दादी की अंतिम यात्रा में शामिल हुई गुप्ता परिवार की बेटियां

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। बीते रोज शिवपुरी के मुक्तिधाम पर एक विशेष नजारा देखने मिला जब वहाँ शिवपुरी के गहोई समाज के अध्यक्ष मनोज गुप्ता के यहां से अंकिता, अपूर्वा, पूजा, तनु, गोल्डी और खुशी अपनी परदादी श्री मति रामप्यारी गुप्ता उम्र 97 वर्ष के निधन के पश्चात उनकी अंमिम यात्रा में शामिल हुई बल्कि उनके दाह संस्कार के लिए मुक्ति धाम में पहुंची। 

अपनी बडी दादी को अंतिमयात्रा में पहुंची इस परिवार की बेटियो ने कहा कि जब पूरे समाज में बेटे-बेटी के समान अधिकार की बात चल रही है तो फिर यहाँ पर यह अधिकार हमसे क्यूँ छीना जा रहा है इसलिये हम सभी बहनों ने तय किया कि हम भी अपनी परदादी के अंतिम सफर में उनका साथ देंगे क्यूकि जिस दादी ने हमें बचपन से लेकर आज तक खिलाया उंगली पकडक़र चलना सिखाया और समाज के तौर तरीकों के बारे में बताया तो उस पर ही हम अमल कर रहे हैं। 

हमारी दादी श्रीमति रामप्यारी 97 साल की थी फिर भी उनकी सोच आज के जमाने की थी वह कभी भी बेटी को बेटे से कम नहीं समझती थी और आज हम जो यहां पर आये हैं यह भी उन्हीं की प्रेरणा रही है। मुक्तीधाम में सैकडों की संख्या में गुप्ता परिवार के रिश्तेदार व मिलने वाले मौजूद थे और वह इस बात की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उनके परदादी के प्रति उन बालिकाओं के प्रेम को और मजबूती प्रदान कर रहे थे। 

गौरतलब है कि बीते रोज शिवपुरी के बिगसिनेमा रोड़ पर रहने वाले गहोई समाज के अध्यक्ष मनोज गुप्ता,संजीव गुप्ता की दादी एवं कैलाश नारायण,महेश कुमार (एसडीओ),रामकुमार की माताजी श्रीमति रामप्यारी गुप्ता का 97 वर्ष की आयु में देहांत 7 जुलाई को सुबह 9 बजे हो गया था जिनकी अंतिम यात्रा सांय 4 बजे निकाली गई थी जिसमें उनके घर की 6 बालिकायें भी अंतिम यात्रा में शामिल हुईं। 

हम बच्चों की खिलौने जैसी भी थी दादी 
हम जब से पैदा हुए तभी से दादी जी को ऐसी ही अवस्था में देख रहे थे दादी का हमारे पूरे परिवार पर स्नेहहिल आर्शीवाद सदा बना रहा हम सब बच्चोंं के लिये दादी के रहते खिलौनों की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि दादी ही हमारे लिये खिलौने जैसी थी जब भी कोई रूठता था तो दादी सबसे पहले मनाने आती थीं आज जब हमारी दादी भगवान के पास जा रही थीं तो उनके साथ मुक्तीधाम तक का सफर करने की इच्छा हमने अपने बड़े परिजनों से कही तो उन्होंने इस बात को सहजता के साथ स्वीकार कर लिया और हमने दुखी मन से लेकिन चेहरे पर मुस्कान रखते हुए अपनी दादी को विदा किया। यह कहना था गुप्ता परिवार की लाड़ली बेटी अंकिता गुप्ता का जो गुना में रहकर अध्ययन कर रही है। 
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