभाग उसे पताल में से भी खोद लाता लेकिन ऐसा नही हुआ। शिकार किया नही करवाया गया। 

रेंजर के पास जिस अधिकारी के पास फोन आया शिकार उसके डिनर के लिए करवाया गया था,इस कारण ही इस पूरे मामले को पचाने का प्रयास किया जा रहा हैं। सूत्रो का कहना है कि अभी भी मृत मोरो की अस्थिया ग्रामीणो के पास सुरक्षित रखी है,लेकिन उन्है यह हवा फैला कर डरा दिया गया है कि अब इन मोरो की अस्थिया लेकर आप विभाग के अकिधकारियों के पास जआगें तो उल्टा मामला दर्ज हो जाऐगा.......
इस पूरे मामले में फॉरेस्ट गार्ड से लेकर सीएफ तक नकार रहे हैं। 
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