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सीवर प्रोजेक्ट घोटाला: मै पीयूष शर्मा आपके पास पहली बार आया हूं, विथ प्रूफ मामला है, सुनवाई की आस है।

शिवपुरी। सीवर प्रोजेक्ट के तहत केन्द्र सरकार और राज्य सरकार सहित जनता के सहयोग से पीपीपी पब्लिक एवं प्रायवेट पार्टनरशिप के तहत सीबर डिस्पोजल परियोजना 54.59 करोड़ की 2013 से प्रारंभ की गई थी जिसमें क्रियान्वयन एजेंसी के द्वारा लगातार अनियमितताऐं करने से को लेकर आप पार्टी के जनप्रतिनिधि के नाते हमारे द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका 4369/2014 को दाखिल किया जिसके तहत पीएचई विभाग द्वारा डब्ल्यू.बी.एम. रोड़ों का एक करोड़ 12 लाख रूपये से अधिक फर्जी भुगतान, घोटाले की पारदर्शिता की पूर्ण जांच को लेकर दण्डात्मक कार्यवाही किए जाने की मांग की गई है। 

आम आदमी पार्टी से शिवपुरी विधानसभा से प्रत्याशी घोषित हुए पीयूष शर्मा ने आज कलेक्टर शिल्पा गुप्ता से कार्यवाही की गुहार लगाई। पीयूष शर्मा ने कलेक्टर शिल्पा गुप्ता से कहा कि वह आपके पास पहली बार जनसुनवाई में आए है। ऐसा न हो कि इस जनसुनवाई में उनकी असुनवाई हो। जिस पर कलेक्टर ने मामले की जांचकर कार्यवाही का आश्वासन दिया।  

उक्त बात कही आम आदमी पार्टी के जिला संयोजक व पार्टी विधानसभा प्रत्याशी एड.पीयूष शर्मा ने जो स्थानीय होटल हैप्पीनेस में आयोजित पत्रकारवार्ता के माध्यम से सीवर प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों रूपये की सडक़ें डाले जाने को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की और इस मामले में जांच कराकर संबंधितों के विरूद्ध कार्यवाही कराने को लेकर पुरजोर मांग मीडिया के माध्यम से भी की। 

शिवपुरी मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान शिकायत पत्र प्रस्तुत कर एड.पीयूष शर्मा ने कलेक्टर को बताया कि सीवर प्रोजेक्ट की क्रियान्वयन एजेंसी ने उपरोक्त आदेश की लगातार अव्हेलना करते हुए अपनी अनियमितताऐं जारी रखी और यह सीवर प्रोजेक्ट फैल हो गया। सीवर प्रोजेक्ट की डीपीआर में क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा सीवर लाईन बिछाने हेतु नगर पालिका की सडक़ों को खोदा जाना, पाईन लाईन बिछाना एवं उसका भराव एवं कॉम्पेक्शन कर डब्ल्यू.बी.एम. रोड़ डालकर नगर पालिका परिषद शिवपुरी को पुन: सीसी रोड़ डालने हेतु प्रदान करना था। 

लेकिन क्रियान्वयन एजेंसी एवं लो.स्वा.यां.विभाग शिवपुरी के अधिकारी एवं कर्मचारियों की मिलीभगत एवं भ्रष्टाचार से शहर की 47 डब्ल्यू.बी.एम. रोड़ों का निर्माण किये बिना यहां तक की कॉम्पेक्शन एवं समतलीकरण किये बिना नगर पालिका को सभी सडक़ें हेण्डओवर कर दी गई जो कि उपरोक्त जनहित याचिका में पारित आदेश दिनांक 09 अक्टूबर 2014 का उल्लंघन होकर दण्डनीय है। 

एड.पीयूष शर्मा ने बताया कि इसके अतिरिक्त 47 सडक़ों में से 17 सडक़ें नगर पालिका शिवपुरी द्वारा डाल दी गई जिनकी यदि आज भी जांच (भौतिक सत्यापन) किया जावे तो डब्ल्यू.बी.एम. के कोई साक्ष्य भी प्राप्त नहीं होते। सडक़ों के नजदीक रहने वाले लोगों के बयान लिये जाने तो भी साक्ष्य प्राप्त हो जाऐंगें।

इसके अलावा शेष 30 सडक़ों में भी डब्ल्यू.बी.एम. सडक़ नहीं डाली गई है और इन 30 सडक़ों की वर्तमान में जांच कर भौतिक सत्यापन सहज संभव होकर इस विषय को लेकर न्यायालय से भी मांग की गई है और उपरोक्त 30 सडक़ें अब तक नगर पालिका द्वारा नहीं बनाई गई है जिससे शहर की जनता पीएचई एवं क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा पीडि़त एवं प्रताडि़त हो रही है। 

इन सडक़ों में किया भ्रष्टाचार, हो जांच
एड.पीयूष शर्मा ने प्रेसवार्ता में जिन 42 सडक़ों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है उनमें जांच की मांग भी की गई है। इन सडक़ों में प्रमुख रूप से फतेहपुर रोड़, आरसीसी से जलमंदिर, नबाब साहब रोड़, हंस बिल्डिंग से एबी रोड़, कष्टमगेट से जिला चिकित्सालय चौहरा, व्हीआईपी पान भण्डार, टोल नाका से तिकोनिया पार्क, टोंगरा रोड़, टोंगरा रोड़ से सिटी सेंंटर, विष्णु मंदिर से आशा फैक्ट्री, राजेश्वरी रोड़, लाल कॉलेज से हंस बिल्डिंग, नारियल वालों से गुरूद्वारा रोड़, अनाज मंडी से व्हीआईपी रोड़, हंस बिल्डिंग से अनाज मण्डी, एबी रोड़ से वायपास से मनियर रोड़, कष्टमगेट से जिला चिकित्सालय चौराहा, लक्ष्मीबाई कॉलोनी गली, वर्मा कॉलेनी, दर्पण कॉलोनी-2, भूत पुलिया से दो बत्ती, माधव नगर नं.-1, माधव नगर का कॉलेज-2, स्टेशन रोड़, न्यू पुलिस लाईन, कृष्णपुरम कॉलोनी, महावीर कॉलोनी, सब राज कॉलोनी, महारणा प्रताप कॉलोनी, विजयपुरम-2, हाथी खाना, विवेकान कॉलोनी, संजय गनर, महल कॉलोनी, दर्पण कॉलोनी नं.1, हरिजन थाना रोड़, लक्ष्मीबाई कॉलोनी, एसडीएम पब्लिक स्कूल गली, लुहारपुरा, हनुमान नगर तोमर पब्लिक स्कूल, हनुमान नगर -2, रेल्वे स्टेशन रोड़, अंबेडकर कॉलोनी, जाधव सागर से नीलगर चौराहा आदि प्रमुख सडक़ें शामिल है जो भ्रष्टाार की भेंट चढक़र इनमें 1 करोड़ 12 लाख रूपये का घोटाला गया। इसलिए इन सडक़ों का भौतिक सत्यापन हो और दोषियों के खिलाफ जांच कर दण्डात्मक कार्यवाही की जावे।

ये मेरा जन सुनवाई में पहला आवेदन है में जानना चाहता हूँ कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार वाकई जन सुनवाई में रुचि रख जनता को न्याय देने का काम कर रही है या 181 की तरह ये भी अनसुनवाई का प्रपंच चल रहा है और इसके नाम पर भी भारी भरकम तनख्वाह वाले अधिकारियों से बेगार कराने का काम किया जा रहा है !