कांग्रेस जिलाध्यक्ष बदले, हरवीर सिंह हटाए, बैजनाथ सिंह नियुक्त

शिवपुरी। अभी हाल ही में कोलारस उपचुनाव में अपनी जीत दर्ज कराकर अपने आप को मजबूत मान रही कांग्रेस में एक बार फिर गुटवाजी सामने आई है। कांग्रेस में जिलाध्यक्ष का बनने से पहले ही रायसुमारी में पर्यवेक्षक से भिडने के चलते हरवीर सिंह रघुवंशी से ताज छिन गया। बीते दिनों शिवपुरी दक्षिण के ब्लॉक अध्यक्ष और मंडलम पदाधिकारियों को चुनने हेतु बुलाई गई बैठक में शिवपुरी उत्तर के कार्यकर्ताओं के आने से हुए हुड़दंग की गाज पांच कांग्रेस नेताओं पर गिरी है। पार्टी ने इस मामले में सख्त कार्यवाही करते हुए जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पद से हरवीर सिंह रघुवंशी को हटा दिया है और उनके स्थान पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता बैजनाथ सिंह यादव की नियुक्ति की गई है। श्री रघुवंशी पर आरोप है कि उन्होंने शिवपुरी दक्षिण ब्लॉक के कार्यकर्ताओं की बैठक में उत्तर के कार्यकर्ताओं को बुलाकर अनुशासनहीनता को निमंत्रित किया। 

इस मामले में कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बैजनाथ सिंह यादव ने चार कांग्रेस नेताओं मंडी संचालक इब्राहिम खान, पार्षद आकाश शर्मा, युवक कांग्रेस नेता इरशाद पठान और पूर्व पार्षद छत्रपाल सिंह गुर्जर को अनुशासनहीनता का प्रथम दृष्टि में दोषी मानते हुए नोटिस जारी किया है। उक्त कांग्रेस नेताओं से तीन दिन में नोटिस का जवाब देने को कहा गया है। हालांकि जिन्हें नोटिस जारी किया गया है उन्होंने अपने आपको बेकसूर बताया है। 

कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बैजनाथ सिंह यादव के  हस्ताक्षर से जारी नोटिस में कहा गया है कि आपने बैठक में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया और बैठक का माहौल खराब किया। आपके अनुशासनहीनता के कारण पार्टी की छवि को आघात पहुंचा है और संविधान का उल्लंघन हुआ है। समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित होने से पार्टी की छवि धूमिल हुई है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि  वरिष्ठजनों द्वारा समझाने के बाद भी आप लगातार अनुशासनहीनता करते रहे जिससे बैठक स्थगित करनी पड़ी। इसके लिए क्यों न आपको पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए और इस विषय में आप अपना अभिमत तीन दिन में प्रेषित करें। जवाब न देने पर अथवा संतोषजनक जवाब न होने पर आपको पार्टी से निष्कासित कर दिया जाएगा।  अनुशासनहीनता के खिलाफ की गई इस कड़ी कार्यवाही से कांग्रेस में हडक़ंप का वातावरण व्याप्त है। 

रायशुमारी करने आए पर्यवेक्षकों के समक्ष भिड़े थे कांग्रेस नेता 
14 अप्रैल को शहर कांग्रेस कार्यालय पर शिवपुरी दक्षिण के ब्लॉक अध्यक्ष और मंडलम के पदाधिकारी चुनने हेतु पैनल बनाने के लिए पर्यवेक्षक मोहन सिंह राठौर और अमिताभ हर्षी ने बैठक बुलाई थी। इस बैठक में शिवपुरी दक्षिण के कार्यकर्ताओं को भाग लेना था, लेकिन आरोप है कि बैठक में शिवपुरी उत्तर के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में आ गए थे। इसी पर बैठक में विवाद शुरू हो गया और शिवपुरी उत्तर के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति पर कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी अब्दुल रफीक अप्पल ने आपत्ति जाहिर की और कहा कि यह कोई शक्ति प्रदर्शन का स्थल नहीं है। 

यह आरोप लगा कि शिवपुरी उत्तर के कार्यकर्ताओं को हरवीर सिंह रघुवंशी ने बुलाया था, लेकिन इसी बात पर विवाद इतना गहराया कि कांग्रेस नेता आमने सामने आ गए। बैठक में नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष पदम चौकसे और हरवीर सिंह रघुवंशी के बीच तीखी झड़प हुई और श्री चौकसे ने सवाल किया कि हरवीर ने शिवपुरी उत्तर के कार्यकर्ताओं को क्यों बुलाया है। अब्दुल रफीक अप्पल और राजेंद्र शर्मा के बीच झड़प हुई। श्री अप्पल का आरोप था कि वह विवाद करने वाले कांग्रेसियों को बैठक में लेकर आए। श्री शर्मा के बचाव में उनके भतीजे कपिल भार्गव मैदान में आए और उनकी भी श्री अप्प्ल से झड़प हुई। श्री अप्पल ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक का माहौल खराब करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह गुट के हैं और इसी गुटबाजी के कारण श्री सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित नहीं किया जा रहा। जबकि कांग्रेस के सत्ता में आने के लिए सिंधिया की घोषणा अत्यंत आवश्यक है। युवक कांग्रेस नेता इरशाद पठान ने सिंधिया के नजदीकियों पर आरोप लगाया। बैठक में इतना हुड़दंग हुआ कि पर्यवेक्षकों को बैठक स्थगित करनी पड़ी और झड़प की खबर पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। 

इनका कहना है-
बैठक में मैंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की है और न ही किसी भी समाचार पत्र में मेरा नाम अनुशासनहीनता के संदर्भ में प्रकाशित हुआ। इसके बाद भी यदि मुझे नोटिस मिला है तो मैं समझता हूं एक बड़े नेता जो मुझसे खुन्नस रखते हैं उन्होंने ऐसा करवाया है, लेकिन सांसद सिंधिया पर मुझे पूरा भरोसा है, वह मुझे अवश्य न्याय दिलाएंगे। 
आकाश शर्मा, पार्षद नगरपालिका शिवपुरी

बैठक में मैंने सिर्फ मुद्दों और कायदों की बात की है। सिंधिया की छवि कैसे बने और कांग्रेस का वर्चस्व कैसे बढ़े इस पर मैंने बैठक में चर्चा की है। मेेरा तो किसी से विवाद नहीं हुआ है बल्कि मैंने तो बीच बचाव किया है। 
छत्रपाल सिंह गुर्जर, पूर्व पार्षद

मेरी गलती यह थी कि मैं उत्तर का कार्यकर्ता था, लेकिन दक्षिण की बैठक में चला आया, परंतु इसमें भी मेरा दोष नहीं है। मेरे पास शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ लढ़ा का मोबाइल आया था कि तुम्हारे समाज के शिवपुरी उत्तर के कुछ कार्यकर्ता बैठक में आ गए हैं उन्हें समझाकर ले जाओ। इसलिए मैं बैठक में चला गया, लेकिन मैंने वहां कोई विवाद नहीं किया। महाराज और कांग्रेस के हित की बात सामने रखी।
इरशाद पठान, युवक कांग्रेस नेता 

मैं बैठक में गया अवश्य था, लेकिन पूरी बैठक में मैं चुप रहा। मैं न तो किसी से कुछ बोला और न ही मैंने कोई विवाद नहीं किया। समाचार पत्रों में भी विवाद के संबंध में मेरा कोई नाम नहीं है। इसके बाद भी मुझे नोटिस क्यों मिला यह आश्चर्यजनक है। मैं समझता हूं कि मैं कुछ लोगों के षडय़ंत्र का शिकार हुआ हूं, लेकिन महाराज पर मेरा पूरा यकीन है। 
इब्राहिम खान, मंडी संचालक 
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