संघर्ष के पीछे-पीछे चलती है सफलता, यह सिद्ध किया पिछोर की अंजू ओर अतुल ने | pichhore news

शिवपुरी। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग के तहत सहायक प्राध्यापक चयन परीक्षा.2017 हिन्दी एवं इतिहास विषय के अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम घोषित किया है। शासकीय छत्रसाल कॉलेज पिछोर में अतिथि विद्वान के रूप में कार्यरत डॉ अंजू सिहारे 98.50 प्रतिशत एवं अतुल गुप्ता  77.50 प्रतिशतद्ध ने जोड़ी से सफलता हासिल की है। 

दरअसल अतुल और अंजू दोनों का ही जीवन संघर्ष से भरा रहा है। दोनों मिले और एक दूसरे की ताकत बन गए। फरवरी 2007 में सगाई और फरवरी 2008 में विवाह बंधन में बंधने के बाद दोनों के जीवन को एक नई दिशा मिली। अंजू ने डॉ अंजू और असिस्टेंट प्रोफेसर बनने तक का सफर विवाह के बाद ही तय किया। अंजू इसका संपूर्ण श्रेय पति अतुल को ही देतीं हैं। वहीं अतुल भी अपनी सफलता के पीछे पत्नी का हाथ बताते हैं। 

डॉ अंजू सिहारे ने अपने परिवार में छटवीं बेटी के रूप के जन्म लिया था। स्वर्गीय पिता महादेव प्रसाद सिहारे का बीमारी के चलते निधन हो गया। छह बहनों में इकलौते भाई संतोष सिहारे पर परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी आ गई। पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद भी संतोष को आर्थिक तंगी के बीच चाय की छोटी दुकान खोलकर गुजर बसर करनी पढी। 

अंजू ने अपनी पढाई के साथ-साथ ट्यूशन से खर्च वहन किया। जून 2009 में यूजीसी नेट उत्तीर्ण किया और 2012 में डॉ लखन लाल खरे वर्तमान प्राचार्य करैरा कॉलेजद्ध के मार्गदर्शन में पीएचडी की उपाधी जीवाजी यूनिवर्सिटी से प्राप्त की। साल 2012 से 2018 तक शासकीय छत्रसाल कॉलेज पिछोर में हिन्दी विषय में अतिथि विद्वान के रूप में अध्यापन कराया। छात्रों को पढाने के साथ अपना भी अध्ययन जारी रखा। डॉ अंजू सिहारे के दो दर्जन से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र एवं एक काव्य संकलन, एक शब्द के लिए, भी प्रकाशित हो चुका है। 

अतुल गुप्ता ने भी ग्रामीण परिवेश में प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। हाईस्कूल की पढाई के दौरान पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं रही। बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढाई जारी रखी। बृंदा सहाय कॉलेज से बीएससी व एमए इतिहास में उत्तीर्ण किया। एमए के साथ दिसंबर 2005 का यूजीसी नेट उत्तीर्ण किया। 2007 से 2018 तक शासकीय माधव कॉलेज चंदेरी एवं शासकीय छत्रसाल कॉलेज पिछोर में अतिथि विद्वान इतिहास के रूप में अध्यापन शुरू किया। प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार एमएलबी कालेज, के मार्गदर्शन में शोध पूरा किया। 50 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
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