शराब से बचकर ही इससे बचा जा सकता है: टीआई मिश्रा

0
शिवपुरी। शराब से बचना है तो एक मात्र मंत्र है नैवर वन टाइम (एक बार भी नहीं)। अनुभव से गुजरकर शराब से बचा नहीं जा सकता बल्कि यह आपको अपने गिरफ्त में ले लेगी। उक्त उदगार कोतवाली टीआई संजय मिश्रा ने कल रात सावरकर पार्क में आयोजित नशा मुक्ति सेमिनार में व्यक्त किए। सेमिनार में इंदौर से आए सात युवा ऐसे थे जो 10-10-15-15-20-20 साल से नशा कर इसके  आदी हो चुके थे, लेकिन अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से वह इससे मुक्त हो चुके थे और अपना परिचय देते समय उन्हें अपने आपको शराबी कहने में भी संकोच नहीं हो रहा था। 

इसका परिणाम यह हुआ कि सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रहृमदत्त गुप्ता ने निसंकोच भाव से यह स्वीकार कर लिया कि एक समय वह मजे के लिए बेतहाशा पीते थे, लेकिन जब उन्हें पेट में भयंकर दर्द हुआ तो वह भागीरथ प्रयास कर इससे मुक्त होने में सफल हुए। श्री गुप्ता ने नशा छोडऩे वाले युवाओं को रीयल हीरोज की संज्ञा दी। कार्यशाला के आयोजक नीलेश सांखला, दिनेश गर्ग और छत्रपाल सिंह गुर्जर थे।  

नशा करने वालों को शराबी, गंजेड़ी, बेबड़ा, पागल और न जाने क्या-क्या कहा जाता है और उनके प्रति समाज का रूख बहुत कठोर होता है जबकि नशा कर उन्होंने महसूस किया है कि नशा एक बीमारी है और बीमारी को इलाज से ठीक किया जा सकता है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ब्रहृमदत्त गुप्ता ने अपने उदबोधन में कहा कि सुबह का भूला यदि शाम को घर लौट आता है तो उसे भूला नहीं कहा जा सकता। ये युवा बहुत हिम्मती हैं जो मंच पर आकर अपने आपको शराबी कहने में संकोच महसूस नहीं कर रहे और अपनी हिम्मत तथा बुराई से दूर होने की ललक से वह समाज के रीयल हीरो हैं।

इससे भी अच्छी बात यह है कि नशे से दूर होकर अब वह दुनिया को नशा मुक्त होने का संदेश दे रहे हैं। कार्यक्रम में सावरकर पार्क को संवारने वाले छत्रपाल सिंह गुर्जर ने बताया किस तरह से उन्होंने एक मुनि महाराज की प्रेरणा से 200 गांवों के लोगों से नशा छोडऩे का संकल्प कराया। इसका परिणाम यह हुआ कि गुर्जर समाज के लोगों को आपसी झगड़े और हिंसा से मुक्ति मिली। इससे जाहिर है कि नशा बुराईयों की जड़ है।

मुझे फक्र है कि मैंने कभी नशा नहीं किया
टीआई संजय मिश्रा ने अपने उदबोधन में कहा कि ऐसा नहीं कि मुझे नशा ऑफर नहीं किया गया हो। कॉलेज समय में मेरे एक परम मित्र ने मुझे शराब का गिलास दिया और कहा कि एक बार पीने से क्या होता है इस पर मैंने जब इंकार किया तो उनका आग्रह और बढ़ता चला गया। तब यह कहकर मैंने अपनी जान बचाई कि एक बार मैंने अगर शराब पी ली तो फिर गर्व से नहीं कह पाऊंगा कि मैंने शराब का कभी सेवन नहीं किया। 

श्री मिश्रा ने कहा कि सेमिनार में प्रत्येक व्यक्ति ने शराब की बुराई बताई और मैं सोच रहा था कि मुझे इसकी कुछ अच्छाई बताना चाहिए, लेकिन मुझे शराब और नशे में कुछ भी अच्छाई नहीं दिखी। दुनिया में जितने भी अपराध हत्या बलात्कार छेड़छाड़ आदि के होते हैं उनमें मूल कारण नशा होता है। अपराधों से बचना है तो नशा छोडऩा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोई भी पिता नहीं चाहता कि उसका पुत्र नशेलची बने इसलिए पुत्र को नशे से मुक्त कराने के लिए पिता को स्वयं नशा मुक्त होना चाहिए। 
Tags

Post a Comment

0Comments

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!