किताब-कॉपी के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़े, पालक परेशान

शिवपुरी। जीएसटी और नोटबंदी के बाद महंगाई के इस दौर में बच्चों की शिक्षा अभिभावकों के लिए घर का बजट बिगाड़ने वाली साबित हो रही है। किताब, कॉपियों सहित अन्य स्कूल सामग्री के दाम बढ़ने से आम आदमी के घर का बजट बिगड़ गया है। अभिभावकों को स्कूल फीस के अलावा एक बच्चे पर लगभग 5 से 7 हजार रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। बेल्ट, बाटल, टिफिन से लेकर बस्ते तक सब कुछ महंगे हो गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष स्कूल सामग्री के दामों में 30 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो गई है। कमर तोड़ महंगाई ने आम जनता का जीना बेहाल कर दिया है। ऐसे में स्कूल सामग्री के दाम बढ़ने से अभिभावक खासे परेशान हैं। 

बढ़ा बस्ते का बोझ: निजी स्कूलों ने सभी कक्षाओं में एक दो किताब बढ़ाई हैं। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष उनके बस्ते का बोझ और बढ़ गया है। इससे बच्चों में पीठ दर्द की समस्या हो रही है। 

समस्या : अभिभावकों की जेब ढीली कर रही महंगी पढ़ाई, खर्च वहन कर पाना हो रहा मुश्किल।

स्कूलों और दुकानों की सांठगांठ से मिलता है कमीशन 
नगर के नामी स्कूलों की चुनिंदा दुकानों से सांठ-गांठ होने की बात अभिभावकों द्वारा कही जा रही हैं। अभिभावकों की इस बात को स्कूली सामग्री की चुनिंदा दुकानों पर उपलब्धता सही साबित भी कर रही है। इन दुकानों पर सामग्री खरीदने से स्कूलों को मोटा कमीशन मिल जाता है। इसलिए यह सामग्री अन्य स्थानों पर नहीं मिलती है। इस मामले में अभिभावक शिकायत इसलिए भी नहीं कर पा रहे क्योंकि इन दुकानों का नाम स्कूलों से मौखिक रूप से बताया जा रहा है। यही हाल स्कूल यूनिफार्म सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री का है। वैसे तो निजी शैक्षणिक संस्थान मई-जून माह से ही अपने स्कूल कॉलेजों का प्रचार करने में लगे हुए हैं। लेकिन जुलाई का माह लगते ही तहसील के अंतर्गत आने वाले कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शिक्षा संस्थान अभिभावकों को रिझाने के जतन में लगे हुए हैं। जहां एक समय नगर में गिने चुने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान होने के चलते कई अभिभावक सिफारिश करके अपने बच्चों के एडमिशन करवाते थे, लेकिन इस समय शिक्षा संस्थान अभिभावकों को मनाने में लगे हुए हैं कि उनके संस्थान में बच्चों का एडमिशन कराए वहीं पहले की अपेक्षा शिक्षा महंगाई की मार झेल रही है। 

स्कूलों के हिसाब से कापी किताबों के दाम भी अलग-अलग हैं। जिन स्कूलों की फीस अधिक है। उनकी ड्रेस सहित अन्य सामग्री भी महंगी है। इसके चलते अब बच्चों को महंगे स्कूलों में पढ़ाना कठिन हो रहा है। 
पूजा शर्मा, गृहिणी 

आजकल बच्चों की पढ़ाई बहुत ही महंगी हो गई हे। हर साल किताबों, कापियों सहित अन्य सामग्री के दाम बढ़ते हैं फिर भी बच्चों को पढ़ाना जरूरी है। 
राजेश दुबे, अभिभावक
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