मंगलम: प्रभुजी की घर हुई वापसी, डॉक्टर बेटा और बहु लेने झांसी से आए

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। 6-7 दिन तक 45 डिग्री तापमान में भूखे प्यासे मटका पार्क में पड़े प्रभुजी को मंगलम संस्था ने अपने वृद्धाश्रम में स्थान देकर उनकी बेहतरीन सेवा सुश्रुषा की। जिसके कारण उनकी जान बच गई। अच्छी देखभाल का परिणाम यह हुआ कि प्रभुजी को अपना घर याद आ गया कि वह झांसी के रहने वाले हैं और उनका एक बेटा डॉक्टर तथा दूसरा इंजीनियर है। कोतवाली पुलिस ने तुरंत झांसी पुलिस को सूचना देकर प्रभुजी द्वारा बताए गए पते पर पुलिसकर्मियों को दिया जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रभुजी शिखरचंद आर्य के पुत्र डॉ. दीपक आर्य पत्नि और ससुर सहित अपने पिता को लेने शिवपुरी पहुंच गए। पिता को देखकर वह भावुक हो उठे और उनकी आंखे छलछला आईं। उन्होंने मंगलम संस्था की तारीफ करते हुए कहा कि इस संस्था को धन्यवाद देने के लिए उनके पास शब्द नहीं है। मंगलम ने मेरे पिता की जान बचा ली। 

झांसी के रहने वाले डॉ. आर्य शासकीय चिकित्सालय उरई में फिजिशियन के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता 23 मई को झांसी से ग्वालियर जाने के लिए निकले थे, लेकिन वह ग्वालियर नहीं पहुंचे। इस पर उन्होंने झांसी में उनकी गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया और ग्वालियर से लेकर दिल्ली तक उन्हें ढूंढ़ा, परंतु वह नहीं मिले। 

घर में दुख का वातावरण था और सारे रिश्तेदार उन्हें सांत्वना देने के  लिए झांसी पहुंच गए। वह यहां कैसे आए उन्हें नहीं पता, लेकिन उनके पिता शिखरचंद आर्य जिनकी मानसिक स्थिति थोड़ी गड़बड़ है उन्होंने बताया कि ग्वालियर में ऑटो वाले ने उनकी जेब में रखे 300 रूपए निकाल लिए तथा उन्हें धक्का देकर बाहर फेंक दिया जिससे उनके सिर में चोट आई। वह शिवपुरी कैसे आए यह उन्हें भी नहीं मालूम। मंगलम में संचालक अजय खेमरिया के निर्देशन में जब उनकी काउंसलिंग हुई तब उक्त प्रभुजी का नाम पता और घर ठिकाना स्पष्ट हुआ। इसके बाद टीआई संजय मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिन्होंने झांसी के थानों में खबर भेजकर प्रभुजी की घर वापसी सुनिश्चिित की। 

मॉर्निंग वॉक पर आने वाले लोगों ने दिखाई थी मानवता 
गांधी पार्क के सामने स्थित मटका पार्क में काफी दिनों से एक वृद्ध को लकड़ी की बेंच पर 24 घंटे बैठे हुए देखा जा रहा था। इसके पहले मटका पार्क के सामने वह जमीन पर लावारिश अवस्था में पड़े हुए थे और लोग यह सोच रहे थे कि शायद कोई शराबी है, परंतु जब 4-5 दिन तक भूखे प्यासे वृद्ध को वहां देखा गया तो प्रतिदिन घूमने आने वाले लोगों की संवेदना जागी और उन्होंने मंगलम पदाधिकारी अशोक कोचेटा को इससे अवगत कराया। 

उस समय अपना नाम शिखरचंद आर्य बताने वाले उक्त वृद्ध की हालत बहुत खराब थी। वह मैली कुचली अंडरवियर और बनियान पहने हुए थे। भूख के मारे बुरा हाल था और गिड़गिड़ा रहे थे कि पानी पिला दो अन्यथा वह मर जाएंगे। इस पर उन्हें तुरंत वहीं पानी और हल्का फुल्का नाश्ता कराया गया तथा मंगलम पदाधिकारी कोचेटा ने उन्हें वृद्धाश्रम में डायल 100 पुलिसकर्मियों की सहायता से भर्ती कराया गया था जहां उन्हें पहले चाय और नाश्ता कराया गया तथा फिर अच्छी तरह से स्नान कराया गया जब इसके बाद उन्हें खाना खिलाया गया तब कहीं जाकर वह सहज हुए। 

मेरे पिता को मिला है एक नया जीवन 
वृद्ध शिखरचंद आर्य के पुत्र डॉ. दीपक आर्य का कहना है कि उनके पिता को लापता हुए 10-12 दिन हो गए थे और धीरे धीरे उनकी आशाएं टूटती जा रही थीं, लेकिन यहां आकर मैंने देखा कि मेरे पिता को मॉर्निंग वॉक पर घूमने आने वाले लोगों तथा मंगलम संस्था ने एक नया जीवन दिया है। उनके इस मानवीय कार्य की प्रशंसा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। 

डॉ. आर्य ने बताया कि उनके पिता प्रायवेट प्रैक्टिस करते हैं और उनका स्वास्थ्य 4-5 माह से कुछ खराब चल रहा था। हमसे भूल हुई कि हमने उन्हें अकेले झांसी से ग्वालियर भेजा जहां वह मेरे मौसा और मौसी से मिलने जा रहे थे। डॉ. आर्य ने कहा कि उनका एक भाई राजकमल आर्य इंजीनियर है जो अहमदाबाद में रहता है। 
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